झारखंड की राजधानी रांची में एक दिल दहला देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया गया। पुलिस पिछले 17 दिनों से जिस सिर की तलाश में जंगलों की खाक छान रही थी, आखिरकार वह बरामद हो गया है। इस हत्याकांड का खुलासा होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने वाला कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि खुद मृतक की पत्नी और उसका कथित प्रेमी है।
रहस्यमयी तरीके से मिला था बिना सिर का अधजला शव
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले की शुरुआत 19 जून को हुई थी। रांची के बुंडू थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुमानडीह जंगल में स्थानीय लोगों को एक अधजला शव मिला था। शव की हालत देखकर ही पुलिस के होश उड़ गए थे। बदमाशों ने बेहद शातिराना और बेरहम तरीके से वारदात को अंजाम दिया था। शव का सिर गायब था और पहचान मिटाने के लिए उस पर पेट्रोल डालकर बुरी तरह जला दिया गया था। बिना सिर के और अधजले शव के कारण पुलिस के लिए यह गुत्थी सुलझाना एक बड़ी चुनौती बन गया था। इलाके के लोग भी इस खौफनाक वारदात से दहशत में आ गए थे।
पहचान छिपाने की खौफनाक साजिश
बिना सिर के शव की शिनाख्त करना पुलिस के लिए सबसे पहली और बड़ी चुनौती थी। जब तक मृतक की पहचान नहीं हो जाती, तब तक हत्यारों तक पहुंचना लगभग नामुमकिन था। पुलिस ने तुरंत अपनी जांच तेज की और घटनास्थल के आसपास से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने शुरू किए। पुलिस की टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। घटनास्थल से मिले अहम सुरागों, मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, टावर लोकेशन और फॉरेंसिक जांच की मदद से आखिरकार पुलिस मृतक की पहचान करने में सफल रही। मृतक की शिनाख्त संजय लोहरा के रूप में हुई। शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने संजय के परिवार और रिश्तेदारों से संपर्क साधा और उनके करीबियों पर नजर रखनी शुरू कर दी।
पत्नी और उसके प्रेमी पर घूमी शक की सुई
जैसे ही संजय लोहरा की पहचान हुई, पुलिस ने उसकी हत्या के कारणों की गहराई से जांच शुरू कर दी। इस जांच के दौरान पुलिस को मृतक की पत्नी सुबोधनी देवी के आचरण पर संदेह हुआ। तकनीकी सबूतों और कॉल डिटेल्स खंगालने पर पुलिस को पता चला कि सुबोधनी देवी का रमन कुमार सेठ नाम के एक व्यक्ति से गहरा संपर्क था। शक पुख्ता होने पर पुलिस ने सुबोधनी देवी और उसके कथित प्रेमी रमन कुमार सेठ को हिरासत में ले लिया। जब शुरुआत में दोनों से सामान्य पूछताछ की गई, तो उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। दोनों के बयानों में काफी विरोधाभास था और वे बार-बार अपनी बातें बदल रहे थे। लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई और जुटाए गए तकनीकी सबूत उनके सामने रखे, तो दोनों टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
17 दिनों बाद जंगल से बरामद हुआ कटा हुआ सिर
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने आखिरकार उस रहस्य से पर्दा उठा दिया जिसने पिछले 17 दिनों से पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। हत्या के बाद सिर को धड़ से अलग कर तमाड़ थाना क्षेत्र के आगरा और सुंदरडीह जंगल में फेंक दिया गया था। पुलिस टीम आरोपियों को अपने साथ लेकर उन जंगलों में गई और उनकी निशानदेही पर संजय लोहरा का कटा हुआ सिर सुरक्षित बरामद कर लिया। इस बरामदगी के साथ ही पुलिस ने मामले की सबसे बड़ी गुत्थी को सुलझा लिया। सिर बरामदगी की इस कार्रवाई के दौरान मौके पर FSL की टीम, बुंडू के डीएसपी, बुंडू और तमाड़ के थाना प्रभारी समेत भारी पुलिस बल मौजूद रहा ताकि कोई भी कानूनी सबूत छूट न जाए।
अवैध संबंध और विरोध के कारण रची गई हत्या की साजिश
ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस हत्या के पीछे अवैध प्रेम संबंध और गहरा पारिवारिक विवाद था। पुलिस के अनुसार, मृतक संजय लोहरा को अपनी पत्नी सुबोधनी देवी और रमन कुमार सेठ के बीच चल रहे प्रेम प्रसंग के बारे में पता चल गया था। संजय इस अवैध रिश्ते का कड़ा विरोध करते थे और अपनी पत्नी को रमन से बात करने या मिलने से रोकते थे। इस बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर हिंसक झड़पें और विवाद होते रहते थे। जब सुबोधनी देवी को लगा कि संजय उनके रिश्ते के बीच का सबसे बड़ा रोड़ा बन चुके हैं, तो उन्होंने संजय को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया। सुबोधनी ने अपने प्रेमी रमन कुमार सेठ के साथ मिलकर संजय की हत्या की एक बेहद खौफनाक साजिश रची और 19 जून को उसे अंजाम दे दिया।
हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपियों ने हत्या करने के बाद कानून की नजरों से बचने की पूरी तैयारी कर रखी थी। हत्या को अंजाम देने के बाद उन्होंने शव का सिर धड़ से अलग कर दिया ताकि पुलिस चेहरा देखकर मृतक की पहचान न कर सके। इसके बाद पहचान को पूरी तरह मिटाने के लिए धड़ पर पेट्रोल छिड़ककर सुमानडीह के घने जंगल में आग लगा दी गई। उन्होंने सोचा था कि बिना सिर के अधजले शव से पुलिस कभी भी संजय तक नहीं पहुंच पाएगी। वहीं, सिर को उन्होंने तमाड़ के जंगलों में फेंक दिया ताकि दोनों हिस्से अलग-अलग जगहों पर पड़े रहें और पुलिस कभी कत्ल की कड़ियों को न जोड़ पाए। हालांकि, पुलिस की सूझबूझ और तकनीकी जांच के आगे अपराधियों की यह चालाकी धरी की धरी रह गई। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी पत्नी सुबोधनी देवी और उसके प्रेमी रमन कुमार सेठ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और उनके खिलाफ कोर्ट में सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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