राजस्थान में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले उत्पादों और भ्रामक प्रचार करने वाली कंपनियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में अलवर से लेकर झालावाड़ तक एनर्जी ड्रिंक्स के बड़े ब्रांड्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। इस कार्रवाई से पेय पदार्थ बनाने और बेचने वाली कंपनियों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने भारी मात्रा में नामी ब्रांड्स के एनर्जी ड्रिंक्स का स्टॉक जब्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि इन ड्रिंक्स के केन और बोतलों पर ऐसे भ्रामक दावे किए गए थे जो उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं।
अलवर में वरुण बेवरेज पर छापा: हजारों की संख्या में बोतल और केन सीज
पहला बड़ा मामला अलवर से सामने आया है। यहाँ खाद्य सुरक्षा विभाग की एक विशेष टीम ने मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में स्थित वरुण बेवरेज लिमिटेड के परिसर पर अचानक छापा मारा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. योगेंद्र कुमार शर्मा के सीधे मार्गदर्शन में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। टीम ने वहाँ गहराई से जांच की और स्टिंग एनर्जी ब्रांड के तहत तैयार किए जा रहे पेय पदार्थों के स्टॉक को खंगाला।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि उत्पाद के लेबल पर किए गए दावे कानूनन सही नहीं थे। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत तुरंत कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों ने सबसे पहले उत्पाद के कई नमूने लिए जिन्हें आगे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके तुरंत बाद, टीम ने मौके पर मौजूद तैयार स्टॉक को सीज कर दिया। जब्त किए गए सामान की सूची इस प्रकार है:
- स्टिंग एनर्जी की 250 एमएल वाली कुल 62,000 बोतलें सीज की गईं।
- स्टिंग एनर्जी की ही 180 एमएल वाली कुल 30,200 केन जब्त की गईं।
इस तरह विभाग ने कुल मिलाकर 92,200 यूनिट्स का भारी-भरकम स्टॉक अपने कब्जे में ले लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या हैं वे भ्रामक दावे जिन पर विभाग ने जताई कड़ी आपत्ति?
खाद्य सुरक्षा टीम के अनुसार, स्टिंग एनर्जी के लेबल पर उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए कुछ ऐसे दावे लिखे गए थे जो वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह साबित नहीं हैं और भ्रामक जानकारी की श्रेणी में आते हैं। इन बोतलों और केन के लेबल पर मुख्य रूप से तीन बातें प्रमुखता से लिखी मिलीं:
- "स्टिमूलेट्स माइंड" (दिमाग को उत्तेजित या सक्रिय करना)
- "एनर्जाइजेस बॉडी" (शरीर को ऊर्जा प्रदान करना)
- "सेम ग्रेट टेस्ट" (वही शानदार स्वाद)
विभाग ने इन दावों को भ्रामक मानते हुए कंपनी पर शिकंजा कसा है। गौरतलब है कि देश में खाद्य मानकों को तय करने वाली सर्वोच्च संस्था भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI भी पहले ही ऐसी बेवरेज कंपनियों को चेतावनी और नोटिस जारी कर चुकी है। इन पेय पदार्थों में कैफीन की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक पाई जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक कैफीन वाले ये पेय गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए विभाग अब इनके लेबल पर छपने वाली जानकारियों की भी सूक्ष्मता से जांच कर रहा है।
झालावाड़ में भी हुई कार्रवाई: रेड बुल की 339 केन जब्त
अलवर के बाद ऐसा ही एक बड़ा एक्शन झालावाड़ जिले में भी देखने को मिला। यहाँ खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने राज्य सरकार के लोकप्रिय अभियान “शुद्ध आहार मिलावट पर वार” के तहत बाजारों में औचक निरीक्षण किया। टीम जब मंगलपुरा इलाके में स्थित सांवरियाजी सेल्स नाम के व्यापारिक प्रतिष्ठान पर पहुंची, तो वहाँ कैफिनेटेड बेवरेज श्रेणी के लोकप्रिय ब्रांड रेड बुल का बड़ा स्टॉक मिला।
अधिकारियों ने दुकान की सघन तलाशी ली, जहां से 15 पैकेटों में रखी हुई कुल 339 केन बरामद की गईं। जब इन केन के लेबल की जांच की गई, तो उन पर भी अलवर की तरह ही भ्रामक दावे लिखे हुए पाए गए। रेड बुल की इन केन पर लिखा हुआ था:
- "एनर्जी ड्रिंक" (ऊर्जा देने वाला पेय)
- "वाइटलाइज्ड बॉडी एंड माइंड" (शरीर और दिमाग को पुनर्जीवित या स्फूर्तिवान बनाना)
विभाग ने इन दावों को नियमों के खिलाफ मानते हुए सभी 339 केन को जब्त कर लिया और उनके नमूने लेकर सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भिजवा दिए हैं।
आगे क्या होगा? लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं सबकी नजरें
अलवर और झालावाड़ दोनों ही जिलों में हुई इन बड़ी कार्रवाइयों के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही मामलों में जब्त किए गए नमूनों को राज्य की अधिकृत प्रयोगशाला में रासायनिक विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है। जैसे ही लैब से नमूनों की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होगी, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत दोषी कंपनियों और विक्रेताओं के विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, राजस्थान के व्यापारिक जगत और आम जनता के बीच विभाग की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।
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