मानसून के साथ शुरू करें मक्के की उन्नत खेती
देशभर में मानसून की दस्तक के साथ ही किसानों ने अपने खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया है। खरीफ सीजन की फसलों में मक्के का एक विशेष स्थान है, जो कम समय में किसानों को बेहतर मुनाफा दे सकता है। आमतौर पर किसान पारंपरिक मक्के की ही खेती करते हैं, लेकिन अगर वे इसके साथ आधुनिक और मांग वाली किस्में जैसे स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न भी उगाएं, तो उनकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है। कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सही योजना और सही समय पर बुवाई करके इस फसल से शानदार उत्पादन लिया जा सकता है।
15 जुलाई तक बुवाई का है सही समय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. दिलीप पांडे के अनुसार, मक्के की बुवाई का काम 15 जुलाई तक पूरा किया जा सकता है। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पुख्ता इंतजाम मौजूद हैं, वे बिना देरी किए इस समय का पूरा लाभ उठा सकते हैं। पलामू और इसके आसपास के क्षेत्रों में स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका बड़ा कारण यह है कि स्थानीय और बाहरी बाजारों में इनकी मांग काफी अधिक रहती है, जिससे किसानों को सामान्य मक्के की तुलना में कई गुना अधिक दाम मिलते हैं। इस मौसम को इन दोनों किस्मों की बुवाई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।
कम समय में ज्यादा कमाई का जरिया: स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न
स्वीट कॉर्न की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बुवाई के मात्र 60 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाता है। इसका मतलब है कि किसान बेहद कम समय में अपनी फसल बाजार में बेचकर नकद मुनाफा कमा सकते हैं। दूसरी तरफ, बेबी कॉर्न की बात करें तो इसकी मांग बड़े होटलों, रेस्टोरेंट और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में सालभर बनी रहती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर किसान भाई चरणबद्ध तरीके से यानी कुछ-कुछ दिनों के अंतराल पर इसकी बुवाई करें, तो वे पूरे साल नियमित अंतराल पर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें साल के हर महीने एक निश्चित और स्थिर आय मिलती रहेगी।
मिट्टी की अम्लीयता है पलामू में कम पैदावार की वजह
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि पलामू और आसपास के इलाकों में मक्के की औसत उत्पादकता सामान्य से कम देखी गई है। इसका मुख्य कारण इस क्षेत्र की कृषि भूमि का अम्लीय यानी एसिडिक होना है। अम्लीय मिट्टी होने की वजह से पौधे की जड़ें जमीन में मौजूद पोषक तत्वों को पूरी तरह से सोख नहीं पाती हैं। पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधों का समुचित विकास रुक जाता है, जिसका सीधा असर फसल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता पर पड़ता है। इसलिए बुवाई की शुरुआत करने से पहले मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी गुणवत्ता को सुधारना बहुत आवश्यक है।
मिट्टी के उपचार और बेहतर पैदावार के दो अचूक उपाय
डॉ. दिलीप पांडे ने किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर फसल उत्पादन हासिल करने के लिए दो मुख्य वैज्ञानिक उपाय सुझाए हैं:
- बुझे चूने या डोलोमाइट का इस्तेमाल: मक्के के बीजों की बुवाई करने से करीब 30 से 40 दिन पहले खेत में बुझा हुआ चूना या डोलोमाइट पाउडर का छिड़काव करना चाहिए। इसकी मात्रा लगभग 5 किलोग्राम प्रति कट्ठा होनी चाहिए। यह मिट्टी के पीएच स्तर को संतुलित करता है और उसकी अम्लीयता को कम करता है, जिससे पौधों को सभी जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिलने लगते हैं।
- मेढ़ या उठी हुई क्यारियों पर बुवाई: खेत को समतल रखने के बजाय उसमें मेढ़ यानी उठी हुई क्यारियां बनाकर बुवाई करनी चाहिए। इस विधि से खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बहुत मजबूत हो जाती है। भारी बारिश के समय पानी जड़ों में जमा नहीं होता, जिससे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचता और पौधों की बढ़वार भी बहुत अच्छी होती है।
आधुनिक खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर
खेती के बदलते इस दौर में अब पारंपरिक तरीकों से हटकर कुछ नया करने की जरूरत है। मक्के की सामान्य खेती के साथ-साथ स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न जैसी आधुनिक और अधिक मुनाफा देने वाली फसलों को अपनाना किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने का एक बड़ा और व्यावहारिक जरिया बन सकता है। मिट्टी के सही उपचार, उत्तम जल निकासी और समय पर बुवाई के इन नियमों का पालन करके किसान कम लागत में भी बंपर कमाई का सपना सच कर सकते हैं।
https://hindi.news18.com/news/agriculture/sweet-corn-baby-corn-farming-in-monsoon-tips-local18-ws-l-10639175.html