छत्तीसगढ़ कैबिनेट का बड़ा फैसला: कारोबार को मिलेगी रफ्तार, बिजली व्यवस्था में बड़े बदलाव

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में छत्तीसगढ़ में व्यापार को सुगम बनाने और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी गई है।

मानसून सत्र से पहले लिए गए बड़े फैसले

छत्तीसगढ़ में आगामी 13 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत होने वाली है। इस सत्र को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को अपनी स्वीकृति दी है। ऐसी प्रबल संभावना है कि इन प्रस्तावों और विधेयकों को जल्द ही मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में रायपुर में आयोजित इस बैठक में राज्य में निवेश को आकर्षित करने, औद्योगिक विकास को गति देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने से जुड़े कई दूरगामी फैसले लिए गए हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए नया कानून

राज्य सरकार का मुख्य फोकस छत्तीसगढ़ में व्यापार और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है। इसी दिशा में मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के माध्यम से निवेशकों को मिलने वाली अनुमतियों को आसान बनाया जाएगा। इसमें डीम्ड परमिशन, स्वयं-प्रमाणीकरण, तीसरे पक्ष का सत्यापन और जोखिम पर आधारित निरीक्षण जैसे प्रावधानों को शामिल किया गया है। साथ ही, दोहरे लाइसेंसिंग के बोझ को भी समाप्त किया जा रहा है ताकि निवेशकों को किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा कानून लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा।

बिजली आपूर्ति के लिए नई डायरेक्ट डेबिट व्यवस्था

राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए केंद्रीय विद्युत उपक्रमों से ली जाने वाली बिजली के भुगतान हेतु डायरेक्ट डेबिट मैंडेट व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ली गई इस मंजूरी से अब त्रिपक्षीय अनुबंध की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। इससे एनटीपीसी और अन्य केंद्रीय बिजली कंपनियों से राज्य को बिजली की निरंतर आपूर्ति बनी रहेगी। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे राज्य सरकार के खजाने पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

शिक्षा, बस्तर फाइटर्स और कर सुधार

बैठक में अन्य महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी निर्णय लिए गए हैं:

  • शिक्षा सुधार: निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन संबंधी नियमों में संशोधन किया गया है। अब विन्यास निधि के स्थान पर रक्षित निधि का प्रावधान होगा, जिससे विद्यार्थियों के हितों को बेहतर ढंग से सुरक्षित किया जा सकेगा।
  • बस्तर फाइटर्स: बस्तर फाइटर्स की भर्ती प्रक्रिया और उनकी सेवा शर्तों से संबंधित नियमों में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई है।
  • वाणिज्यिक कर: मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (VAT) विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इसके तहत छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त किया जाएगा। जीएसटी लागू होने के बाद वैट संबंधी अपीलों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।
  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले एक अत्याधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए भूमि आवंटन को भी कैबिनेट ने अपनी सहमति दे दी है।

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