आम और लीची की खेती का दौर पुराना, अब बनारसी कागजी नींबू से किसान कमा रहे हैं लाखों

बिहार के पूर्वी चंपारण में बनारसी कागजी नींबू की खेती किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बन गई है। यह किस्म न केवल कांटे रहित है, बल्कि एक ही पेड़ से बंपर पैदावार देकर किसानों की आय बढ़ा रही है।

बागवानी का बदलता स्वरूप

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में अब खेती की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। पारंपरिक रूप से यहां किसान आम और लीची की बागवानी पर अधिक निर्भर रहते थे, लेकिन अब फलों की खेती में एक नया और फायदेमंद विकल्प सामने आया है। स्थानीय किसान अब बड़े पैमाने पर बनारसी कागजी नींबू की ओर रुख कर रहे हैं। यह किस्म अपनी खासियतों के कारण किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है और इसे लगाने वाले किसान काफी खुश हैं।

बनारसी कागजी नींबू की खासियतें

बाजार में नींबू की तमाम किस्में मौजूद हैं, लेकिन बनारसी कागजी नींबू की अपनी अलग पहचान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पौधों में कांटे नहीं होते हैं, जो बागवानी करने वाले लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक है। इसके अलावा, यह नींबू आकार में सामान्य नींबू से काफी बड़ा होता है, जो कई बार संतरे के आकार तक पहुंच जाता है। यह काफी रसीला किस्म का फल है, जिसकी स्थानीय बाजारों में मांग हमेशा बनी रहती है। इसे बारहमासी भी कहा जाता है, क्योंकि यह साल भर फलों से लदा रहता है और गुच्छों में फलता है।

एक पेड़ से 2000 से अधिक नींबू

पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया प्रखंड के अमवा गांव निवासी प्रगतिशील किसान विजय यादव ने इस किस्म के साथ प्रयोग किया और वे इसके परिणामों से बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने जिला कृषि विज्ञान केंद्र से इसके बीज प्राप्त किए थे। विजय यादव बताते हैं कि उन्होंने घर के बाहर एक पौधा लगाया था, जिसने इस बार बंपर पैदावार दी है। उन्होंने एक ही सीजन में उस एक पेड़ से 2000 से अधिक नींबू तोड़े हैं। अब तक केवल एक ही पेड़ से उन्होंने ₹5000 से ज्यादा की कमाई कर ली है।

कम समय में अधिक मुनाफा

यह नींबू का पौधा रोपण के लगभग डेढ़ साल के भीतर फल देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है। इसकी उत्पादकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक पेड़ से साल भर में तीन बार फसल की तुड़ाई की जा सकती है। विजय यादव का कहना है कि वे इस खेती में जैविक खाद का भरपूर इस्तेमाल करते हैं, जिससे नींबू की गुणवत्ता में सुधार होता है और पैदावार भी बढ़ती है।

बड़े पैमाने पर बागवानी की तैयारी

एक पेड़ की सफलता से उत्साहित होकर अब विजय यादव ने बड़े स्तर पर इसकी खेती करने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी लगभग 5 कट्ठा जमीन पर 100 बनारसी कागजी नींबू के पौधे लगाए हैं। उनका मानना है कि अगर किसान पारंपरिक फसलों की जगह ऐसी उन्नत किस्मों पर ध्यान दें, तो उनकी आय में कई गुना इजाफा हो सकता है। यह खेती कम निवेश और कम समय में शानदार लाभ देने वाली साबित हो रही है, जिसके चलते आसपास के अन्य किसान भी प्रेरित होकर अब इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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