रायपुर फैक्ट्री विस्फोट: सुरक्षा का नामो-निशान नहीं, श्रमिकों ने खोले बदहाली के राज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक लोहे की फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जिसके बाद सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चश्मदीदों ने बताया कि कामगारों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

रायपुर फैक्ट्री में भीषण हादसा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ उरला इलाके में स्थित 'थ्री डी' नाम की एक आयरन-प्रोसेसिंग फैक्ट्री में हुए एक शक्तिशाली विस्फोट ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। ऑक्सीजन सिलेंडर में हुए इस धमाके की गूंज इतनी जोरदार थी कि इसकी आवाज लगभग आधा किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। इस भयानक हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मरने वालों में से दो मजदूर मूल रूप से मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के निवासी थे। धमाका इतना भीषण था कि शवों के अवशेष घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर तक जा गिरे, जिससे पूरी फैक्ट्री में दहशत का माहौल बन गया।

श्रमिकों ने बयां किया सुरक्षा का काला सच

इस हादसे के बाद फैक्ट्री के गेट पर काम करने वाले अन्य मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। वहां काम करने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी मजदूर ने फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही की पोल खोलते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि फैक्ट्री में सुरक्षा के नाम पर शून्य इंतजाम हैं। मजदूर ने रोते हुए कहा कि काम के दौरान न तो उन्हें हेलमेट मुहैया कराया जाता है और न ही सुरक्षा वाले जूते दिए जाते हैं। हालात इतने खराब हैं कि अगर कर्मचारी सुरक्षा उपकरणों की मांग करते हैं, तो प्रबंधन की तरफ से साफ कहा जाता है कि इसके बदले उनके वेतन से पैसे काटे जाएंगे। सुबह करीब 7 बजे हुई इस घटना ने मजदूरों की जान को जोखिम में डालकर काम कराने की सच्चाई को सबके सामने ला दिया है।

प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर दी। नॉर्थ जोन के डीसीपी मयंक गुर्जर ने बताया कि धमाका फर्नेस के पास रखे ऑक्सीजन सिलेंडर में हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के तुरंत बाद एसडीआरएफ की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। डीसीपी ने आगे कहा कि अभी एफएसएल टीम की जांच का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के स्पष्ट कारणों और हताहतों के सही आंकड़ों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच में जुट गई है और जल्द ही इस लापरवाही के लिए जवाबदेही तय की जाएगी।

हादसे के बाद का मंजर

विस्फोट के तुरंत बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर भागने लगे। एक घायल को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शी मजदूरों के अनुसार, धमाका अचानक हुआ और उसने किसी को संभलने का मौका भी नहीं दिया। फिलहाल फैक्ट्री परिसर को सुरक्षित कर लिया गया है, लेकिन वहां काम करने वाले श्रमिकों में अभी भी भारी आक्रोश और डर का माहौल बना हुआ है। लोग अब इस बात की मांग कर रहे हैं कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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