मुख्यमंत्री का कड़ा रुख
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में इस पूरे मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंदिर के चढ़ावे की चोरी करना किसी सामान्य अपराध की तरह नहीं, बल्कि गौ हत्या और माता-पिता की हत्या के समान एक महापाप है। उन्होंने इस कृत्य को अक्षम्य बताते हुए जोर दिया कि इसमें शामिल किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपनी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है जो मामले के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कैसे खुला यह मामला
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 3 जुलाई को हुई थी, जब 'भैरव सेना' नामक एक हिंदूवादी संगठन ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र में मंदिर परिसर में हो रही चढ़ावा चोरी के गंभीर आरोप लगाए गए थे और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। इस शिकायत के बाद मंदिर प्रशासन और सरकार दोनों ही हरकत में आ गए। शुरुआती जांच के बाद मंदिर समिति ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीकेटीसी के अध्यक्ष के निजी सचिव, प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है। साथ ही, बद्रीनाथ थाने में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के आदेश पर गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति भी गठित की गई है जो पूरे घटनाक्रम की तह तक जाने का कार्य कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है, जबकि इन मंदिरों के साथ करोड़ों लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। वहीं, बद्रीनाथ के विधायक लखपत सिंह बुटोला ने भी प्रेस वार्ता कर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं और उनसे इस्तीफे की मांग की है।
मंदिर समिति की प्रतिक्रिया
मंदिर समिति का पक्ष स्पष्ट करते हुए मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्यवाही श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 और संबंधित कर्मचारी आचरण नियमावली के नियमों के अंतर्गत की जा रही है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और श्रद्धालुओं की नजरें इस पर टिकी हैं कि इस बड़े घोटाले के पीछे असली आरोपी कौन हैं।
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