जन्मदिन के दिन ही अंतिम विदाई, तिरंगे में लिपटे पिता को देख बिलखती रही 18 महीने की मासूम बेटी

झूंझुनूं जिले के वीर जवान कुलदीप दिवाच की अंतिम विदाई ने हर किसी का दिल झकझोर कर रख दिया, जहां उनकी छोटी बेटी पिता को ढूंढती रही और पत्नी बदहवास हो गई।

झूंझुनूं में मातम का मंजर

शुक्रवार का दिन राजस्थान के झूंझुनूं जिले के इतिहास में एक बेहद दुखद अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। भारतीय नौसेना के जांबाज जवान कुलदीप दिवाच (28 वर्ष) की पार्थिव देह जैसे ही उनके पैतृक गांव घरडू पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया और हर व्यक्ति की आंखें डबडबा गईं। लोग स्तब्ध थे कि देश ने एक होनहार बेटा खो दिया। माहौल में सबसे ज्यादा दर्द तब पैदा हुआ जब कुलदीप की 18 महीने की नन्ही बेटी को पिता के आखिरी दर्शन कराए गए। तिरंगे में लिपटे पिता के शव को देखकर वह मासूम लगातार पापा कहकर पुकारती रही, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों लोगों का दिल फट पड़ा।

पत्नी का छलका दर्द

इस गमगीन माहौल में कुलदीप की पत्नी का धैर्य पूरी तरह जवाब दे गया। वह बार-बार अपनी सुध-बुध खो रही थीं और बिलखते हुए कह रही थीं कि देखो तुम्हारी बेटी तुम्हें बुला रही है, वापस आ जाओ। उनके क्रंदन को सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। परिवार की अन्य महिलाओं, मां और भाई का भी रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव में सिर्फ भारत माता की जय और कुलदीप अमर रहें के नारों की गूंज सुनाई दे रही थी, जो वातावरण को और भी भावुक बना रही थी।

हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई

शुक्रवार की सुबह करीब 9:30 बजे सूरजगढ़ थाने से कुलदीप दिवाच की अंतिम यात्रा शुरू हुई। करीब 3 किलोमीटर लंबी इस तिरंगा यात्रा में हजारों लोग और सैकड़ों वाहनों का काफिला शामिल था। रास्ते भर में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, स्कूली विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों ने पुष्प वर्षा कर अपने वीर सपूत को अंतिम नमन किया। करीब 10:30 बजे पार्थिव देह घरडू गांव पहुंची, जहां अंतिम दर्शन के बाद नौसेना के बैंड की धुन के साथ गांव से 3 किलोमीटर दूर श्मशान घाट के लिए यात्रा प्रस्थान कर गई।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार

श्मशान घाट पर भारतीय नौसेना की ओर से कुलदीप दिवाच को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार, पिलानी विधायक पितराम सिंह काला, पूर्व सांसद संतोष अहलावत, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेश कुमार जांगिड़, भाजपा नेता राजेश दहिया, सूरजगढ़ प्रधान बलवान सिंह पूनिया, डीएसपी विकास धींधवाल और थानाधिकारी रणजीत सिंह सेवदा समेत कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। दोपहर करीब 1 बजे उनके बड़े भाई प्रदीप, जो खुद भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं, ने कुलदीप को मुखाग्नि दी।

नियति का क्रूर संयोग

विधायक श्रवण कुमार ने इस दुखद संयोग का जिक्र करते हुए बताया कि 10 जुलाई का दिन कुलदीप के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण रहा। 10 जुलाई 1999 को उनका जन्म हुआ था, इसी महीने की 10 तारीख को उनका नौसेना में चयन हुआ था और विधि का ऐसा विधान रहा कि 10 जुलाई को ही उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

हादसे का दुखद ब्योरा

घटना की जानकारी देते हुए बताया गया कि 6 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे कुलदीप अपनी स्कूटी पर सवार होकर मुंबई में ड्यूटी पर जा रहे थे। रास्ते में अचानक आए तेज अंधड़ के कारण सड़क किनारे लगा एक पेड़ उनके ऊपर गिर गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उपचार के दौरान 9 जुलाई की सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली। लेफ्टिनेंट कमांडर रजत तोमर के नेतृत्व में नौसेना की टीम दिल्ली होते हुए उनकी देह को सूरजगढ़ लेकर पहुंची थी।

देश सेवा के लिए समर्पित जीवन

कुलदीप दिवाच वर्ष 2018 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। वे लीडिंग एयर ऑर्डनेंस मैकेनिक (LAOM) के पद पर तैनात थे और भारतीय नौसेना पोत शिकरा पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। यह विभाग नौसेना के विमानों के हथियारों और गोला-बारूद के रखरखाव का अहम काम करता है। अपने पीछे वे मां सुभीता देवी, पत्नी संगीता, बेटी हर्षिता और भाई प्रदीप को छोड़ गए हैं। उनकी यह विदाई पूरे देश के लिए एक प्रेरणा और गहरी क्षति बन गई है।

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