91 की उम्र में दलाई लामा का संकल्प, बोले- चीन के लोगों की भी मदद करना चाहता हूं, शायद 130 साल तक जीवित रहूं

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने अपने 91वें जन्मदिन पर दुनिया भर के लिए करुणा और शांति का संदेश दिया है। घुटने की सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे लामा ने उम्मीद जताई कि वे भविष्य में चीन के नागरिकों के कल्याण के लिए भी काम करेंगे।

स्वास्थ्य लाभ और लद्दाख में प्रवास

तिब्बती समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा इन दिनों लद्दाख के लेह में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। हाल ही में नई दिल्ली में उनके बाएं घुटने की सफल सर्जरी हुई थी। सर्जरी के बाद से वे लेह की शांत वादियों में आराम कर रहे हैं। दलाई लामा ने खुद इस बात की जानकारी साझा की कि यहां का मौसम उनकी सेहत के लिए बेहद अनुकूल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी रिकवरी और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अभी अगले कुछ हफ्तों तक लेह में ही अपना प्रवास जारी रखेंगे।

जन्मदिन पर दुनिया के नाम संदेश

बीते 6 जुलाई को दलाई लामा ने अपना 91वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर उन्होंने अपने सभी अनुयायियों, शुभचिंतकों और दुनिया भर के समर्थकों का आभार व्यक्त किया। दलाई लामा ने अपने संदेश में मानवता, दया और प्रेम के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में दुनिया को नफरत की नहीं, बल्कि करुणा की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम इस दुनिया को सभी के लिए सुखद और रहने योग्य बनाना चाहते हैं, तो हमें अपने भीतर प्रेम और दूसरों के प्रति सच्ची चिंता की भावना को विकसित करना होगा।

साधना और जीवन का एकमात्र लक्ष्य

अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए दलाई लामा ने बताया कि 91 साल की उम्र में भी उन्हें सबसे अधिक प्रेरणा हर सुबह उठने पर दूसरों की भलाई करने के विचार से मिलती है। उन्होंने कहा, 'जब मैं अपने जीवन के सफर को पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे स्पष्ट रूप से यह अनुभव होता है कि मेरी साधना और मेरे पूरे जीवन का केंद्र बिंदु हमेशा दूसरों का कल्याण करना रहा है। यही वह भावना है जो मुझे हर सुबह जागने के लिए प्रेरित करती है।' उन्होंने युवाओं और बुजुर्गों से अपील की कि वे अपने दैनिक व्यवहार में दया और करुणा को प्राथमिकता दें, क्योंकि यही एक सार्थक जीवन जीने का असली तरीका है।

चीन को लेकर भविष्य की योजना

अपने जन्मदिन के विशेष संबोधन में दलाई लामा ने एक चौंकाने वाला और सकारात्मक दावा किया। उन्होंने कहा, 'मैं अब 91 वर्ष का हो गया हूं, लेकिन मेरे सपनों से जो संकेत मिल रहे हैं, वे इशारा करते हैं कि मैं शायद 130 वर्षों तक जीवित रहूं।' उन्होंने अपनी लंबी आयु की इच्छा के पीछे एक विशेष उद्देश्य भी बताया। दलाई लामा ने कहा कि वे भविष्य में बुद्ध के उपदेशों के माध्यम से चीन के लोगों की भी मदद करना चाहते हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन से चीन के निवासियों के जीवन को भी सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।

भारत और लद्दाख से गहरा नाता

दलाई लामा और लद्दाख के बीच का रिश्ता दशकों पुराना है। उनके कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वे पिछले 55 वर्षों से भी अधिक समय से नियमित रूप से लद्दाख का दौरा करते रहे हैं। यहां के स्थानीय लोगों के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव बेहद गहरा है। गौरतलब है कि वर्ष 1959 में चीन की सेना द्वारा ल्हासा पर नियंत्रण किए जाने के बाद दलाई लामा को अपने समर्थकों के साथ तिब्बत छोड़कर भारत आना पड़ा था। तब से लेकर आज तक, वे भारत में ही रह रहे हैं। इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी, उनके मन में अब भी यह गहरी उम्मीद कायम है कि वे एक दिन अपने प्रिय तिब्बत लौट सकेंगे।

लेह में उत्सव का माहौल

6 जुलाई को लेह के शेवात्सेल टीचिंग ग्राउंड में दलाई लामा का 91वां जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लोग शायद इसीलिए उनका सम्मान करते हैं क्योंकि वे हमेशा हर किसी के प्रति प्रेम और करुणा रखने का प्रयास करते हैं। उन्होंने दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि वे तब तक सक्रिय रहना चाहते हैं जब तक संभव हो, ताकि अधिक से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मकता लाई जा सके।

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