अयोध्या राम मंदिर दान चोरी का पैसा शेयर बाजार में लगाने का खुलासा, कई बैंक खाते हुए फ्रीज

अयोध्या के राम मंदिर में हुए दान चोरी मामले की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें आरोपी चोरी किए गए पैसों को शेयर बाजार में खपा रहे थे। पुलिस ने मामले से जुड़े दो दर्जन से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।

शेयर बाजार के जरिए अवैध धन को सफेद करने का खेल

अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे की चोरी के मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जांच से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घोटाले के आरोपी चोरी किए गए धन को शेयर बाजार में निवेश करते थे। इन आरोपियों की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। वे पहले दान के चोरी किए गए कैश को अपने परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा करवाते थे। इसके बाद, उस धन को अपने स्वयं के खातों में डिजिटल तरीके से ट्रांसफर कर लिया जाता था। इस जटिल प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य धन के अवैध स्रोत को छिपाना और काली कमाई को वैध यानी नंबर एक की आय के रूप में प्रदर्शित करना था।

पुलिस की कार्रवाई और बैंक खातों पर लगा ताला

इस बड़े वित्तीय जालसाजी के खुलासे के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए कार्रवाई की है। जांच अधिकारियों ने आरोपियों के करीब 2 दर्जन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। ये सभी खाते मुख्य रूप से आरोपियों के रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर थे। वर्तमान में इस मामले के तीनों प्रमुख आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए गए हैं। पुलिस अब इस पहलू पर भी गंभीरता से पड़ताल कर रही है कि क्या किसी स्थानीय सराफा व्यापारी की मिलीभगत से चोरी किया गया सोना गलाया जा रहा था। इस दिशा में जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।

आरोपियों की निशानदेही पर की गई बड़ी बरामदगी

राम मंदिर में दान की गई राशि के गबन को लेकर एक और बड़ी जानकारी साझा की गई है। आरोपी मंदिर में नोटों की गिनती पूरी होने से पहले ही बड़ी चालाकी से नोटों को वहां से पार कर देते थे। पुलिस ने पूछताछ के दौरान आरोपियों अनुकल्प, लवकुश और करुणेश की निशानदेही पर बड़ी बरामदगी की है। इसमें भारी मात्रा में कैश, सोने की चेन, कई मोबाइल फोन और एक कार शामिल है, जिसे पुलिस ने साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है।

क्या है राम मंदिर चढ़ावा घोटाला?

अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे में हेराफेरी का यह गंभीर प्रकरण पहली बार जून, 2026 में प्रकाश में आया था। आरोपों के मुताबिक, मंदिर में रखे गए दानपात्रों से नकद राशि को लगातार गायब किया जा रहा था। अब तक इस पूरे मामले में कुल 8 आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।

मामले के मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

इस पूरे घोटाले में शामिल 8 आरोपियों की भूमिका अलग-अलग रही है। इसमें टिन्नू यादव शामिल है, जो चंपत राय का निजी ड्राइवर था। आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले अनुकल्प मिश्रा और ऑटोमोबाइल मैकेनिक लवकुश मिश्रा भी इसमें लिप्त पाए गए हैं। मामले में आरोपी बनाए गए अन्य लोगों में प्राइमरी स्कूल के शिक्षक अविनाश शुक्ला, कैश संभालने की जिम्मेदारी निभाने वाले संविदा कर्मचारी रामशंकर मिश्रा, हाउसकीपिंग स्टाफ मनीष यादव, चंदा गिनने वाले संविदा कर्मचारी करुणेश पांडेय और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं।

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