वास्तु सुधार के लिए शुरू हुई पहल
झारखंड के कोडरमा शहर के आश्रम रोड इलाके में एक गौशाला इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रही है। यह गौशाला अपने खास दूध और उसके पीछे की दिलचस्प कहानी के लिए जानी जाती है। इस डेयरी के संचालक कृष्णा संघई हैं। हालांकि, उनका इरादा शुरू में डेयरी खोलकर व्यापार करने का बिल्कुल नहीं था। दरअसल, कृष्णा संघई ने अपने आश्रम रोड स्थित गोदाम के निर्माण के बाद कुछ व्यावसायिक चुनौतियों का सामना किया था। ज्योतिषियों और वास्तु विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने अपने स्थान के वास्तु दोष को दूर करने के लिए गोपालन का निर्णय लिया।
साल 2020 में हुई गिर गायों की शुरुआत
वास्तु दोष निवारण के संकल्प के साथ कृष्णा संघई ने साधारण गायों के बजाय गुजरात की मशहूर गिर नस्ल की गायों को चुना। साल 2020 में उन्होंने गुजरात से गिर नस्ल की पांच गायें मंगाईं। इन गायों की खरीद के लिए उन्हें प्रति गाय 1.5 लाख रुपये की लागत लगानी पड़ी। हालांकि, शुरुआत का सफर काफी कठिन था। गुजरात का वातावरण कोडरमा से बिल्कुल अलग है, इसलिए वहां से आई गायों को कोडरमा की भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड के अनुसार खुद को ढालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
कोडरमा के मौसम में ढली नई पीढ़ी
कृष्णा संघई बताते हैं कि शुरुआत में गायों के बीमार होने और प्रतिकूल मौसम में रहने के कारण काफी चिंता हुई थी। लेकिन, निरंतर देखभाल और बेहतर प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि अब इन गायों की नई पीढ़ी यहीं कोडरमा के वातावरण में पूरी तरह से ढल चुकी है। यही नई पीढ़ी अब दुग्ध उत्पादन में मुख्य भूमिका निभा रही है। गौशाला की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां दूध की मांग इतनी ज्यादा है कि ग्राहकों को दूध मिलने का इंतजार करना पड़ता है।
रोजाना 70 लीटर का उत्पादन
वर्तमान में इस गौशाला में रोजाना सुबह और शाम मिलाकर करीब 70 लीटर शुद्ध दूध का उत्पादन हो रहा है। कोडरमा की जलवायु और वातावरण में एक गिर गाय औसतन 7 से 8 लीटर दूध प्रतिदिन देने में सक्षम है। यह दूध बाजार में उपलब्ध आम दूध की तुलना में बेहद शुद्ध और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है।
कांच की बोतलों में विशेष पैकेजिंग
शुद्धता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण, कृष्णा संघई दूध की पैकेजिंग पर बहुत ध्यान देते हैं। यहां उत्पादित 70 लीटर दूध को सुरक्षित रखने के लिए प्लास्टिक के बजाय विशेष रूप से कांच की बोतलों का उपयोग किया जाता है। कुल 70 कांच की बोतलों में दूध को पैक करके सील किया जाता है और फिर सीधे ग्राहकों के घरों तक पहुंचाया जाता है। इस सावधानी के कारण दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और ग्राहकों का विश्वास भी कायम है।
सेहत के लिए अमृत और बाजार भाव
गिर गाय का दूध ‘A2 प्रोटीन’ से समृद्ध होता है, जो इसे पचाने में बहुत आसान बनाता है। इसे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए किसी अमृत से कम नहीं माना जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को बढ़ाने में भी काफी मददगार है। वर्तमान में, कोडरमा के बाजार में इस दूध की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। यद्यपि गिर गायों के रखरखाव, बेहतर चारे और उनके पालन-पोषण में खर्च अधिक आता है, जिससे मुनाफा कुछ कम जरूर है, लेकिन शुद्ध दूध लोगों तक पहुंचाने का उद्देश्य ही इस गौशाला की असली कमाई है। सीमित उत्पादन होने के कारण कृष्णा संघई फिलहाल सभी ग्राहकों की मांग पूरी करने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन उनका यह प्रयोग कोडरमा के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
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