कोयला लेवी घोटाले में घिरे नेता की गिरफ्तारी
छत्तीसगढ़ में लंबे समय से जांच एजेंसियों की नजरों से बच रहे कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया है। EOW यानी आर्थिक अपराध शाखा ने उन्हें हिरासत में लेकर कोयला लेवी प्रकरण में पूछताछ की प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि रामगोपाल अग्रवाल पिछले 3 साल से कानूनी कार्रवाई से दूर फरार चल रहे थे। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, उनके सरेंडर के बाद अब कई बड़े राज खुलने की उम्मीद है।
सूर्यकांत तिवारी की डायरी में बड़े खुलासे
जांच के दौरान EOW को आरोपी सूर्यकांत तिवारी के पास से एक डायरी बरामद हुई थी। इस डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपए की एंट्री दर्ज होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन पैसों का बड़ा हिस्सा रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से ही कांग्रेस भवन तक पहुंचाया गया था। यह मामला केवल कोयला लेवी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी शराब घोटाले और धान खरीदी में हुए कथित अनियमितताओं के मामलों में भी उनसे गहन पूछताछ करने की तैयारी कर चुकी है।
किन मामलों में होगी पूछताछ
EOW ने स्पष्ट किया है कि रामगोपाल अग्रवाल से केवल एक मामले में नहीं, बल्कि कई बड़े घोटालों पर सवाल किए जाएंगे। पूछताछ के मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:
- कोयला लेवी के जरिए वसूली गई राशि का वितरण और उसका अंतिम गंतव्य।
- शराब घोटाले और धान घोटाले में उनकी सक्रिय भूमिका और संलिप्तता।
- अनवर ढेबर और उसके सहयोगियों द्वारा कांग्रेस भवन में भेजे गए करोड़ों रुपयों का प्रबंधन।
- आर्थिक लेन-देन में समन्वय करने वाले अन्य व्यक्तियों की पहचान।
परिवार और करीबियों पर भी जांच का साया
जांच एजेंसी केवल रामगोपाल अग्रवाल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है। हाल ही में EOW ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल को भी हिरासत में लेकर दो दिनों तक लगातार पूछताछ की है। गौरतलब है कि धान घोटाले में रोशन चंद्राकर द्वारा पहुंचाई गई करोड़ों की राशि के मामले में भी जांच एजेंसी अब रामगोपाल अग्रवाल के परिवार की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इसमें धन के संग्रहण से लेकर उसे ठिकाने लगाने तक की कड़ियों को जोड़ने का काम किया जा रहा है।
रामगोपाल अग्रवाल का राजनीतिक सफर
रामगोपाल अग्रवाल का कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ाव काफी पुराना रहा है। वे 1980 में पार्टी से जुड़े थे और लंबे समय तक एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे। उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए साल 2013 में उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। वह संगठन के भीतर एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते थे और चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच संगठन की बागडोर संभालते रहे। साल 2023 में जब ED ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी, तभी से वह सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए थे और तभी से उनके फरार होने की खबरें सुर्खियों में थीं। अब तीन साल के लंबे अंतराल के बाद उनकी गिरफ्तारी या सरेंडर ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है।
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