सफलता की कहानी: घर-घर कपड़े बेचने वाली नेहा का 2 करोड़ का कारोबार, जानिए कैसे हासिल किया ये मुकाम

रांची की रहने वाली नेहा ने छोटे स्तर से शुरुआत कर आज एक बड़ी पहचान बनाई है। नेहा क्रिएशन के जरिए वह न केवल अपना व्यापार फैला रही हैं, बल्कि 70 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली नेहा की सफलता की दास्तां उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने दम पर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। नेहा आज नेहा क्रिएशन नाम की एक सफल कंपनी की मालकिन हैं। हालांकि, उनका यह सफर इतना आसान नहीं था। एक समय था जब नेहा खुद लोगों के घरों में जाकर कपड़े बेचा करती थीं। उन्होंने अपनी मेहनत और निरंतरता के दम पर आज न केवल अपना साम्राज्य खड़ा किया है, बल्कि करोड़ों का टर्नओवर भी हासिल कर लिया है।

व्यापार का विस्तार और नेटवर्क

नेहा की कंपनी नेहा क्रिएशन मुख्य रूप से सलवार सूट, कुर्ती, साड़ी और पेटिकोट जैसे परिधानों का निर्माण करती है। उनके काम का दायरा अब झारखंड के हर जिले तक फैल चुका है। केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार और सूरत जैसे बड़े बाजारों तक उनके प्रोडक्ट्स की मांग है। नेहा का कहना है कि वे मुख्य रूप से होलसेल में डील करती हैं और उनके साथ 70 से अधिक कारीगर जुड़े हैं, जो इन उत्पादों को तैयार करते हैं।

सफलता का मंत्र: नकारात्मकता को नजरअंदाज करना

अपनी सफलता के पीछे के राज को साझा करते हुए नेहा कहती हैं कि समाज में लोग आपके लुक्स और पहनावे पर टिप्पणी करने से पीछे नहीं हटते। हालांकि, वह खुद को ऐसे लोगों के लिए बहरा बना लेती हैं। नेहा का मानना है कि जो आपके काम का है, केवल वही सुनना चाहिए और बाकी चीजों के लिए बिल्कुल उदासीन हो जाना चाहिए। यही वह सोच है जिसने उन्हें मुश्किल दौर में भी आगे बढ़ने की हिम्मत दी और उन्हें मानसिक रूप से परेशान होने से बचाया।

किफायती दाम और गुणवत्ता

नेहा क्रिएशन की सबसे बड़ी खासियत वहां मिलने वाले उत्पादों की कीमत है। चूंकि नेहा सीधे तौर पर होलसेल व्यापार से जुड़ी हैं और उनके पास अपने कारीगर हैं, इसलिए वे ग्राहकों को सबसे किफायती दरों पर सामान उपलब्ध करा पाती हैं। ग्राहकों को वहां मात्र 300 रुपये की शुरुआती रेंज में बेहतरीन कुर्तियां और साड़ियां मिल जाती हैं। उनके पास सिल्क से लेकर अन्य फैब्रिक की एक बड़ी रेंज मौजूद है, जिसमें लेटेस्ट ट्रेंड्स का पूरा ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि गुमला और लोहरदगा जैसे दूर-दराज के जिलों से भी ग्राहक और व्यापारी उनके पास खरीदारी करने पहुंचते हैं। शादी के सीजन में तो स्थिति ऐसी होती है कि उनके पास खाने तक का समय नहीं बचता।

2 करोड़ के टर्नओवर तक का सफर

नेहा याद करती हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब वह घर-घर जाकर ग्राहकों को अपने कपड़ों की गुणवत्ता दिखाती थीं। वह कठिन मेहनत और ईमानदारी का ही नतीजा है कि आज उनका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। उन्होंने न केवल अपने सपनों को साकार किया है, बल्कि कई अन्य लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने का काम भी किया है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों और काम के प्रति ईमानदारी हो, तो शून्य से शुरू करके भी शिखर तक पहुंचा जा सकता है।

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