देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की तारीख आई सामने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन; जानें किराया, रूट और रफ्तार से जुड़ी हर बड़ी बात

हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन आगामी 17 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली पर्यावरण-अनुकूल ट्रेन के संचालन की आधिकारिक तिथि की घोषणा कर दी गई है। हरियाणा के जींद जिले से इस ऐतिहासिक ट्रेन की शुरुआत होने जा रही है। आगामी 17 जुलाई को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वाकांक्षी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस बड़े कार्यक्रम को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। इस सिलसिले में नॉर्दर्न रेलवे के महाप्रबंधक राजेश पांडे ने जींद जंक्शन रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण किया और चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। इसके साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी सोमवार को तैयारियों की समीक्षा करने के लिए जींद पहुंचे हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर स्थानीय प्रशासन और रेलवे विभाग दोनों ही पूरी तरह से सतर्क और सक्रिय नजर आ रहे हैं।

जींद स्टेशन का हो रहा है पुनर्विकास

जींद रेलवे स्टेशन को बेहद आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है ताकि यात्रियों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिल सकें। नॉर्दर्न रेलवे के महाप्रबंधक राजेश पांडे ने अपने निरीक्षण के दौरान स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों को बहुत बारीकी से देखा और वहां मौजूद अधिकारियों को काम समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमृत भारत योजना के अंतर्गत जींद स्टेशन को एक नया, आधुनिक और बेहद खूबसूरत रूप दिया गया है। यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्टेशन पर कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • यात्रियों के सुगम आवागमन के लिए आधुनिक लिफ्ट और एस्केलेटर की व्यवस्था।
  • स्टेशन परिसर में आवाजाही को आसान बनाने के लिए नई सीढ़ियों का निर्माण।
  • एक आलीशान और बेहद भव्य स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण कार्य।
  • यात्रियों के विश्राम के लिए आधुनिक वेटिंग लाउंज और बड़ा कॉनकोर्स एरिया।

महाप्रबंधक ने निर्माण कार्यों की सराहना की और इसे भविष्य में और अधिक उन्नत बनाने की बात कही। रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगने वाले जाम और संकरी सड़क के विषय पर उन्होंने कहा कि रेलवे सीमा के भीतर की सड़कें और प्रवेश द्वार पूरी तरह से दुरुस्त हैं। हालांकि, बाहरी संकरे क्षेत्र में यातायात को सुगम बनाने के लिए रेलवे जल्द ही स्थानीय जिला प्रशासन से तालमेल स्थापित करेगा ताकि स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ट्रेन का रूट, किराया और सफर का समय

इस हाइड्रोजन ट्रेन के शुरू होने से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यात्रियों के समय और पैसे की भी भारी बचत होगी। हरियाणा के डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्ढा ने इस योजना की पुष्टि करते हुए बताया कि देश की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चलाई जाएगी। इस रूट से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • दूरी और रूट: जींद से सोनीपत के बीच की कुल दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। इस सफर के दौरान ट्रेन कुल छह स्टेशनों पर रुकेगी।
  • रफ्तार: इस आधुनिक ट्रेन की शुरुआती रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। हालांकि, बाद में यह ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की शानदार रफ्तार से दौड़ने में सक्षम होगी।
  • समय की बचत: वर्तमान में जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली DMU ट्रेन इस सफर को तय करने में लगभग दो घंटे का समय लेती है। सड़क मार्ग से भी इस दूरी को पूरा करने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। लेकिन इस नई हाइड्रोजन ट्रेन के जरिए यह सफर मात्र एक घंटे में पूरा हो जाएगा।
  • किराया: यात्रियों की जेब का ध्यान रखते हुए इसका किराया बेहद किफायती रखा गया है। इस सफर के लिए न्यूनतम किराया मात्र पांच रुपये और अधिकतम किराया केवल 25 रुपये तय किया गया है।
  • यात्री क्षमता: इस ट्रेन में एक बार में लगभग 2500 लोगों के सफर करने की विशाल क्षमता है।

तकनीक और लागत

इस बेहद आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेन को तैयार करने में भारी-भरकम बजट खर्च किया गया है। रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अनूठी ट्रेन को बनाने में कुल 89 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह एक हाइब्रिड ट्रेन होगी, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

  • ईंधन तकनीक: इस ट्रेन के इंजन में डीजल का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, इसमें विशेष फ्यूल सेल का इस्तेमाल होगा जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से ऊर्जा पैदा की जाएगी।
  • अक्षय ऊर्जा भंडारण: ट्रेन में ऊर्जा के संचयन के लिए आधुनिक अक्षय ऊर्जा भंडारण प्रणाली जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटर लगाए गए हैं।
  • डिब्बों की संख्या: यह ट्रेन पूरी तरह से आधुनिक होगी और इसमें कुल आठ-दस डिब्बे होंगे।
  • पानी की आवश्यकता: इस ट्रेन के सुचारू संचालन के लिए प्रति घंटा लगभग 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी। इस पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए रेलवे स्टेशन की छतों पर गिरने वाले वर्षा के पानी को भी प्लांट तक पहुंचाने की विशेष व्यवस्था की गई है।

हाइड्रोजन ईंधन की आपूर्ति और ट्रायल

ट्रेन के संचालन को लेकर नॉर्दर्न रेलवे के महाप्रबंधक राजेश पांडे ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में यह हाइड्रोजन ट्रेन अपने ट्रायल यानी परीक्षण के चरण में है। जैसे ही इसके सारे तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो जाएंगे, ट्रेन के नियमित और पूर्ण संचालन को लेकर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।

ईंधन की उपलब्धता के सवाल पर उन्होंने जानकारी दी कि शुरुआत में आवश्यक मात्रा में हाइड्रोजन ईंधन को बाहर से मंगवाया जा रही है। हालांकि, रेलवे भविष्य के लिए बेहद गंभीर है और जींद में ही स्थानीय स्तर पर एक मजबूत बैकअप सिस्टम विकसित करने का प्रयास कर रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यदि कभी सड़क मार्ग से होने वाली हाइड्रोजन की आपूर्ति में कोई बाधा या व्यवधान आए, तो भी ट्रेन के पहिए न रुकें और इसका संचालन लगातार बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।

स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और पुराने वेटिंग एरिया को लेकर स्थानीय लोगों की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया कि यात्रियों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए पूरे क्षेत्र का पुनः आकलन करवाया जाएगा। इसके अलावा, व्यावसायिक और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर नई ट्रेनों के ठहराव की मांगों की भी समीक्षा की जाएगी।

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