पश्चिम बंगाल के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विस्तार की गति में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की जा रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, केवल दो महीनों के भीतर ही प्रदेश में 30,500 लोगों ने संघ की सदस्यता ग्रहण की है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जब राज्य में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में थी, तब आरएसएस से जुड़ने वाले लोगों की संख्या हर महीने बेहद सीमित हुआ करती थी। हालांकि, अब यह आंकड़ा हजारों में पहुंच गया है। विशेष रूप से मई और जून के महीनों में रिकॉर्ड स्तर पर 30,500 लोगों ने संघ की सदस्यता ली है।
पिछले छह महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बनने वाले लोगों की संख्या काफी कम थी। अब इस संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। संघ के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस की सरकार के समय लोग एक तरह के डर के साए में थे, जिससे वे खुलकर सामने नहीं आ पाते थे। अब वह डर दूर होने के बाद लोग स्वेच्छा से संघ के करीब आ रहे हैं। इसी का परिणाम है कि संघ की शाखाओं का विस्तार अब केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्लॉक स्तर और ग्राम पंचायत स्तर पर भी ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रियता काफी बढ़ गई है।
भौगोलिक रणनीति: बंगाल को तीन संगठनात्मक हिस्सों में बांटा
मौजूदा समय में दक्षिण बंगाल, मध्य बंगाल और उत्तर बंगाल इन तीनों ही क्षेत्रों में संघ का विस्तार बहुत तेजी से देखने को मिल रहा है। सांगठनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए संघ ने बंगाल को तीन प्रमुख प्रांतों में विभाजित किया है:
- दक्षिण बंगाल: इस सांगठनिक प्रांत का मुख्य केंद्र अथवा मुख्यालय कोलकाता को बनाया गया है।
- मध्य बंगाल: इस क्षेत्र के कामकाज का संचालन वर्धमान मुख्यालय से किया जाता है।
- उत्तर बंगाल: इस हिस्से की जिम्मेदारी सिलीगुड़ी मुख्यालय के पास है।
साल 2013 तक पश्चिम बंगाल में संघ की शाखाओं की संख्या मात्र 800 के आसपास हुआ करती थी। इसके बाद साल 2021 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3000 के आसपास पहुंच गई। साल 2024 में संघ की शाखाओं की संख्या जहां करीब 4550 के आसपास थी, वहीं अब इसमें भारी बढ़ोतरी हुई है और यह आंकड़ा 5500 के आसपास पहुंच गया है।
महीनेवार आंकड़े: जानें किस महीने संघ से जुड़े कितने लोग?
पश्चिम बंगाल में इस वर्ष के शुरुआती महीनों में संघ की सदस्यता लेने वाले नए लोगों का आंकड़ा इस प्रकार रहा है:
- जनवरी: इस महीने में कुल 563 नए सदस्य संगठन से जुड़े।
- फरवरी: फरवरी के दौरान नए सदस्यों की संख्या 332 रही।
- मार्च: मार्च महीने में सदस्यता का ग्राफ थोड़ा बढ़ा और 697 लोग संघ में शामिल हुए।
- अप्रैल: इस महीने में कुल 1339 नए लोगों ने सदस्यता ग्रहण की।
- मई: मई महीने में एक विशाल उछाल देखा गया, जिसमें रिकॉर्ड 22,171 लोग संघ का हिस्सा बने।
- जून: जून के दौरान सदस्यता लेने वालों की संख्या 8479 दर्ज की गई।
देशव्यापी स्तर पर भी दर्ज हुई शाखाओं में बड़ी बढ़ोतरी
आरएसएस के विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बहुत बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन माध्यम से संघ से संपर्क कर रहे हैं और सदस्यता ले रहे हैं। इसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल हैं, लेकिन सबसे खास बात यह है कि युवाओं की भागीदारी इसमें सबसे अधिक देखी जा रही है। केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत में संघ की शाखाओं में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। देश भर के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- शाखाओं के स्थान: साल 2025 में देश भर के 51,740 स्थानों पर संघ की शाखाएं लगती थीं, जो साल 2026 में बढ़कर 55,683 स्थानों तक पहुंच गई हैं।
- कुल दैनिक शाखाएं: साल 2025 में कुल शाखाओं की संख्या 83,139 थी, जो साल 2026 में बढ़कर 88,949 हो गई है।
- साप्ताहिक मिलन: साल 2025 में मिलन केंद्रों की संख्या 32,147 थी, जो साल 2026 में बढ़कर 32,606 तक पहुंच गई है।
- मासिक मंडली: साल 2025 में मंडलियों की संख्या 12,091 थी, जो साल 2026 में बढ़कर 13,211 के आंकड़े को छू चुकी है।
https://www.indiatv.in/india/national/rss-expanding-rapidly-over-30-000-new-members-in-two-months-2026-07-06-1229517