दिल्ली में विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासन द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी में लंबे समय से लंबित पड़े बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न सरकारी प्रोजेक्ट्स को अब नई रफ्तार मिलेगी। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी. एस. संधू के विशेष प्रयासों और अलग-अलग विभागों के बीच आपसी समन्वय को बढ़ावा देने के निर्देशों के बाद, जमीन आवंटन से जुड़े वर्षों पुराने विवादों का समाधान कर दिया गया है। जमीन आवंटन की इस प्रक्रिया के सुगम होने से दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, परिवहन, पर्यावरण और जलापूर्ति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है।
सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिए जमीन का आवंटन
राजधानी में कानून और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए सागरपुर, दिलकुशा बाग, सुयूरपुर और किशनगढ़ में नए पुलिस थानों के निर्माण के लिए जमीन आवंटित की गई है। इसके अलावा, अपराध अनुसंधान प्रणाली को और आधुनिक रूप देने के उद्देश्य से नरेला में एक अत्याधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब की स्थापना की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए ताहिरपुर और धीरपुर में इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, अदालती कामकाज को सुचारू बनाने और कोर्ट कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए शाहदरा और रोहिणी में आवासीय परिसरों के विकास हेतु भूमि की मंजूरी दे दी गई है।
परिवहन और स्वच्छता परियोजनाओं को मिलेगी मजबूती
शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से परिवहन और स्वच्छता क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- DMRC को दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के लिए सनौठ में 20 हेक्टेयर जमीन मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए दी गई है।
- मेट्रो के निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए नरेला में 16 हेक्टेयर जमीन कास्टिंग यार्ड स्थापित करने के लिए आवंटित की गई है।
- शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए MCD को 24 फिक्स्ड कंपेक्टर ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध कराई गई है।
- दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए 8 अलग-अलग स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन स्थापित करने हेतु जमीन आवंटित की गई है।
जलापूर्ति और सामुदायिक विकास के कार्य
दिल्ली में पेयजल की किल्लत को दूर करने के लिए प्रशासन ने 151 नए बोरवेल की खुदाई को मंजूरी दी है, जिससे पानी की किल्लत वाले इलाकों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही जौंटी में एक नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण और संगम विहार में भूमिगत पानी के टैंक के लिए आवश्यक जमीन भी उपलब्ध कराई गई है।
सामाजिक कल्याण और नागरिकों की सुविधा के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत द्वारका सेक्टर-19 और मंगलापुरी में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के संचालन के लिए सामुदायिक भवनों का निर्माण किया जाएगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
दिल्ली के नागरिकों को जमीनी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के निर्माण हेतु कुल 112 NOC जारी की गई हैं। इसके साथ ही गरीबों और जरूरतमंदों को रियायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने वाली अटल कैंटीनों के लिए भी 5 NOC को मंजूरी दी गई है।
पर्यावरण के संरक्षण और कचरा निपटान प्रणाली को सुधारने के लिए होलंबी कलां में 8.5 हेक्टेयर भूमि पर एक अत्याधुनिक ई-वेस्ट इको मैनेजमेंट पार्क विकसित किया जाएगा। इसके अलावा, गाजीपुर में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और बायो-मीथेनाइजेशन सुविधाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि आवंटित की गई है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाते हुए नरेला एजुकेशन हब में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU), दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नए परिसरों के विस्तार के लिए जमीन आवंटित की गई है।
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