फर्जीवाड़े का खुलासा
बिहार के पूर्णिया जिले स्थित मेडिकल कॉलेज में इन दिनों एक बड़े फर्जीवाड़े की चर्चा जोरों पर है। दरअसल, यहाँ एक छात्र एमबीबीएस (MBBS) की इंटर्नशिप पूरी करने के लिए पहुंचा था, लेकिन उसके दस्तावेजों की जांच के दौरान ही उसकी पोल खुल गई। छात्र ने इंटर्नशिप के लिए जो एनओसी (NOC) पेश किया था, वह पूरी तरह से फर्जी पाया गया। जीएमसीएच (GMCH) पूर्णिया के प्रिंसिपल डॉक्टर हरिशंकर मिश्रा ने इस मामले की पुष्टि की है और आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया है।
ऐसे पकड़ा गया आरोपी छात्र
गिरफ्तार किए गए छात्र की पहचान अहमद अदनान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से रोहतास जिले के दावत थाना क्षेत्र का निवासी है। अहमद अदनान ने दावा किया था कि उसने कजाकिस्तान की कजाख नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। वह एनओसी लेकर जीएमसीएच पूर्णिया में इंटर्नशिप शुरू करने के इरादे से पहुंचा था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कॉलेज प्रशासन ने उसके एनओसी पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन किया। जांच में पाया गया कि वह प्रमाण पत्र वास्तव में दीक्षित मानव नाम के व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया था। हैरानी की बात यह है कि अहमद अदनान और दीक्षित मानव, दोनों का एजुकेशनल प्रोग्राम कोड 6B 10 107 बिल्कुल एक जैसा था। इस विसंगति के सामने आते ही कॉलेज प्रशासन ने कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद अहमद अदनान का फर्जीवाड़ा सबके सामने आ गया।
प्रिंसिपल ने दी जानकारी
जीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉक्टर हरिशंकर मिश्रा के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने विदेश से पढ़कर लौटे कुल 100 एफएमजी (FMG) छात्रों की सूची इंटर्नशिप के लिए कॉलेज को सौंपी थी। जब कॉलेज स्तर पर इन छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन किया गया, तो अहमद अदनान का एनओसी फर्जी निकला। इसके तुरंत बाद प्रिंसिपल ने खजांची हाट थाना पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छात्र को हिरासत में ले लिया और उसे गिरफ्तार कर अपने साथ थाने ले गई।
मामले की विस्तृत जांच जारी
पूछताछ के दौरान आरोपी अहमद अदनान ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दावा किया कि उसके पास वहां से एमबीबीएस की डिग्री है। हालांकि, पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि इस तरह के फर्जीवाड़े के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में राजस्थान से भी ऐसी खबरें आई थीं, जहां विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए 17 लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करते हुए पकड़े गए थे। डॉक्टर हरिशंकर मिश्रा का मानना है कि यदि इस तरह के मामलों की गहराई से जांच की जाए, तो फर्जी कागजात के आधार पर डॉक्टर बनने या इंटर्नशिप करने के और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, पूर्णिया पुलिस इस पूरे गिरोह और फर्जीवाड़े के पीछे के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
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