धान की रोपाई छोड़िए, बिहार का यह किसान तो फसल काटने को तैयार, पिता के नुस्खे ने बदली तस्वीर

बिहार के जमुई में एक प्रगतिशील किसान ने भीषण गर्मी के बावजूद गरमा धान की बंपर फसल तैयार कर ली है। जहां इलाके के अन्य किसान अभी धान की रोपाई के लिए तैयारी कर रहे हैं, वहीं इस किसान की फसल पककर कटाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

बिहार के जमुई में खेती का अनोखा प्रयोग

इस समय पूरा राज्य खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खेती-किसानी की गतिविधियों में व्यस्त है। धान की रोपाई का मौसम आ चुका है और किसान बड़ी संख्या में खेतों में बिचड़ा तैयार करने और नर्सरी लगाने में जुटे हैं ताकि समय रहते धान की बुवाई की जा सके। लेकिन इसी बीच जमुई जिले से एक ऐसी खबर आई है जो सबको हैरान कर रही है। जब ज्यादातर किसान अभी धान के पौधे लगाने की तैयारी ही कर रहे हैं, उसी समय जमुई के एक किसान ने भीषण गर्मी के दौरान ही धान की फसल उगाकर सबको चकित कर दिया है। अब उनकी मेहनत रंग लाई है और धान की फसल कटाई के लिए बिल्कुल तैयार खड़ी है।

किसान ध्रुव कुमार सिंह की सफलता की कहानी

यह अद्भुत कारनामा जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत मांगोबंदर गांव के निवासी ध्रुव कुमार सिंह ने कर दिखाया है। उन्होंने अपने खेतों में 'गरमा धान' की खेती का सफल प्रयोग किया है। आमतौर पर गरमा धान गर्मियों के सीजन में उगाया जाता है, लेकिन इसके लिए बेहद सावधानी और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। जमुई के माहौल में इस फसल को सफलतापूर्वक तैयार करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। किसान ध्रुव कुमार सिंह ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से खेती से जुड़ा है और यह प्रयोग उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं।

पिता की सलाह और तकनीकी जानकारी

ध्रुव ने बताया कि इस अनोखी खेती का विचार उन्हें अपने पिता से मिला था। परिवार में खेती की पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने गरमा धान उगाने का मन बनाया। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने खुद पहल की और पश्चिम बंगाल का दौरा किया। वहां उन्होंने धान की इस विशेष किस्म और इसकी खेती की तमाम बारीकियों को समझा और तकनीकों का बारीकी से अध्ययन किया। वापस लौटने के बाद उन्होंने पूरी लगन से खेती की तैयारी शुरू कर दी थी।

बीज खोजने में आई थी बड़ी बाधा

खेती शुरू करने के दौरान ध्रुव के सामने सबसे बड़ी समस्या धान का बीज ढूंढने की थी। उन्होंने जिले के कई बड़े बीज भंडारों और दुकानदारों के चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह उन्हें निराशा ही हाथ लगी। गरमा धान के बीज आसानी से उपलब्ध नहीं थे। अंततः, एक बुजुर्ग किसान ने उनकी मदद की जिनके पास यह खास बीज सुरक्षित रखा हुआ था। उनसे बीज मिलने के बाद ही ध्रुव ने नर्सरी तैयार की और खेती का काम शुरू कर पाया।

मजदूरी की कमी और 4 कट्ठा में सफल खेती

ध्रुव की योजना शुरुआत में करीब 2 बीघा जमीन पर धान की खेती करने की थी, जिसके लिए उन्होंने बड़े पैमाने पर बिचड़ा भी तैयार कर लिया था। लेकिन इस दौरान उनके सामने मजदूरों की उपलब्धता को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई। समय पर मजदूर नहीं मिल पाने के कारण वह बड़े स्तर पर खेती नहीं कर सके। हार न मानते हुए, ध्रुव ने स्वयं और एक अन्य व्यक्ति की मदद से खेत की जुताई और बुवाई का काम संभाला। उन्होंने लगभग 4 कट्ठा जमीन पर धान की रोपाई की। अब उनके खेत में धान की फसल बालियों से लदी हुई है और पककर तैयार हो चुकी है। ध्रुव का कहना है कि अगले एक सप्ताह के भीतर उनकी धान की फसल काटने के लिए तैयार हो जाएगी।

सालाना 3 फसल लेने का सपना

गरमा धान की इस खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान अब साल में कुल 3 फसलें ले सकता है। आम तौर पर किसान साल में केवल दो फसलों तक ही सीमित रहते हैं। ध्रुव की यह तकनीक उनके लिए वरदान साबित हो रही है। इस समय वह दोबारा धान की खेती के लिए बिचड़ा तैयार करने में लगे हैं। उनका मानना है कि जब तक वह धान की रोपाई का काम शुरू करेंगे, तब तक उनका खेत भी पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। ध्रुव ने विश्वास जताया है कि अब उन्हें अनुभव मिल चुका है और वह अगले साल से इसे और भी बड़े पैमाने पर करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं।

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