बिहार की राजनीति में राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब केवल एक सामान्य सीट की जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह से एक बड़ी सियासी साख और प्रतिष्ठा का मुकाबला बन चुका है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर उर्फ पीके के इस सीट से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा ने इस पूरे चुनावी परिदृश्य को अचानक बेहद रोमांचक और हाई-प्रोफाइल बना दिया है। इस बड़ी रणनीतिक चुनौती का मजबूती से मुकाबला करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने इस पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी के भीतर उम्मीदवारों को लेकर बेहद गंभीर मंथन का दौर शुरू हो चुका है और इस रेस में तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं जिन पर केंद्रीय नेतृत्व अंतिम मुहर लगा सकता है।
बांकीपुर सीट पर भाजपा का महामंथन और कोर कमेटी की बैठक
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है, जिसके साथ ही राजनीतिक हलचल भी चरम पर पहुंच गई है। भाजपा ने अपने इस मजबूत किले को सुरक्षित रखने के लिए सांगठनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में भाजपा की कोर कमेटी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर लगभग एक घंटे तक बहुत गहराई से चर्चा की गई।
प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने के फैसले ने भाजपा के लिए चुनौती को काफी बढ़ा दिया है। राजनीतिक सरगर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को जैसे ही प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की घोषणा हुई, उसके तुरंत बाद ही सीएम सम्राट चौधरी सीधे पूर्व सीएम नीतीश कुमार से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंच गए। इसके बाद सीएम सम्राट चौधरी की उपस्थिति में भाजपा की उच्च स्तरीय कोर कमेटी की बैठक हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल, पूर्व मंत्री राधामोहन सिंह, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय, सांसद डॉ. संजय जायसवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया जैसी बड़ी राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।
चूंकि बांकीपुर सीट से लगातार जीत दर्ज करने वाले और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद इस्तीफा देने से यह सीट खाली हुई है, इसलिए यह साफ है कि यहां पार्टी का नया चेहरा तय करने में उनकी राय सबसे महत्वपूर्ण होगी। पार्टी की पुरानी परंपरा के अनुसार, उम्मीदवारों का अंतिम चयन केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा, लेकिन राज्य स्तर पर तीन संभावित नामों की सूची को बेहद मजबूत माना जा रहा है और इसी सप्ताह पार्टी उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा होने की पूरी उम्मीद है।
टिकट की रेस में सबसे आगे चल रहे तीन बड़े चेहरे
भाजपा बांकीपुर सीट पर एक ऐसे ‘जिताऊ और टिकाऊ’ उम्मीदवार की तलाश में है जो प्रशांत किशोर की रणनीतिक और बौद्धिक चुनौती का डटकर मुकाबला कर सके। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अभी तक किसी एक नाम पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन निम्नलिखित तीन नेताओं के नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं:
1. प्रो. रणवीर नंदन: प्रबुद्ध छवि और गहरी सांगठनिक पकड़
प्रो. रणवीर नंदन बिहार की राजनीति में एक बेहद सुशिक्षित, प्रबुद्ध और प्रखर वक्ता के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में कई महत्वपूर्ण बिंदु जाते हैं:
- वे पूर्व में जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता और बिहार विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं, जिसके बाद वे भाजपा में शामिल हुए थे।
- जदयू और भाजपा दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच उनके बेहद अच्छे संबंध हैं, जो इस चुनाव में एक बड़ा सकारात्मक पहलू साबित हो सकता है।
- पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर होने के नाते शहरी मतदाताओं, विशेष रूप से युवाओं, छात्रों और बुद्धिजीवी वर्ग के बीच उनकी बहुत गहरी पैठ है।
- जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को बेहद सरल और तार्किक भाषा में जनता के समक्ष रखने की उनकी कला उन्हें एक बेहद गंभीर उम्मीदवार बनाती है। इसके साथ ही सवर्ण मतदाताओं के बीच भी उनकी मजबूत पकड़ है।
2. नील रतन घोष: जमीनी स्तर पर सक्रिय और लोकप्रिय कार्यकर्ता
नील रतन घोष भाजपा के उन समर्पित नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अपना पूरा राजनीतिक जीवन एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में बिताया है। उनकी ताकत निम्नलिखित बातों में निहित है:
