हाईकोर्ट का गेस्ट फैकल्टी के हक में ऐतिहासिक आदेश
मध्य प्रदेश में कार्यरत हजारों गेस्ट फैकल्टी के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य में कार्यरत अतिथि विद्वानों और शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिक्षण संस्थान में नियमित शिक्षक की पदस्थापना होने पर वहां से काम कर रहे गेस्ट फैकल्टी को सीधे तौर पर कार्यमुक्त या सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला और याचिका का आधार
यह पूरा मामला रीवा की रहने वाली गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा द्वारा दायर की गई रिट याचिका से जुड़ा है। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकलपीठ के जस्टिस विवेक कुमार सिंह द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से वकील विनय प्रताप सिंह ने अपना पक्ष मजबूती से रखा, जबकि राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व उप महाधिवक्ता श्वेता यादव ने किया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस संस्थान में सुमन वर्मा अपनी सेवाएं दे रही थीं, वहां नियमित शिक्षिका भावना डहरिया की नियुक्ति हो चुकी है। याचिकाकर्ता ने ग्वालियर बेंच द्वारा 20 मई 2025 को दिए गए एक अंतरिम आदेश का उदाहरण देते हुए कोर्ट को बताया कि नियमित नियुक्ति होने की स्थिति में गेस्ट फैकल्टी को नौकरी से हटाना उचित नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि ऐसी स्थिति में उन्हें अन्य उपलब्ध रिक्त पदों पर स्थानांतरित या समायोजित किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार को दिए गए ये निर्देश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों और तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए राज्य शासन को निर्देशित किया है कि गेस्ट फैकल्टी को किसी भी हालत में सेवा से बाहर न निकाला जाए। इसके बजाय, उन्हें राज्य में उपलब्ध उन अन्य स्थानों पर नियुक्ति दी जाए जहां पद खाली पड़े हैं। कोर्ट के इस निर्णय को गेस्ट फैकल्टी समुदाय के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
किन स्थितियों में जा सकती है नौकरी
हालांकि हाईकोर्ट ने इस सुरक्षा कवच के साथ कुछ शर्तें भी स्पष्ट की हैं। कोर्ट ने कहा है कि यदि संबंधित गेस्ट फैकल्टी को किसी अन्य खाली पद पर कार्यभार संभालने का मौका दिया जाता है और वह व्यक्ति वहां ज्वाइन करने से लिखित रूप में मना कर देता है या नई जगह पर कार्यभार नहीं संभालता है, तो ऐसी स्थिति में राज्य सरकार के पास उनकी सेवा समाप्त करने का अधिकार होगा। इस फैसले से उन सभी गेस्ट फैकल्टी को राहत मिली है जो अक्सर नियमित शिक्षकों की भर्ती के बाद अपनी नौकरी खोने के डर में रहते थे। यह फैसला आने वाले समय में प्रदेश के उच्च शिक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में गेस्ट फैकल्टी के समायोजन के लिए एक नजीर साबित होगा।
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