शिक्षा का नया अध्याय
बिहार के वैशाली जिले में इन दिनों शिक्षा को लेकर एक अनूठी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह प्रशासनिक कार्यों की व्यस्तताओं के बावजूद अपने लिए समय निकालकर बच्चों की शिक्षक बन गई हैं। लोग उन्हें आत्मीयता से कलेक्टर दीदी कहते हैं। उनकी यह पाठशाला केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम बन गई है। इस पहल के जरिए डीएम स्वयं बच्चों की कक्षाएं लेती हैं, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह का संचार हुआ है।
प्रतियोगी परीक्षा और जीवन कौशल की सीख
इस विशेष पाठशाला में वैशाली जिले के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। डीएम वर्षा सिंह यहां केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ातीं, बल्कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण गुर सिखाती हैं। उनकी इस क्लास में मुख्य रूप से इन विषयों पर जोर दिया जाता है:
- प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सटीक रणनीति बनाना।
- बेहतर परिणाम के लिए समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) के तरीके।
- लक्ष्य निर्धारण और उसे हासिल करने का आत्मविश्वास।
- प्रशासनिक अनुभव के जरिए जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा।
कक्षा में भाग लेने वाले विद्यार्थी जैसे अनुष्का प्रिया और राज प्रिया ने बताया कि 'कलेक्टर दीदी' की पाठशाला का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यहाँ जटिल विषयों को बहुत सरल तरीके से समझाया जाता है। वे बताती हैं कि यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच पर भी गहरा ध्यान दिया जाता है। छात्र बिना किसी झिझक के अपने सवाल पूछते हैं और उन्हें करियर से जुड़े मार्गदर्शन मिलते हैं।
सकारात्मक बदलाव का संचार
इस पहल का असर अब स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई देने लगा है। इस पाठशाला में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं का मानना है कि उन्हें अपने भविष्य को लेकर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास मिला है। वे अब अधिक गंभीर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। इस अनूठी कोशिश को लेकर स्थानीय अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों के बीच काफी सराहना हो रही है।
लोगों का यह मानना है कि जब जिले का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी स्वयं बच्चों के बीच पहुंचकर उन्हें शिक्षित करने और प्रेरित करने का बीड़ा उठाए, तो समाज में शिक्षा के प्रति एक गहरा सकारात्मक संदेश जाता है। वर्षा सिंह की यह पाठशाला अब केवल हाजीपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपनी अनूठी कार्यशैली के कारण यह पूरे बिहार के लिए शिक्षा और प्रेरणा का एक शानदार उदाहरण बनती जा रही है। बच्चों के भविष्य को संवारने की यह मुहिम जिले में शिक्षा की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।
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