हिमाचल में आसमानी आफत: किन्नौर की लिप्पा खड्ड में भीषण बाढ़, मलबे से NH-5 बंद और चंबा-मनाली में बिगड़े हालात

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में भारी बारिश के बाद लिप्पा खड्ड में अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान की आशंका है, वहीं मौसम विभाग ने राज्य में अगले सात दिनों के लिए मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है।

हिमाचल में मॉनसून का तांडव: किन्नौर की लिप्पा खड्ड में आई भयंकर बाढ़

हिमाचल प्रदेश में आसमान से बरस रही आफत थमने का नाम नहीं ले रही है। मॉनसून की सक्रियता के चलते राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में नदियां और नाले उफान पर हैं। किन्नौर जिले से डराने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां भारी बारिश के कारण लिप्पा खड्ड में अचानक भयंकर बाढ़ आ गई है। पानी का बहाव इतना तेज है कि वह अपने साथ विशालकाय चट्टानें और भारी मात्रा में मलबा बहाकर ला रहा है। इस सैलाब की वजह से लिप्पा गांव के पास बने वैली ब्रिज को भारी नुकसान पहुंचा है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखकर इसके किनारे बसे घरों और अन्य पुलों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

बाढ़ के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। किन्नौर में मलिंग नाला के समीप पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा ढहकर सड़क पर आ गिरा। इस भारी भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पूरी तरह बाधित हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद हो जाने से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और लोगों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। सीमा सड़क संगठन और स्थानीय प्रशासन मलबे को हटाने और मार्ग को दोबारा चालू करने के काम में जुटे हैं, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है।

चंबा और कुल्लू में भी तबाही का मंजर, बनीखेत में बह गए वाहन

केवल किन्नौर ही नहीं, बल्कि चंबा और कुल्लू जिले भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं। चंबा जिले के बनीखेत क्षेत्र में बुधवार की शाम को हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। भारी बारिश के चलते स्थानीय बाजार के मुख्य नाले में अचानक फ्लैश फ्लड यानी बाढ़ आ गई। नाले का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि वह सड़कों और बाजार की दुकानों में घुस गया। सड़कों पर पानी का सैलाब बहने लगा, जिससे वहां खड़े कई वाहन पानी की चपेट में आ गए। इसी दौरान पानी के तेज बहाव में एक मोटरसाइकिल भी बह गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सड़कों पर पानी जमा होने और मलबे के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

कुल्लू के कशेरी नाला में जान जोखिम में डालने को मजबूर लोग

दूसरी तरफ, कुल्लू जिले के मनाली उपमंडल से भी दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। मनाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पतली कूहल के पास स्थित कशेरी नाले में बुधवार शाम करीब 6 बजे अचानक पानी का स्तर अत्यधिक बढ़ गया। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश के कारण यह नाला उफान पर है और इसका बहाव जानलेवा हो चुका है। पुल की व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करने के लिए मजबूर हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक मजबूर पिता अपने मासूम बच्चे को कपड़े की मदद से अपनी पीठ पर बांधकर इस खतरनाक और तेज बहाव वाले नाले को पार कर रहा है। वहां मौजूद हर शख्स इस नजारे को देखकर सहम गया क्योंकि पानी के बहाव में पैर फिसलने का मतलब सीधे मौत था। गौरतलब है कि इस कशेरी नाले का इतिहास काफी डरावना रहा है। साल 2018 में यहां बादल फटने से भयानक तबाही मची थी। इसके बाद साल 2025 में भी इस नाले के उफान ने इलाके में भारी नुकसान पहुंचाया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा यहां बेली ब्रिज का निर्माण बेहद धीमी रफ्तार से किया जा रहा है, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

मौसम विभाग का अगले सात दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने गुरुवार सुबह एक ताजा मौसम बुलेटिन जारी कर राज्य में भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में अगले सात दिनों तक मौसम बेहद खराब रहेगा। राज्य में 9 जुलाई से 15 जुलाई तक विभिन्न जिलों के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इस संबंध में यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए स्थानीय प्रशासन और आम जनता को सतर्क रहने की हिदायत दी है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की यात्रा करने से परहेज करें।

पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड की गई बारिश के आंकड़े

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गई बारिश के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • चंबा के जोत में सबसे अधिक 45.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।
  • बिलासपुर के मलराओं में 41 मिमी बारिश दर्ज की गई।
  • शिमला के सराहन में 38.7 मिमी वर्षा हुई।
  • सिरमौर के पांवटा साहिब में 34.4 मिमी बारिश दर्ज की गई।
  • कांगड़ा के गुलेर में 24.4 मिमी बारिश दर्ज की गई।
  • जटौन बैराज क्षेत्र में 23.2 मिमी पानी बरसा।
  • धौलाकुआं में 20.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
  • रोहड़ू में 20 मिमी बारिश दर्ज की गई।

इसके अलावा शिमला, कांगड़ा और जोत के कई इलाकों में रात भर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की गतिविधियां भी देखी गईं।

तापमान में भारी गिरावट और सुबह की बारिश की स्थिति

लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों के अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के विभिन्न शहरों के तापमान में 3 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान भुंतर में 33.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में 10.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।

गुरुवार की सुबह 8:30 बजे तक दर्ज की गई बारिश के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • कल्पा: 15 मिमी
  • मनाली: 14 मिमी
  • सुंदरनगर: 10.9 मिमी
  • बिलासपुर: 10.2 मिमी
  • नाहन: 7.8 मिमी
  • शिमला: 6 मिमी
  • मंडी: 5.6 मिमी

मौसम विज्ञान विभाग और स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों तथा आम जनता से अपील की है कि वे इस खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें। पर्वतीय क्षेत्रों में किसी भी समय अचानक भूस्खलन या फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए प्रशासन की ओर से समय-समय पर जारी की जाने वाली सुरक्षा एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें।

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