डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के मामले में आरोपी चाचा को फांसी की सजा, मात्र 40 दिन में आया कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के बच्चे आरव को बेरहमी से सड़क पर आठ बार पटककर जान लेने वाले आरोपी चाचा को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। इस खौफनाक हत्याकांड के बाद मात्र 40 दिनों की कानूनी प्रक्रिया के भीतर अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है।

क्रूरता की हद पार करने वाला मामला

उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद में घटित एक अत्यंत हृदयविदारक घटना में अदालत ने एक मासूम बच्चे की निर्मम हत्या के दोषी को फांसी की सजा का ऐलान किया है। डेढ़ साल के नन्हें आरव की हत्या के आरोपी और रिश्ते में उसके चाचा लगने वाले व्यक्ति को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए मृत्युदंड दिया है। यह फैसला न्याय व्यवस्था की त्वरित कार्रवाई का एक उदाहरण पेश करता है, जहां घटना के महज 40 दिन के भीतर ही अदालत ने अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित करते हुए सजा सुना दी। इस नृशंस हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और न्याय की मांग को लेकर लोगों में भारी रोष देखा गया था।

घटना का विवरण और दरिंदगी

यह दुखद घटना 30 मई को प्रकाश में आई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सार्वजनिक सड़क पर बेरहमी से उठा-उठाकर जमीन पर पटक दिया था। इस दरिंदगी का सिलसिला एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे आठ बार दोहराया गया, जिसके कारण मासूम बच्चे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस पूरी वारदात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी थी। घटना के बाद आरोपी के प्रति जनता में भारी आक्रोश था और हर कोई इस नृशंसता की कड़ी निंदा कर रहा था।

अदालती कार्यवाही और न्याय की गति

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और न्यायपालिका ने अत्यंत सक्रियता दिखाई। शिकोहाबाद की अदालत ने इस केस को फास्ट ट्रैक की तरह लेते हुए सभी साक्ष्यों और सबूतों का बारीकी से अध्ययन किया। वीडियो फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए अदालत ने आरोपी विराज को आरव की हत्या का दोषी ठहराया। 10 जुलाई की तारीख इस मामले में सजा सुनाने के लिए निर्धारित की गई थी, जिसके तहत कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। महज 40 दिन के भीतर सजा का ऐलान होना कानूनी प्रक्रिया में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय का अनुभव मिला है।

कानूनी संज्ञान और प्रक्रिया

अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के साथ की गई यह हरकत अक्षम्य थी। न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और फोरेंसिक सबूतों का संज्ञान लिया। आरोपी द्वारा किए गए कृत्य की क्रूरता ने उसे किसी भी प्रकार की नरमी का पात्र नहीं छोड़ा। अदालत ने स्पष्ट किया कि समाज में इस तरह के अपराधों के लिए सख्त से सख्त सजा का प्रावधान होना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जा सकें। पुलिस प्रशासन ने भी इस मामले में त्वरित चार्जशीट दाखिल करने में सराहनीय भूमिका निभाई, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में देरी नहीं हुई।

पीड़ित परिवार और समाज का रुख

आरव की मृत्यु के बाद से ही उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। समाज के हर वर्ग ने इस घटना के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की थी। जब 10 जुलाई को फैसला आया, तो क्षेत्र के लोगों ने इसे न्याय की जीत बताया। लोगों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से अपराधी की मानसिकता पर लगाम लगेगी। शिकोहाबाद के स्थानीय निवासियों ने अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे मासूम आरव के लिए सच्ची श्रद्धांजलि करार दिया है।

भविष्य के लिए कड़ा संदेश

यह मामला केवल एक हत्या का केस नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और संवेदनशीलता का प्रश्न भी है। मात्र 40 दिनों में मौत की सजा का सुनाया जाना भारत की न्याय प्रणाली की दक्षता को प्रदर्शित करता है। आरोपी को ले जाने के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में भी लोगों का गुस्सा साफ तौर पर देखा गया। अदालत का यह कठोर रुख अब अन्य लंबित मामलों के लिए भी एक नजीर के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने यह साबित किया है कि मासूमों के साथ होने वाले अपराधों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अब आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने के आदेश के बाद कानूनी औपचारिकताएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

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