बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस समय दलित मतों को अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ मची हुई है। इसी सियासी खींचतान के बीच, केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी ने एक जनसभा में ऐसा बयान दिया है जिसने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। मांझी ने बिना किसी का नाम लिए केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरक्षण और संविधान की सुरक्षा का श्रेय खुद लेने वाले नेताओं पर सीधा वार किया और पूछा कि आखिर वे खुद को क्या समझते हैं।
"कौन हो तुम जी?" - आरक्षण पर मांझी का कड़ा रुख
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जीतन राम मांझी ने आरक्षण और संविधान के मुद्दे पर हाल ही में दिए गए बयानों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने चिराग पासवान का नाम लिए बिना कहा कि आजकल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोग कहते फिर रहे हैं कि मेरे रहते आरक्षण और संविधान को कोई हाथ भी नहीं लगा सकता। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आखिर कौन हो तुम जी?
मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरक्षण और देश के संविधान की रक्षा करना किसी एक व्यक्ति या नेता के बस की बात नहीं है। यह हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत संविधान का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र की सत्ता में हैं और बिहार में सम्राट चौधरी जैसे नेता सक्रिय हैं, तब तक कोई भी ताकत आरक्षण को खत्म नहीं कर सकती। उन्होंने राजनीतिक फायदे के लिए जनता को गुमराह करने वालों को खरी-खोटी सुनाई।
बेटे संतोष सुमन को मंच से बड़ी सीख
इस कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी का गुस्सा केवल विरोधियों पर ही नहीं फूटा, बल्कि उन्होंने मंच से ही अपने बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन को भी सार्वजनिक रूप से बड़ी नसीहत दे डाली। मांझी ने संतोष सुमन की शांत कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त की और राजनीति में सक्रिय रहने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए:
- खुलकर अपनी बात रखें: मांझी ने कहा कि संतोष, तुम्हें भी अब बोलना पड़ेगा। राजनीति में अपना मुंह बंद रखने से काम नहीं चलता।
- दिखना जरूरी है: उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो बाजार में दिखता रहता है, वही बिकता है। इसलिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराना जरूरी है।
- अधिकारों के लिए आवाज उठाएं: दूसरों ने झूठ बोलकर जितनी सीटें लेनी थीं ले लीं, लेकिन तुम्हें क्या मिला? तुम्हें तो सिर्फ एक झुनझुना थमा दिया गया।
इसके बाद मांझी ने महिलाओं की चूड़ियों का उदाहरण देते हुए एक बेहद चर्चित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जैसे चूड़ी पहनने वाली कोई महिला एकदम शांत बैठी रहती है और कोई दूसरी महिला अपनी चूड़ियों को खनकाती-झनझनाती रहती है ताकि सब उसकी तरफ देखें, वैसे ही तुम्हें भी अपनी राजनीति में चूड़ियां झनझनानी होंगी। शांत बैठने से अधिकार नहीं मिलते।
एनडीए के भीतर बढ़ती राजनीतिक तपिश
जीतन राम मांझी के इस बेबाक बयान ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर ही सहयोगी दलों के बीच चल रही यह खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। दलित समुदाय के नेतृत्व को लेकर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच का यह मतभेद आने वाले समय में क्या मोड़ लेता है, इस पर सभी राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।
इस बयान के बाद अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और चिराग पासवान के समर्थकों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। बिहार में दलित वोट बैंक को लेकर छिड़ी यह जंग आने वाले चुनावों में सीटों के बंटवारे और आपसी तालमेल को भी प्रभावित कर सकती है।
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