वैशाली का यह सरकारी स्कूल निजी विद्यालयों को दे रहा है कड़ी टक्कर, अनुशासन और शिक्षा में है अव्वल

बिहार के वैशाली जिले में स्थित एक सरकारी विद्यालय अपनी आधुनिक शिक्षण पद्धति और अनुशासित माहौल के कारण चर्चा में है। यहाँ की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने अभिभावकों का भरोसा जीत लिया है और यह निजी स्कूलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर

बिहार के वैशाली जिले के अंतर्गत आने वाले गोरौल प्रखंड में एक ऐसी शैक्षणिक संस्था है जो सरकारी स्कूलों के प्रति समाज की पुरानी धारणाओं को पूरी तरह बदल रही है। आरपीसीजे सरकारी विद्यालय अपनी बेहतरीन शैक्षणिक व्यवस्था और अनुशासित वातावरण के दम पर निजी विद्यालयों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहा है। आज के दौर में जहां निजी स्कूलों की फीस और भारी-भरकम खर्च से अभिभावक परेशान रहते हैं, वहीं यह सरकारी स्कूल अपनी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शानदार परिणामों से लोगों का दिल जीत रहा है।

शिक्षण और सर्वांगीण विकास का संगम

इस विद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित और अनुभवी शिक्षकों की एक समर्पित टीम तैनात है। यहाँ केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं रहा जाता, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई जाती है। विद्यालय में नियमित अंतराल पर विज्ञान प्रदर्शनी, वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज और खेलकूद जैसे आयोजनों की भरमार रहती है। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां छात्रों की छिपी हुई प्रतिभा को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाती हैं।

आधुनिक संसाधन और सुविधाएं

विद्यालय का परिसर न केवल स्वच्छ और सुरक्षित है, बल्कि चारों ओर फैली हरियाली यहां के वातावरण को और भी सुखद बनाती है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पर्याप्त क्लासरूम, एक समृद्ध पुस्तकालय और कंप्यूटर लैब उपलब्ध है। इतना ही नहीं, खेलकूद के लिए आवश्यक सामग्री और शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता ने स्कूल को एक आधुनिक रूप दे दिया है। सरकार की विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं के तहत छात्रों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, स्कूली पोशाक, छात्रवृत्ति और स्वादिष्ट मध्याह्न भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा सुलभ हो गई है।

शिक्षकों की व्यक्तिगत मेहनत

इस विद्यालय की सबसे बड़ी ताकत वहां के शिक्षकों की मेहनत है। वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की औपचारिकता नहीं निभाते, बल्कि कक्षा के प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान देते हैं। जो बच्चे पढ़ाई में थोड़े कमजोर हैं, उनके लिए विशेष अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन किया जाता है ताकि वे अन्य सहपाठियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। शिक्षकों की इस लगन और अनुशासन का नतीजा यह है कि हर साल विद्यालय में नामांकन संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अभिभावकों का अटूट विश्वास

स्थानीय अभिभावकों का मानना है कि इस स्कूल में मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन का स्तर और शिक्षकों द्वारा की जा रही कड़ी मेहनत किसी भी नामी निजी स्कूल से कम नहीं है। यही कारण है कि आसपास के कई गांवों के अभिभावक अब निजी स्कूलों का मोह छोड़ अपने बच्चों का दाखिला इस सरकारी संस्थान में कराने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

भविष्य के जिम्मेदार नागरिक

विद्यालय प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ परीक्षाओं में अधिक अंक हासिल करना ही नहीं है। उनका उद्देश्य बच्चों को नैतिक मूल्यों, बेहतर अनुशासन और आत्मविश्वास से लैस एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। नई शिक्षा नीति के सिद्धांतों को अपनाते हुए आधुनिक शिक्षण तकनीकों के जरिए बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। गोरौल प्रखंड का आरपीसीजे सरकारी विद्यालय इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि यदि सही नेतृत्व, समर्पित शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण मिले, तो सरकारी स्कूल भी निजी शिक्षण संस्थानों को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

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