भारत के विभिन्न हिस्सों में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक, बादलों की गर्जना और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली देश की शीर्ष संस्था, IMD ने चेतावनी दी है कि अगले 72 घंटे देश के कई राज्यों के लिए बेहद संवेदनशील और खतरनाक साबित हो सकते हैं। इस दौरान देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड-तोड़ बारिश होने की आशंका जताई गई है, जिसके मद्देनजर प्रशासन को पूरी तरह से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मानसून अपनी पूरी ताकत के साथ सक्रिय है। देश के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का संकट मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे बहुत जरूरी न होने पर यात्रा करने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
पहाड़ी इलाकों में आफत: उत्तराखंड और हिमाचल में ऑरेंज अलर्ट
पहाड़ी राज्यों में मानसून की शुरुआत के साथ ही भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है। IMD के जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. शशि कांत ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत के पर्वतीय क्षेत्रों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में रविवार को मूसलाधार बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इन दोनों राज्यों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।
मौसम विभाग ने विशेष रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए सोमवार को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश की वजह से पहाड़ी रास्तों पर पत्थर गिरने और भूस्खलन होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग और संपर्क मार्ग बंद होने की पूरी आशंका है। नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
मैदानी राज्यों में बढ़ेगी मुश्किल: राजस्थान में मानसून का अंतिम चरण
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों में भी मानसून की बारिश आफत बनकर बरस सकती है। पूर्वी राजस्थान में आज से ही बादलों की आवाजाही और बारिश की तीव्रता में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों तक इस क्षेत्र में बहुत भारी बारिश का दौर बना रहेगा। इस मूसलाधार बारिश के चलते शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और स्थानीय नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर आ सकता है।
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून अब देश के लगभग हर कोने में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। केवल राजस्थान के कुछ सीमित इलाके ही बचे हैं जहां अभी मानसून का पहुंचना बाकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले तीन दिनों के भीतर इन बचे हुए हिस्सों में भी मानसून की प्रगति हो जाएगी, जिसके बाद पूरे देश में एक साथ मानसून का व्यापक असर देखने को मिलेगा।
पश्चिमी तट पर महासंकट: मुंबई और महाबलेश्वर में रिकॉर्ड बारिश
इस समय देश का पश्चिमी तटीय क्षेत्र मानसून की सबसे भीषण मार झेल रहा है। गुजरात, सौराष्ट्र, तटीय महाराष्ट्र, तटीय कर्नाटक और केरल में अगले कुछ दिनों तक मूसलाधार से लेकर अत्यंत भारी बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों को सचेत करने के लिए मौसम विभाग ने गुजरात, तटीय महाराष्ट्र और तटीय कर्नाटक के लिए अत्यंत गंभीर श्रेणी का रेड अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में कुछ जगहों पर 21 सेंटीमीटर से भी अधिक बारिश दर्ज होने का अनुमान है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और इसके उपनगरीय इलाकों में बीते 24 घंटों के भीतर ही 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है, जिससे कई स्थानों पर यातायात पूरी तरह चरमरा गया है। इसके अलावा, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों, जिनमें पुणे और महाबलेश्वर शामिल हैं, वहां भी बादलों ने जमकर तबाही मचाई है। महाबलेश्वर के कुछ पहाड़ी हिस्सों में तो 40 से 50 सेंटीमीटर तक की अविश्वसनीय बारिश दर्ज की गई है। इतनी भारी बारिश की वजह से इन इलाकों के सामान्य जनजीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है और सड़कों ने तालाब का रूप ले लिया है।
मध्य भारत में निम्न दबाव का क्षेत्र: छत्तीसगढ़ में रेड अलर्ट की घोषणा
मौसम की इस भीषण स्थिति के पीछे मध्य भारत के ऊपर बना एक मौसमी सिस्टम भी जिम्मेदार है। दक्षिणी झारखंड और उसके पड़ोसी राज्यों के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो गया है। इस डिप्रेशन के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक अत्यधिक भारी वर्षा होने की पूरी संभावना है, जिसके कारण मौसम विभाग ने राज्य के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराने और राहत शिविरों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं ताकि अचानक आने वाली बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटा जा सके।
इसके साथ ही, पूर्वी मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों, विशेषकर वाराणसी और प्रयागराज में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए भी बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य भारत में मानसून फिलहाल अपने सबसे सक्रिय और आक्रामक चरण में है, जिसके प्रभाव से अगले 24 घंटों के दौरान गुजरात से लेकर ओडिशा तक के एक बहुत बड़े भूभाग में व्यापक और मूसलाधार बारिश दर्ज की जाएगी।
नागरिकों के लिए मौसम विभाग की विशेष एडवाइजरी
हालात को देखते हुए IMD ने आम जनता से बेहद सतर्क रहने की अपील की है। मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- नागरिक मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली चेतावनियों और अपडेट्स पर लगातार नजर रखें।
- शहरी इलाकों में जलभराव वाली सड़कों और सबवे से दूर रहें, क्योंकि वहां पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है।
- नदियों, नहरों और बरसाती नालों के पास जाने या उन्हें पार करने का प्रयास बिल्कुल न करें।
- पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटक मौसम की स्थिति को देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करें।
- किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्थानीय आपदा प्रबंधन विभाग या पुलिस को सूचित करें और उनके निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।
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