रांची की दो बहनों ने फैशन जगत में गाड़े झंडे: बुटीक के मुनाफे से बदल रहीं हजारों जरूरतमंदों की जिंदगी

रांची की रहने वाली दो बहनें, पर्सी और अंचल, अपने अनोखे फैशन कलेक्शन के जरिए पूरे भारत में मशहूर हो गई हैं। वे अपने बिजनेस से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा हेल्पज फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा और समाज सेवा में खर्च कर रही हैं।

फैशन के जरिए समाज सेवा की मिसाल

झारखंड की राजधानी रांची की दो होनहार बहनों, पर्सी और अंचल की सफलता की कहानी आजकल काफी चर्चा में है। दोनों बहनें पेशे से फैशन डिजाइनर हैं और अपने अनोखे कलेक्शन के दम पर न केवल रांची में अपनी पहचान बनाई है, बल्कि पूरे देश में ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना ली है। आज रांची शहर के भीतर उनके 3 बुटीक संचालित हो रहे हैं। इन बहनों की खासियत यह है कि वे न केवल अपने फैशन बिजनेस से लाखों की कमाई कर रही हैं, बल्कि अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा हेल्पज फाउंडेशन के माध्यम से बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों की मदद में भी खर्च कर रही हैं।

फैशन की दुनिया में अनुभव का सफर

पर्सी ने बताया कि उन्होंने फैशन डिजाइनिंग का कोई औपचारिक कोर्स नहीं किया है। उनके लिए उनकी मां सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं, जो पिछले 25 सालों से इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपनी मां के काम को करीब से देखते हुए और उनसे सीखते हुए आज वे इस मुकाम पर पहुंची हैं। वहीं, अंचल की कहानी थोड़ी अलग है। अंचल पहले बेंगलुरु में एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं, जहां उनका वेतन प्रति माह 1 लाख रुपये से अधिक था। हालांकि, वहां काम करते हुए उन्हें मानसिक संतुष्टि नहीं मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का निर्णय लिया और आज वे इसी काम को आगे बढ़ा रही हैं।

क्या है इनके कलेक्शन की खासियत

इन बहनों का दावा है कि उनका हर एक कलेक्शन अपने आप में अद्वितीय और मौलिक होता है। पर्सी और अंचल बताती हैं कि उनके पास साड़ियों, काफ्तान, अफगान और सलवार सूट की बेहतरीन रेंज उपलब्ध है। इनके कलेक्शन में 3D प्रिंट का काम सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। पर्सी का कहना है कि उनकी साड़ियों पर किए गए 3D प्रिंट्स को देखकर ऐसा लगता है मानो धागों से बारीक कढ़ाई की गई हो, लेकिन करीब से देखने पर लोगों को इसकी रचनात्मकता का पता चलता है। प्योर सिल्क में इनका 3D प्रिंट वाला कलेक्शन बाजार में काफी यूनिक माना जाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनके डिजाइन कहीं से कॉपी नहीं किए जाते और वे हर दिन कुछ नया करने का प्रयास करती हैं, यही कारण है कि उनके प्रोडक्ट्स की कोई दूसरी प्रति खोजना नामुमकिन है।

सोशल मीडिया की ताकत

आज ये बहनें पैन इंडिया स्तर पर अपने सामान की डिलीवरी कर रही हैं। दिल्ली और कोलकाता से लेकर कन्याकुमारी तक उनके नियमित ग्राहक मौजूद हैं। अंचल के अनुसार, सोशल मीडिया उनके बिजनेस का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। वे इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से अपने कलेक्शंस के छोटे-छोटे वीडियो बनाकर साझा करती हैं। इन वीडियो के साथ ही वे अपना संपर्क सूत्र भी देती हैं। उन्होंने बताया कि केवल सोशल मीडिया के माध्यम से ही उन्हें हर दिन औसतन 5 से अधिक ऑर्डर्स प्राप्त हो जाते हैं। उनका मानना है कि यदि आपका उत्पाद भरोसा दिलाने वाला और अनोखा है, तो ग्राहक खुद ब खुद आपके पास चले आएंगे।

हेल्पज फाउंडेशन के जरिए सेवा

पर्सी और अंचल का सबसे बड़ा ध्येय सिर्फ कमाई करना नहीं है। वे अपनी कुल कमाई का 35 फीसदी हिस्सा हेल्पज फाउंडेशन में लगाती हैं। इस फाउंडेशन को शुरू हुए लगभग 4 साल हो चुके हैं। इस पहल के माध्यम से गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा मुहैया कराई जाती है, अनाथ बच्चों को आश्रय दिया जाता है और जरूरतमंद बुजुर्गों की देखभाल की जाती है। इन बहनों का मानना है कि व्यापार और समाज सेवा साथ-साथ चल सकते हैं। उन्हें इस बात की अत्यधिक संतुष्टि है कि उनकी मेहनत से आज हजारों बच्चों का भविष्य संवर रहा है। उनके लिए फैशन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक सशक्त माध्यम है।

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