- वे बांकीपुर और पटना के शहरी क्षेत्रों में स्थानीय कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ हमेशा सीधे संपर्क में रहते हैं।
- संगठन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और बूथ स्तर पर बेहद मजबूत पकड़ के कारण पार्टी उन्हें एक बेहद विश्वसनीय चेहरा मानती है।
- नील रतन घोष का स्थानीय होना और आम मतदाताओं के लिए हर समय आसानी से उपलब्ध रहना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यह खूबी चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की सत्ता विरोधी लहर को बेअसर करने में मददगार हो सकती है।
- वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बेहद करीबी और विश्वसनीय सहयोगियों में गिने जाते हैं, जो उनकी दावेदारी को और अधिक मजबूती देता है।
3. डॉ. अजय आलोक: राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित और बेबाक प्रवक्ता
डॉ. अजय आलोक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और टेलीविजन डिबेट्स के माध्यम से देश भर में एक बेहद लोकप्रिय चेहरा बन चुके हैं। उनकी उम्मीदवारी के पक्ष में ये बातें कही जा रही हैं:
- पेशे से चिकित्सक रहे डॉ. अजय आलोक देश और राज्य की नीतियों पर अपनी बेबाक, तार्किक और आक्रामक राय रखने के लिए प्रसिद्ध हैं।
- सोशल मीडिया और मुख्यधारा के राष्ट्रीय मीडिया में लगातार सक्रिय रहने के कारण बांकीपुर जैसे पढ़े-लिखे, संभ्रांत और वीआईपी शहरी निर्वाचन क्षेत्र में उनकी ब्रांड वैल्यू काफी ऊंची है।
- प्रशांत किशोर जैसी बड़ी रणनीतिक चुनौती का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले डॉ. अजय आलोक के नाम पर पार्टी के भीतर बहुत गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
एक और उभरता हुआ नाम: आशीष कुमार सिन्हा
इन तीन सबसे प्रमुख नामों के अलावा, एक और नाम राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा में आया है, वह है आशीष कुमार सिन्हा का। उनकी पहचान केवल बांकीपुर के पूर्व विधायक अरुण कुमार सिन्हा के पुत्र के रूप में ही नहीं है, बल्कि उनकी अपनी एक अलग राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी है।
आशीष कुमार सिन्हा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी सक्रिय राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। वे पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्होंने छात्र राजनीति में अपनी मजबूत नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है। इसके अतिरिक्त, वे राज्य स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी भी रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय युवाओं और खेल प्रेमियों के बीच उनकी एक बेहद लोकप्रिय और विशिष्ट पहचान है। युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भाजपा उनके नाम पर भी विचार कर सकती है।
नितिन नवीन की पारंपरिक सीट और प्रतिष्ठा की लड़ाई
बांकीपुर विधानसभा सीट का इतिहास पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में रहा है। इस सीट पर लंबे समय से नितिन नवीन का दबदबा रहा है। उनके राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद इस सीट से इस्तीफा देने के कारण ही यह उपचुनाव हो रहा है। चूंकि यह सीट नितिन नवीन की पारंपरिक सीट मानी जाती रही है, इसलिए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि बांकीपुर में पार्टी का अगला चेहरा कौन होगा, यह पूरी तरह से राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति और मर्जी पर ही निर्भर करेगा।
महागठन के खेमे में सस्पेंस और आगे की राह
जहां एक तरफ भाजपा उम्मीदवारों के चयन के लिए लगातार बैठकें कर रही है और जनसुराज की ओर से प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन के खेमे में अभी भी पूरी तरह से सस्पेंस बना हुआ है। आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन ने अभी तक इस सीट को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन के भीतर भी इस सीट पर उम्मीदवारी को लेकर लगातार मंथन और आपसी खींचतान जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष बांकीपुर में किसी ऐसे मजबूत चेहरे को मैदान में उतारने की योजना बना रहा है जो भाजपा के मजबूत सवर्ण और शहरी वोट बैंक में सेंध लगा सके और साथ ही जनसुराज के बढ़ते प्रभाव को भी रोक सके।
नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर पटना का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस उपचुनाव के नतीजे और मुकाबले का स्वरूप पूरे बिहार को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का काम करेगा। यदि इस सीट पर मुकाबला भाजपा और प्रशांत किशोर के बीच सीधा होता है, तो इसके परिणाम राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
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