नीट-यूजी परीक्षा धांधली में EOU की सख्ती
नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा में सामने आए बड़े फर्जीवाड़े के मामले में बिहार की आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने अपनी जांच की गति को काफी तेज कर दिया है। लखीसराय के तेतरहाट थाने में चल रही इस जांच प्रक्रिया के दौरान डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने करीब 30 आरोपियों से लगातार 7 घंटों तक मैराथन पूछताछ की है। इस पूरे गिरोह में साल्वर गैंग के सदस्यों के साथ ही बायोमैट्रिक प्रक्रिया से जुड़े कर्मी भी शामिल हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लखीसराय की पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार भी ईओयू की पूरी टीम के साथ मौके पर मौजूद रही हैं।
डीआईजी ने साधी चुप्पी
लखीसराय के तेतरहाट थाने में घंटों चली इस पूछताछ के बाद भी डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने मीडिया के सामने किसी भी प्रकार का आधिकारिक बयान देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल किसी भी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, जांच से जुड़े सूत्रों का ऐसा मानना है कि बंद कमरे में हुई इस लंबी पूछताछ के बाद सॉल्वर सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड्स का पर्दाफाश होना लगभग तय माना जा रहा है। अधिकारियों का पूरा ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां कहां-कहां तक जुड़ी हुई हैं।
21 जून की परीक्षा और खुलासे
यह पूरी कार्रवाई बीते 21 जून 2026 को आयोजित की गई नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के दौरान हुए एक बड़े खुलासे के बाद शुरू हुई थी। लखीसराय के परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने 9 ऐसे फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ा था जो वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह पर परीक्षा देने पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पकड़े गए अधिकांश छात्र मेडिकल कोर्स के फर्स्ट और सेकेंड ईयर के विद्यार्थी हैं। इस मामले में कुछ नामी डॉक्टरों की भूमिका भी जांच एजेंसी के रडार पर है और उनकी मिलीभगत होने का संदेह जताया जा रहा है।
लाखों की डील और साल्वर गैंग का खेल
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह एक बेहद संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था, जो असली अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का वादा करता था। इस पूरी डील की प्रक्रिया के तहत मोटी रकम तय की जाती थी, जिसमें से आधी राशि एडवांस के तौर पर पहले ही ले ली जाती थी। शेष बची हुई रकम का भुगतान परीक्षा परिणाम आने के बाद किया जाना तय हुआ था। आर्थिक अपराध इकाई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बायोमैट्रिक जांच के दौरान इन फर्जी परीक्षार्थियों को केंद्र के भीतर एंट्री देने में किन-किन लोगों की सहायता ली गई थी।
अश्विनी कुमार पर बड़ी कार्रवाई
इस फर्जीवाड़े की आंच अब शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गई है। नीट-यूजी 2026 धांधली के मामले में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी पीएमसीएच प्रशासन ने एक कठोर कदम उठाया है। लखीसराय के किऊल थाने में दर्ज प्राथमिकी और स्वास्थ्य विभाग से मिले सख्त निर्देशों के बाद, कॉलेज प्रशासन ने आरोपी एमबीबीएस छात्र अश्विनी कुमार का नामांकन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इतना ही नहीं, उसका हॉस्टल आवंटन भी रद्द कर दिया गया है।
कॉलेज प्रशासन का रुख
इस संदर्भ में प्राचार्या डॉ. गीता सिन्हा ने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरों, नामांकन रजिस्टर और मोबाइल नंबरों के मिलान के आधार पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जांच में यह भी पता चला है कि जिस दिन परीक्षा हुई थी, उस दिन आरोपी छात्र कॉलेज की विशेष कक्षाओं से भी नदारद था। छात्र पर आरोप है कि उसने परीक्षा केंद्र पर मौजूद बायोमैट्रिक कर्मचारी के साथ सांठगांठ की और पहचान की प्रक्रिया को प्रभावित करते हुए किसी दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा में भाग लिया। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ईओयू की जांच में आरोपी छात्र के खिलाफ आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो उसका नामांकन स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
https://hindi.news18.com/news/bihar/lakhisarai-neet-ug-2026-scam-eou-interrogates-30-accused-lakhisarai-solver-gang-update-ws-l-10646450.html