गोपालगंज में मंडराया बाढ़ का संकट
बिहार में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही नदियों के तेवर बदलने लगे हैं। विशेष रूप से गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर और इसका तेज बहाव अब गोपालगंज के लिए चिंता का विषय बन चुका है। जिले के जादोपुर-मंगलपुर पुल के समीप स्थित गाइड बांध पर कटाव का खतरा लगातार मंडरा रहा है, जिससे आसपास के निवासियों में दहशत का माहौल है। गंडक नदी की विनाशकारी लहरें बांध के आधार को कमजोर कर रही हैं, जिससे सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चुनौती पैदा हो गई है।
युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी
इस विकट स्थिति को देखते हुए राज्य का जल संसाधन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। विभाग की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। बांध के संवेदनशील हिस्सों को नदी के कटाव से बचाने के लिए मौके पर इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं। यह टीम दिन-रात बांध की निगरानी कर रही है ताकि कटाव के बढ़ते दायरे को समय रहते रोका जा सके।
जियो बैग और बोल्डर से सुरक्षा
कटाव को रोकने के लिए विभाग ने पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के उपायों का सहारा लिया है। बांध के कमजोर बिंदुओं पर जियो बैग्स की भारी खेप डाली जा रही है, साथ ही बोल्डर और अन्य सुरक्षात्मक सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि बांध को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव संसाधन मौके पर जुटा दिए गए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि सुरक्षा घेरे को और मजबूत बनाया जा सके।
क्या होगा यदि बांध टूट गया?
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात का डर गहराता जा रहा है कि यदि नदी का कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा और बांध को गंभीर क्षति पहुंची, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गाइड बांध पूरी तरह विफल होता है, तो इसका सीधा असर गोपालगंज के निचले इलाकों पर पड़ेगा। इसके अलावा पश्चिम चंपारण के बेतिया क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी पानी का दबाव बढ़ने से बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। फिलहाल प्रशासन ने इन इलाकों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी है।
प्रशासन की लोगों से सतर्क रहने की अपील
आपदा की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों को अफवाहों से बचने की सलाह दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विभाग हर स्थिति पर नजर रख रहा है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है। लोगों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और जरूरत पड़ने पर प्रशासन के निर्देशों का अक्षरशः पालन करें। फिलहाल, गंडक नदी का जलस्तर और बारिश की तीव्रता ही यह तय करेगी कि आने वाले दिनों में बांध सुरक्षित रहेगा या नहीं। विभाग का मुख्य उद्देश्य बांध को किसी भी कीमत पर बचाना है, ताकि लाखों लोगों को संभावित विस्थापन और तबाही से बचाया जा सके।
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