चीन के खजाने पर अमेरिका की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, सैन्य बेस के भीतर तैयार हो रही है सीक्रेट फैक्ट्री

अमेरिका ने चीन के रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए सैन्य इतिहास में पहली बार अपने मिलिट्री बेस के भीतर एक प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। साल 2027 तक चीन से आने वाले इन महत्वपूर्ण खनिजों पर सरकारी प्रतिबंध लागू होने के साथ ही यह कदम बीजिंग की आर्थिक दादागिरी को करारी टक्कर देने वाला है।

चीन के रेयर अर्थ साम्राज्य को चुनौती

अमेरिका ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आर्थिक खजाने और उनकी सबसे संवेदनशील कमजोरी पर सीधी आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक करने का पूरा मन बना लिया है। वॉशिंगटन अब चीन के रेयर अर्थ एलिमेंट्स के घमंड को पूरी तरह से तोड़ने की तैयारी कर चुका है। इस दिशा में सैन्य इतिहास में पहली बार अमेरिकी सेना अपने बेहद सुरक्षित 'टूल आर्मी डिपो' मिलिट्री बेस के भीतर ही देश का पहला कमर्शियल प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने जा रही है। इस जिम्मेदारी को दिग्गज प्राइवेट कंपनी REalloys को सौंपा गया है और इस मिशन को पूरा करने के लिए एक सख्त डेडलाइन भी निर्धारित कर दी गई है।

चीन की दादागिरी पर प्रहार

चीन और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने मई महीने में बीजिंग का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया था और अब अमेरिका चीन के उस खजाने पर हमला करने जा रहा है, जिसके दम पर बीजिंग पूरी दुनिया को आंखें दिखाता आया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन अब पूरी तरह से चीन के रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर केंद्रित है। सैन्य इतिहास में पहली बार अमेरिकी मिलिट्री बेस के भीतर एक ऐसी सीक्रेट फैक्ट्री का निर्माण किया जा रहा है, जो चीन की वैश्विक दादागिरी को खत्म करने में सक्षम होगी। इस परियोजना के लिए एक निश्चित और तगड़ी डेडलाइन तय की जा चुकी है, जो आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह बदल देगी।

अमेरिका का मास्टर प्लान और डेडलाइन

अमेरिका की प्राइवेट कंपनी REalloys को अपने सबसे सुरक्षित टूल आर्मी डिपो मिलिट्री बेस के अंदर देश का पहला कमर्शियल रेयर अर्थ प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का कार्य सौंपा गया है। यह अमेरिका की वो सीक्रेट फैक्ट्री होगी, जहां से चीन की आर्थिक गर्दन दबोची जाएगी। अमेरिका में एक अत्यंत कड़ा कानून लागू होने जा रहा है, जिसके तहत 1 जनवरी 2027 से अमेरिकी सुरक्षा प्रणालियों और हथियारों में चीनी रेयर अर्थ सामग्रियों के इस्तेमाल पर पूर्ण फेडरल प्रोक्योरमेंट बैन यानी सरकारी खरीद पर प्रतिबंध लग जाएगा। इस डेडलाइन के साथ यूटा (Utah) स्थित इस मिलिट्री बेस पर कमर्शियल डेवलपमेंट का काम 2027 की शुरुआत में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है और साल 2028 तक यहां पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करने की रणनीति तैयार की गई है। वॉशिंगटन इस परियोजना को लेकर इतना गंभीर है कि जिस आपूर्ति श्रृंखला को विकसित करने में आम तौर पर सालों का वक्त लगता है, उसे कुछ महीनों के भीतर ही तैयार किया जा रहा है। REalloys इस पूरे प्रोजेक्ट को एक विशेष एन्हांस्ड यूज लीज स्ट्रक्चर के तहत फंड और संचालित करेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि भले ही यह प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म अमेरिकी सेना की सुरक्षित जमीन पर स्थापित होगा, लेकिन इसका मालिकाना हक, फंडिंग और कामकाज पूरी तरह से प्राइवेट हाथों में ही रहेगा।

