महादेव ऐप मामले में सीबीआई की सख्त कार्रवाई
बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने अपनी कानूनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। जांच एजेंसी ने इस घोटाले से जुड़े विभिन्न मामलों में कुल 6 चार्जशीट दाखिल की हैं। महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके करीबी सहयोगी काफी समय पहले ही पश्चिम एशियाई देशों में जाकर छिप गए थे और वहीं से इस पूरे अवैध नेटवर्क को नियंत्रित कर रहे थे। मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया भी जारी है। हाल ही में ओमान से मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद से जांच में महत्वपूर्ण मोड़ आया है।
कौन बने हैं नए आरोपी और क्या हैं आरोप
सीबीआई ने महादेव ऐप से जुड़े मामलों में जिन व्यक्तियों को आरोपी बनाया है, उनमें आशीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धाममानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के साथ-साथ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने इसके अलावा पहले से चार्जशीट किए गए मुख्य आरोपियों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी पुख्ता साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। एक अन्य संबंधित मामले में सीबीआई ने 66 आरोपियों के खिलाफ 5 चार्जशीट और दाखिल की हैं, जिनमें सट्टेबाजी सिंडिकेट के कई सदस्य नामजद हैं।
6000 करोड़ से ज्यादा का अवैध कारोबार
जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे घोटाले का पैमाना बेहद व्यापक है। आरोपी सौरभ चंद्राकर पर मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तरीके से अर्जित धन को रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करने के गंभीर आरोप हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से 6000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई थी। सीबीआई का मानना है कि यह भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसे बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था।
देशव्यापी नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल
सीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नेटवर्क की शुरुआत भारत से हुई थी, लेकिन बाद में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसे देशभर में फैला दिया। इस अवैध साम्राज्य के संचालन के लिए जगह-जगह सट्टेबाजी पैनल बनाए गए थे। जांच में यह खुलासा भी हुआ है कि अवैध कमाई को छिपाने के लिए फर्जी बैंक खातों का उपयोग किया जाता था, जिन्हें आमतौर पर म्यूल अकाउंट्स कहा जाता है। इन खातों के जरिए पैसों को पहले घुमाया जाता था और बाद में बड़ी चालाकी से विदेश भेज दिया जाता था। इसके अलावा, जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस अवैध धन का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त करने के बदले में रिश्वत के रूप में दिया गया था। फिलहाल, ओमान से पकड़े गए सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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