दहेज की बलिवेदी पर चढ़ी विवाहिता
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। बड़ा मलहरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मौली गांव में एक नवविवाहिता को महज दहेज की खातिर मौत के घाट उतार दिया गया। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने पहले महिला को बेरहमी से पीटा और फिर उसे जबरन जहर और डिटर्जेंट पाउडर का जानलेवा घोल पिला दिया। इस अमानवीय कृत्य के बाद पीड़िता की हालत बेहद नाजुक हो गई थी, जिसे बचाने के लिए परिवार वाले उसे भोपाल ले गए, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसने अंतिम सांस ली। इस घटना के बाद से मृतका के परिजन गहरे सदमे में हैं और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। न्याय की गुहार लगाने के लिए परिवार ने छतरपुर स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय का रुख किया है।
शादी के बाद से ही शुरू हुआ जुल्म
मृतका किरण कुशवाहा के भाई मनोज कुशवाहा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि किरण का विवाह लगभग एक साल पहले ही हुआ था। शादी के कुछ समय बीतने के बाद से ही ससुराल वाले उसे कम दहेज लाने का ताना देकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे थे। परिजनों के अनुसार, 1 जून को क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। किरण के भाई ने आरोप लगाया है कि पति हरि नारायण, सास तुलसा, ससुर परम लाल, ननद सुनीता और नंदोई उमेश ने मिलकर किरण को बुरी तरह पीटा और बाद में उसे जहरीले पदार्थ के साथ डिटर्जेंट का घोल पिला दिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से भोपाल रेफर कर दिया गया, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
पुलिस की लापरवाही से आक्रोश
पीड़ित परिवार का आरोप है कि बेटी की मौत के बाद से ही उन्हें इंसाफ के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि 20 जून को बड़ा मलहरा थाने में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस के ढुलमुल रवैये से तंग आकर अंततः मृतका के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर छतरपुर एसपी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने आला अधिकारियों से मांग की है कि किरण को मौत के मुंह में धकेलने वाले ससुराल पक्ष के सभी दोषियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सफाई
मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए छतरपुर के नगर पुलिस अधीक्षक अरुण सोनी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि मौली गांव की निवासी किरण कुशवाहा की शादी एक साल पहले हुई थी। लगभग एक महीना पहले संदिग्ध पदार्थ के सेवन से उसकी तबीयत खराब हुई थी, जिसके बाद भोपाल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। कार्रवाई में देरी के आरोपों पर सीएसपी अरुण सोनी ने कहा कि चूंकि घटना की मौत भोपाल में हुई थी, इसलिए पोस्टमार्टम भी वहीं संपन्न हुआ था। संबंधित थाने को मर्ग डायरी मिलने में देरी हुई, जिसके कारण कानूनी प्रक्रिया में समय लगा। अब पुलिस के पास मर्ग डायरी आ चुकी है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और दोषियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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