डिस्प्रोशियम और टर्बियम की अहमियत

सवाल यह है कि आखिर इस मिलिट्री बेस के अंदर ऐसा क्या खास बनने वाला है, जिससे चीन को इतनी घबराहट हो रही है। इस प्लांट में डिस्प्रोशियम और टर्बियम जैसे दो सबसे महत्वपूर्ण हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स को रिफाइन किया जाएगा। ये दोनों तत्व इतने कीमती और अनिवार्य हैं कि इनके बिना अत्यधिक तापमान पर काम करने वाले परमानेंट मैग्नेट्स बनाना असंभव है। यही मैग्नेट्स अमेरिका के आधुनिक हथियारों, रडार सिस्टम और फाइटर जेट्स की मुख्य शक्ति हैं। सरल शब्दों में कहें तो कच्चे अयस्क (Ore) को खदान से निकालकर पहले साफ किया जाता है, फिर रासायनिक रूप से उन्हें अलग-अलग तत्वों में विभाजित किया जाता है। इसके बाद इन्हें उच्च गुणवत्ता वाली धातुओं में बदला जाता है, जिनसे वे परमानेंट मैग्नेट्स तैयार होते हैं जो प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों, फाइटर जेट्स, नौसैनिक जहाजों और रडार सिस्टम को संचालित करते हैं। दशकों से चीन ने इस पूरी श्रृंखला के हर हिस्से पर अपना नियंत्रण बना रखा था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल रही है।

अमेरिकी डिफेंस कंपनियों के सामने संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रक्षा औद्योगिक आधार में आ रही दिक्कतों और चीन पर बढ़ती निर्भरता को समाप्त करने के लिए डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट का प्रभावी उपयोग किया है। इसके अलावा, उन्होंने लॉकहीड मार्टिन, RTX, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन, जनरल डायनेमिक्स और एल3 हैरिस जैसी दिग्गज रक्षा कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। इसमें अमेरिकी हथियारों के स्टॉक को जल्द से जल्द भरने और आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।

  • लॉकहीड मार्टिन: यह कंपनी विश्व का सबसे खतरनाक फाइटर जेट F-35 बनाती है। एक F-35 जेट को बनाने में लगभग 408 किलोग्राम से अधिक रेयर अर्थ सामग्री का उपयोग होता है, जिसमें 50 पाउंड समैरियम-कोबाल्ट मैग्नेट्स शामिल हैं जो अत्यधिक गर्मी में भी कार्य करने में सक्षम हैं।
  • RTX: कंपनी का प्रसिद्ध पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और इसके उन्नत रडार पूरी तरह से उच्च शुद्धता वाले डिस्प्रोशियम और टर्बियम पर निर्भर हैं, जो अब तक चीन के प्रसंस्करण रास्तों से होकर ही अमेरिका पहुंचते थे।
  • नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन: इनका नया B-21 रेडर बॉम्बर और डीप स्पेस एडवांस्ड रडार कैपेबिलिटी (Dsc) प्रोग्राम भी चीनी आपूर्ति बाधाओं में फंसा हुआ है।

यदि ये कंपनियां 2027 तक अपनी आपूर्ति श्रृंखला से चीनी सामग्री को पूरी तरह बाहर नहीं करती हैं, तो वे अमेरिकी सरकार के बड़े रक्षा कॉन्ट्रैक्ट्स खो देंगी।

REalloys पर अमेरिका का भरोसा

पेंटागन ने REalloys को ऐसे ही नहीं चुना है। पिछले दो वर्षों में इस कंपनी ने बैकएंड पर रणनीतिक रूप से खुद को मजबूत किया है और चीन के बाहर हैवी रेयर अर्थ की सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरी है। REalloys ने सास्काचेवान रिसर्च काउंसिल (SRC) के साथ मिलकर एक बड़ा गठबंधन किया है और उनकी प्रोसेसिंग सुविधा के अपग्रेड के लिए करीब 172 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है। इस निवेश के बदले REalloys को SRC के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत हिस्सा खरीदने का एक्सक्लूसिव अधिकार प्राप्त हो गया है। इसके अलावा, कंपनी ने कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर कई समझौते किए हैं, जिसमें ग्रीनलैंड के तंब्रीज प्रोजेक्ट से 15 प्रतिशत हिस्सा लेना, मोंटाना के शीप क्रीक रेयर अर्थ डिपॉजिट के साथ रणनीतिक गठजोड़ और वायोमिंग में रामाको रिसोर्सेज के ब्रुक माइन प्लेटफॉर्म से कोयले पर आधारित रेयर अर्थ सामग्री की सप्लाई का फ्रेमवर्क तैयार करना शामिल है।

https://hindi.news18.com/world/america-trump-planning-economic-surgical-strike-on-china-with-secret-rare-earth-factory-in-utah-military-base-10635174.html