जलवायु परिवर्तन और अल नीनो का घातक तालमेल
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अब 'अल नीनो' और जलवायु परिवर्तन को दो अलग-अलग घटनाओं के तौर पर देखना एक बड़ी भूल होगी। ये दोनों कारक मिलकर मानसून के मिजाज को बेहद आक्रामक बना रहे हैं। प्रशांत महासागर में तेजी से सक्रिय हो रहे अल नीनो के प्रभाव के चलते इस बार मानसून के आगमन में न केवल देरी हुई, बल्कि जून के पूरे महीने में वर्षा का स्तर भी सामान्य से काफी नीचे रहा। आंकड़े बताते हैं कि जून महीने के अंत तक पूरे भारत में बारिश की कमी 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, स्थिति में अचानक एक चौंकाने वाला मोड़ आया और जून के आखिरी दिनों में मानसून के अचानक सक्रिय होने से मुंबई सहित देश के पश्चिमी तट के बड़े इलाकों में मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी।
देशभर में प्रभावी कई मौसमी प्रणालियां
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय मानसून में जो बदलाव देखने को मिल रहे हैं, वे एक नई और चिंताजनक वास्तविकता की ओर इशारा करते हैं। स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि मानसून अभी अपने सक्रिय चरण में है और देशभर में कई मौसमी प्रणालियां एक साथ प्रभावी हैं। ओडिशा के ऊपर बने निम्न वायु दाब के क्षेत्र और महाराष्ट्र में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के कारण मानसून की पूर्वी और पश्चिमी शाखाएं दोनों ही अत्यधिक सक्रिय बनी हुई हैं।
पलावत के मुताबिक, पिछले तीन से चार दिनों के दौरान अरब सागर से लगातार आने वाली भारी आर्द्रता ने महाराष्ट्र के ऊपर घने बादलों को इकट्ठा किया, जो भारी बारिश का मुख्य कारण बनी। वहीं, मैरीलैंड विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रोफेसर और आईआईटी-मुंबई के सेवानिवृत्त प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे ने कहा कि मुंबई में मानसून के आने में जो देरी हुई, उसे आंशिक रूप से अल नीनो के प्रभाव से जोड़ा जा सकता है।
ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ा तापमान
प्रोफेसर मुर्तुगुड्डे का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ रही गर्मी और अरब सागर की हवाओं के रुख में आया बदलाव अपना असर दिखा रहा है। हवाओं की तेज गति भी मानसून के मुख्य क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश की बड़ी वजह है। अब अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही देश के आंतरिक हिस्सों में नमी पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जिससे अल नीनो और वैश्विक तापवृद्धि का संबंध अटूट हो गया है।
मुंबई में इतनी अधिक बारिश क्यों हो रही है?
प्रोफेसर मुर्तुगुड्डे ने विस्तार से समझाया कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में एक साथ मौसमी गतिविधियों का सक्रिय होना बारिश को बढ़ा देता है। जब बंगाल की खाड़ी में निम्न वायु दाब का क्षेत्र बनता है और दोनों तरफ की प्रणालियां मिलकर काम करती हैं, तो मानसून के केंद्र में भारी बारिश होती है और यही नमी मुंबई तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, पश्चिमी घाट की भौगोलिक स्थिति भी इन हवाओं को ऊपर उठने के लिए मजबूर करती है, जिससे मुंबई के आसपास मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता है।
अल नीनो घटा रहा है बारिश के दिन
वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि अल नीनो और जलवायु परिवर्तन मिलकर मौसम को बदल रहे हैं। अल नीनो आमतौर पर मानसून के परिसंचरण तंत्र को प्रभावित कर बारिश वाले दिनों की कुल संख्या में कमी लाता है। दूसरी ओर, अरब सागर का बढ़ता तापमान और वायुमंडलीय बदलाव वातावरण में नमी को काफी अधिक बढ़ा रहे हैं। नतीजा यह होता है कि जब भी स्थितियां अनुकूल होती हैं, तो मौसम प्रणालियां पहले की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी बारिश करवाती हैं।
महेश पलावत ने जोर देकर कहा कि अल नीनो बारिश में देरी का कारण बन रहा है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसकी भयावहता को कई गुना बढ़ा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मानसून की गतिशीलता पूरी तरह बदल गई है। अब बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मौसमी प्रणालियां उत्तर-पश्चिम के बजाय सीधी पश्चिम की ओर रुख कर रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व महानिदेशक के.जे. रमेश ने भी पुष्टि की है कि अल नीनो के वर्षों में बारिश के दिनों की संख्या में गिरावट आती है।
मानसून का हमेशा के लिए बदला स्वरूप
पूर्व महानिदेशक के.जे. रमेश के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग ने भारतीय मानसून का स्वरूप हमेशा के लिए बदल दिया है। उन्होंने कहा कि चाहे अल नीनो हो या न हो, अब बारिश का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब बहुत कम समय में मूसलाधार बारिश देखने को मिलेगी। उत्तर-पश्चिमी भारत के पैटर्न में यह बदलाव स्पष्ट देखा जा सकता है। वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ और नमी की बढ़ी हुई आपूर्ति के कारण राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश जैसे इलाकों में भी सामान्य से अधिक बारिश हो रही है, जो पहले संभव नहीं था। स्पष्ट है कि अरब सागर से मिल रही अतिरिक्त नमी ने पूरे देश के वर्षा पैटर्न को एक नए और अनिश्चित दौर में धकेल दिया है।
https://www.indiatv.in/india/national/mumbai-floods-as-warning-climate-change-altering-indian-monsoon-pattern-what-experts-say-2026-07-07-1229804