रजत शर्मा का विश्लेषण: बंगाल में अपराधियों के खिलाफ योगी मॉडल की चर्चा और अमेरिका में बिश्नोई गैंग पर FBI का शिकंजा

पश्चिम बंगाल में हुए जघन्य अपराध के बाद एनकाउंटर पर छिड़ी बहस और अमेरिका की जांच एजेंसी FBI द्वारा लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ छेड़े गए बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान पर रजत शर्मा का विस्तृत विश्लेषण।

पश्चिम बंगाल में अपराधियों पर सख्त एक्शन

पश्चिम बंगाल में एक १२ साल की मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या करने वाले दरिंदे को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। यह वही जगह है जहां उस मासूम की जान ली गई थी। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था और जनता में भारी आक्रोश था। इस मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए चौथे आरोपी कबीर मोल्लाह को भी गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची की हत्या करने वाले मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की मौत के बाद स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसकी अपनी मां ने भी उसके शव को लेने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि उसने पूरे परिवार को शर्मसार किया था।

हालांकि, इस मुठभेड़ के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे जंगलराज की संज्ञा दी है। महुआ मोइत्रा ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में योगी आदित्यनाथ का मॉडल लागू करने की कोशिश कर रही है, जिसे राज्य की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी जब विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरीं, तो जनता ने उनका स्वागत करने के बजाय उन पर अंडे फेंके और चोर चोर के नारे लगाए।

आम जनता के लिए एक नन्ही बच्ची के हत्यारे का अंत किसी कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि न्याय है। विपक्षी दलों का कहना है कि ममता बनर्जी के शासन में पहले पुलिस अपराधियों को संरक्षण देती थी और सबूतों को मिटाने का काम करती थी, जैसा कि आर. जी. कर अस्पताल मामले में देखा गया। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में अब पुलिस को सख्त कदम उठाने की खुली छूट मिल रही है, जिसे लोग उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल से जोड़कर देख रहे हैं। राज्य के विकास के लिए यह अनिवार्य है कि अपराधियों के मन में कानून का डर हो, अन्यथा निवेशक वहां आने से कतराते हैं। बंगाल में लंबे समय से अपराधियों को पुलिस का संरक्षण मिलता रहा है, लेकिन अब तस्वीर बदलने की कोशिशें हो रही हैं।

FBI का बड़ा ऑपरेशन: लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर लगाम

अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने अब भारत की जेलों में बंद गैंगस्टर्स के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। ऑपरेशन हार्डबॉल के जरिए FBI ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप में ५० से अधिक स्थानों पर छापेमारी की है। इस दौरान २४ लोगों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में ड्रग्स तथा अवैध हथियार बरामद किए गए। इस अभियान में कनाडा और यूरोपीय देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं।

FBI के निशाने पर न केवल लॉरेंस बिश्नोई है, बल्कि गोल्डी बराड़, जग्गू भगवानपुरिया और रोहित गोदारा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि भारत की जेलों में बंद रहने के बावजूद बिश्नोई अपने नेटवर्क के जरिए दुनिया भर में हत्या, फिरौती, ड्रग्स तस्करी और मानव तस्करी जैसे अपराधों को अंजाम दे रहा है। कनाडा और अमेरिका में इन गतिविधियों की कमान गोल्डी बराड़ के हाथों में थी। अब FBI ने गोल्डी बराड़ को मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल करते हुए उस पर ५० हजार डॉलर का इनाम घोषित किया है।

पंजाब पुलिस के अधिकारी पर गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। FBI ने पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा को आरोपी बनाया है और उनके प्रत्यर्पण की मांग की है। आरोप है कि होशियारपुर के टांडा थाने में तैनात यह एसएचओ जग्गू भगवानपुरिया गैंग के साथ मिलकर काम कर रहा था। नागरा ने कथित तौर पर एक अमेरिकी परिवार को धमकी दिलवाकर ४ लाख डॉलर की अवैध वसूली की थी।

जैसे ही FBI ने इस मामले का खुलासा किया, पंजाब पुलिस हरकत में आई और इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। जालंधर रेंज के डीआईजी ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह स्पष्ट है कि बिश्नोई गैंग का प्रभाव भारत की जेलों से बाहर तक फैला हुआ है, लेकिन अब FBI के पास इस नेटवर्क के खिलाफ ठोस सबूत मौजूद हैं।

जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल में बैठकर ही अपने गैंग का संचालन कर रहा है। कभी वह जेल से इंटरव्यू देता है, तो कभी सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर धमकियां देता है। सवाल यह है कि जेल की सलाखों के पीछे रहने वाले इन अपराधियों के पास मोबाइल फोन और इंटरनेट जैसी सुविधाएं कैसे पहुंच रही हैं? यदि अमेरिका इन अपराधियों को अपनी गिरफ्त में ले लेता है, तो संभव है कि इन अपराधों पर लगाम लग सके। भारत में भी जेल प्रशासन को इतना सख्त होना चाहिए कि अपराधी जेल के भीतर से अपनी गतिविधियों को संचालित न कर सकें। जेल का उद्देश्य सुधार होना चाहिए, न कि अपराध का मुख्यालय।

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