पारंपरिक खेती छोड़ हाजीपुर के किसानों ने अपनाया नया रास्ता, भिंडी उगाकर कमा रहे लाखों का मुनाफा

बिहार के वैशाली जिले के बागमली गांव में पारंपरिक फसलों की जगह भिंडी की वैज्ञानिक खेती कर प्रगतिशील किसान जय किशुन सिंह ने बंपर कमाई की है, जिससे अब पूरे क्षेत्र में नकदी फसलों का चलन बढ़ रहा है।

बिहार के वैशाली जिले में खेती-किसानी की दुनिया में इन दिनों एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां के किसान अब पारंपरिक फसलों के चक्र से बाहर निकलकर नकदी फसलों के जरिए अपनी तकदीर बदल रहे हैं। जिले के हाजीपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बागमली गांव में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां किसानों ने पारंपरिक अनाज फसलों की बुआई बंद कर दी है और बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती शुरू कर दी है।

इस कृषि बदलाव की कमान संभाली है गांव के ही एक प्रगतिशील किसान जय किशुन सिंह ने, जिन्होंने भिंडी की उन्नत और वैज्ञानिक खेती कर एक ही सीजन में लाखों रुपये की मोटी कमाई की है। उनकी इस शानदार सफलता ने न केवल उनके परिवार को खुशहाल बनाया है, बल्कि आसपास के तमाम ग्रामीण किसानों के लिए भी प्रेरणा का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है।

पारंपरिक फसलों को छोड़ने का फैसला और संघर्ष की कहानी

किसान जय किशुन सिंह बताते हैं कि कुछ साल पहले तक वे भी अपने खेतों में परंपरागत फसलों जैसे गेहूं और धान की ही खेती किया करते थे। हालांकि, काफी मेहनत और भारी लागत लगाने के बाद भी उन्हें बाजार से मनमुताबिक मुनाफा नहीं मिल पाता था। फसलों की पैदावार तो होती थी, लेकिन बाजार में सही दाम न मिलने और बढ़ती लागत के कारण परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था।

इस आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए उन्होंने खेती के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने का कड़ा फैसला किया। जय किशुन ने पारंपरिक ढर्रे को छोड़ आधुनिक कृषि तकनीकों को समझने का प्रयास किया और अपने खेतों में भिंडी उगाने की योजना बनाई। आज उनका यह साहसिक फैसला उनके और उनके परिवार के लिए वरदान साबित हो रहा है।

वैज्ञानिक विधि से बंपर पैदावार का फॉर्मूला

भिंडी की खेती में सफलता पाने के लिए जय किशुन सिंह ने आधुनिक कृषि विज्ञान का सहारा लिया। उनका मानना है कि फसल प्रबंधन ही कृषि में सफलता की असली कुंजी है। वे अपनी भिंडी की फसल में वैज्ञानिक तरीके से सिंचाई और संतुलित उर्वरकों का उपयोग करते हैं।

इसके अलावा, भिंडी की फसल को विभिन्न प्रकार के कीटों और रोगों से बचाए रखने के लिए वे खेतों की नियमित निगरानी करते हैं। जय किशुन के अनुसार, फसल को बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर ही कीटनाशकों और दवाओं का संतुलित छिड़काव किया जाता है। खेतों की इस नियमित और बेहतर देखभाल का नतीजा यह होता है कि उनके खेतों में भिंडी की बंपर पैदावार होती है, जो गुणवत्ता के मामले में भी अव्वल होती है।

कम लागत और मुनाफे की ऊंची छलांग

जय किशुन सिंह के अनुसार, भिंडी की खेती में सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें शुरुआती लागत बेहद कम आती है, जबकि इसके मुकाबले मिलने वाला मुनाफा कई गुना अधिक होता है। हरी सब्जी होने के कारण बाजार में भिंडी की मांग पूरे साल बनी रहती है। जय किशुन की तैयार की गई भिंडी की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन होती है कि स्थानीय मंडियों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और बड़े बाजारों में भी इसे बहुत अच्छे दामों पर खरीदा जाता है।

एक ही सीजन की फसल से उन्हें लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो जाता है। इस नकदी फसल की बदौलत आज जय किशुन सिंह का परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। उनका मानना है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में भिंडी की खेती से किसानों को लगभग दोगुना फायदा मिलता है, यही वजह है कि अब वे हर साल अपने खेतों में बड़े पैमाने पर सिर्फ भिंडी की ही बुआई करते हैं।

बागमली गांव में नकदी फसलों की नई लहर

जय किशुन सिंह की इस शानदार और अनुकरणीय सफलता को देखकर बागमली गांव के अन्य किसान भी बेहद उत्साहित हैं। अब इस गांव के दर्जनों किसान पारंपरिक खेती से तौबा कर चुके हैं और सब्जी उत्पादन की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में नकदी फसलों के उत्पादन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि बदलते समय में किसानों को पारंपरिक ढर्रे से हटकर बाजार की मांग और जरूरतों के हिसाब से ही फसलों का चयन करना चाहिए। बागमली के किसान जय किशुन सिंह की यह सफलता की कहानी आज उन तमाम किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो कम लागत में खेती से छप्परफाड़ कमाई करने का सपना देखते हैं।

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