बिहार के गोपालगंज में सांपों का तांडव: 72 घंटे में 6 लोगों की मौत, अंधविश्वास और इलाज में देरी बन रही जानलेवा

बिहार के गोपालगंज जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही जहरीले सांपों का कहर देखने को मिल रहा है, जहां पिछले 3 दिनों में सर्पदंश से 6 लोगों की जान चली गई है जबकि डॉक्टरों ने समय रहते 50 से अधिक मरीजों को बचा लिया है।

बिहार के गोपालगंज जिले में इन दिनों जहरीले सांपों का खौफ चरम पर है। मानसून की दस्तक के साथ ही यहां सर्पदंश के मामलों में अचानक भारी उछाल आया है। पिछले महज 72 घंटे के भीतर सांप के काटने से 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इसी अवधि में स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 50 से अधिक लोगों की जान समय पर इलाज देकर बचा ली है।

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अस्पताल में हर दिन सर्पदंश के शिकार 12 से 15 नए मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि इन मौतों के पीछे मुख्य वजह अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी और घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवाना है।

गंडक तटीय इलाकों में खौफ का माहौल, मासूम और महिलाएं बनीं शिकार

गोपालगंज जिले में लगातार हो रही मौतों ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले तीन दिनों में जिन छह लोगों की मौत हुई है, उनमें 3 बच्चे और 3 महिलाएं शामिल हैं। इस आंकड़े ने प्रशासन की भी चिंता बढ़ा दी है। जिले के गंडक नदी से सटे ग्रामीण इलाकों में सांपों का सबसे अधिक प्रकोप देखा जा रहा है। बारिश का मौसम शुरू होते ही इन तटीय और निचले क्षेत्रों में पानी भरने लगता है, जिसके कारण बिलों में रहने वाले जहरीले सांप सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों और घरों का रुख करने लगते हैं।

पीड़ितों के परिजनों के मुताबिक, सांप के डसने के बाद आनन-फानन में सभी को सदर अस्पताल लाया गया था, लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई अत्यधिक देरी के कारण जहर उनके पूरे शरीर में फैल चुका था और डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।

अंधविश्वास और झाड़-फूंक पड़ रही जिंदगी पर भारी

सदर अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। गोपालगंज के जिला अधिकारी (डीएम) समीर सौरव ने भी आम जनता से बेहद सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर सांप के काटने के बाद घबरा जाते हैं और तांत्रिकों या ओझाओं के पास झाड़-फूंक कराने के लिए चले जाते हैं। इस अंधविश्वास के कारण बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता है, जो मरीज की मौत का सबसे बड़ा कारण बनता है।

प्रशासन ने स्पष्ट रूप से निर्देश जारी किए हैं कि सांप के डसने की स्थिति में झाड़-फूंक के चक्कर में रत्ती भर भी समय गंवाए बिना मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल ले जाएं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि अगर मरीज को समय पर अस्पताल लाया जाता है, तो एंटी स्नेक वेनम देकर उसकी जान आसानी से बचाई जा सकती है। हाल ही में ठीक हुए 50 से अधिक मरीज इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि समय पर मिला सही इलाज ही जीवन रक्षक है।

बिहार में सर्पदंश की भयावह स्थिति: पिछले साल के आंकड़े

गोपालगंज और समूचे बिहार में सर्पदंश की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन इस साल मानसून की शुरुआत में ही इसके मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्ष 2025 में पूरे बिहार में सांप के डसने के 4 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में लगभग 250 लोगों की मौत हो गई थी।

स्वास्थ्य विभाग के विश्लेषण के अनुसार, सर्पदंश के सबसे अधिक मामले उत्तर बिहार के जिलों और विशेष रूप से गंडक-कोसी नदी क्षेत्र के इलाकों से दर्ज किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस गंभीर समस्या से निपटने का एकमात्र प्रभावी उपाय व्यापक सामाजिक जागरूकता, अंधविश्वास पर अंकुश और चिकित्सा सुविधाओं तक मरीजों की त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।

डॉक्टरों की सलाह: मानसून के दौरान इस तरह रखें अपना ख्याल

मानसून के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं से बचने के लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कुछ बेहद जरूरी और व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका पालन करके ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग खुद को सुरक्षित रख सकते हैं:

  • खेतों में काम करते समय सावधानी: किसान और मजदूर जब भी खेतों, झाड़ियों या जलजमाव वाले क्षेत्रों में जाएं, तो हमेशा लंबे जूते (गमबूट) और मोटे कपड़े पहनें।
  • रोशनी का उपयोग: रात के समय घर से बाहर निकलते समय या अंधेरे कमरों में जाते वक्त हमेशा टॉर्च या मोबाइल की रोशनी का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करें।
  • साफ-सफाई का ध्यान: अपने घरों के आसपास उगी झाड़ियों और घास-फूस की नियमित कटाई-छंटाई करें। घर के आसपास कूड़ा-कचरा या लकड़ियों के ढेर जमा न होने दें, क्योंकि यह सांपों के छिपने के पसंदीदा स्थान होते हैं।
  • बिस्तरों की जांच: जमीन पर सोने से बचें। यदि जमीन पर सोना मजबूरी हो, तो मच्छरदानी का उपयोग जरूर करें और सोने से पहले बिस्तर को अच्छी तरह झाड़ लें।
  • अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था: जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आश्वस्त किया है कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अनुमंडलीय अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त खुराक उपलब्ध है। अस्पताल में इस जीवन रक्षक दवा की कोई कमी नहीं है।

सांप का काटना कोई लाइलाज समस्या नहीं है, बशर्ते वैज्ञानिक सोच अपनाई जाए और समय पर सही डॉक्टर की मदद ली जाए। गोपालगंज प्रशासन लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में लाउडस्पीकर और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है ताकि इस मानसून में सर्पदंश से होने वाली मौतों के आंकड़ों को न्यूनतम किया जा सके।

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