श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे और दान राशि विवाद पर होगी चर्चा

अयोध्या में आज दोपहर 3 बजे राम मंदिर ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के साथ-साथ दान-पात्रों से जुड़ी एसआईटी रिपोर्ट पर बड़ा फैसला हो सकता है।

अयोध्या में आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। दोपहर 3 बजे होने वाली इस बैठक में कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए जाने की उम्मीद है। इस बैठक का सबसे प्रमुख मुद्दा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र के त्यागपत्र पर विचार करना होगा। दान राशि में कथित हेराफेरी और चोरी के विवाद के बाद इन दोनों पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिस पर आज अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

इसके साथ ही, राम मंदिर के दान-पात्रों से मिली धनराशि के हिसाब-किताब को लेकर गठित की गई विशेष जांच टीम यानी एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट भी इस बैठक में ट्रस्ट के सामने पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट पर गहन चर्चा होने की संभावना है।

कैसा है ट्रस्ट का प्रशासनिक ढांचा और नियंत्रण?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक पूरी तरह से स्वतंत्र संस्था है, जिस पर केंद्र सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार का कोई सीधा नियंत्रण नहीं है। ट्रस्ट से जुड़े सभी बड़े और नीतिगत फैसले इसके स्थायी ट्रस्टी आपस में चर्चा करके ही लेते हैं। इस ट्रस्ट का गठन नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद, फरवरी 2020 में किया गया था। आज की इस बैठक में महासचिव चंपत राय और डॉक्टर अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर ट्रस्ट के स्थायी सदस्य फैसला करेंगे।

नियमों के अनुसार, ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान है, लेकिन विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद यह सीट खाली होने के कारण वर्तमान में केवल 14 सदस्य ही सक्रिय हैं। इनमें से 4 पदेन सदस्य हैं, जिन्हें बैठक में मतदान करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। यद्यपि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि इस ट्रस्ट में शामिल हैं, लेकिन वे प्रशासनिक निर्णयों में वोट नहीं डाल सकते। आज की बैठक में ट्रस्ट के इस मौजूदा ढांचे में बड़े बदलावों को लेकर भी विमर्श हो सकता है।

बैठक की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिकाएं

ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, इसकी बैठक हर तीन महीने में एक बार आयोजित की जानी अनिवार्य है। इससे पिछली बैठक 21 मार्च को आयोजित हुई थी, जिसमें रामनवमी के भव्य आयोजनों की तैयारियों पर मंथन किया गया था। जो सदस्य आज अयोध्या में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाएंगे, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डिजिटल रूप से इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बनेंगे।

मंदिर निर्माण के कार्यों की बात करें तो जनवरी 2021 से गोपाल नागरकट्टे (राव) निर्माण कार्य की बारीकियों की देखरेख कर रहे हैं, जो ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि ट्रस्ट के पहले अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास बने थे, जबकि चंपत राय को महासचिव और गोविंद गिरी महाराज को कोषाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया था। इसके अलावा, पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व में दलित नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद खाली हुए स्थान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में जगह दी गई थी।

ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक अधिकारों की व्यवस्था काफी सख्त है। आमंत्रित सदस्यों को सलाह देने का अधिकार तो है, लेकिन वे किसी फैसले पर मतदान नहीं कर सकते। वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत केवल चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल नागरकट्टे के पास ही मंदिर की आरती पास और वीआईपी पास जारी करने सहित सभी बड़े प्रशासनिक अधिकार सुरक्षित रहे हैं। अब देखना होगा कि इस्तीफों के बाद यह जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है, क्योंकि ट्रस्ट में किसी नए स्थायी सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा स्थायी सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है।

ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य और उनकी भूमिकाएं

ट्रस्ट की मुख्य निर्णय लेने वाली समिति में देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख संत और गणमान्य नागरिक शामिल हैं, जिनकी सूची इस प्रकार है:

  • गोविंद गिरि महाराज: पुणे के प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु, जो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में समस्त वित्तीय मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
  • स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती: प्रयागराज के प्रसिद्ध ज्योतिष पीठ के पूज्य शंकराचार्य।
  • स्वामी विश्वप्रशन्नतीर्थ जी महाराज: कर्नाटक के उडुपी में स्थित ऐतिहासिक पेजावर मठ के 33वें प्रमुख।
  • युगपुरुष परमानंद गिरि महाराज: हरिद्वार क्षेत्र के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और वरिष्ठ आध्यात्मिक संत।
  • महंत दिनेंद्र दास: अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ प्रमुख संत, जो मूल मंदिर विवाद मामले में एक मुख्य पक्षकार के तौर पर जुड़े रहे हैं।
  • कृष्ण मोहन: दिवंगत दलित नेता कामेश्वर चौपाल के देहावसान के बाद ट्रस्ट में शामिल किए गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता।
  • के पारासरन: देश के प्रतिष्ठित कानूनविद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता।

नियमों के तहत, प्रशासनिक प्रतिनिधियों (पदेन सदस्यों) के पास कोई वोटिंग अधिकार न होने के कारण ट्रस्ट का पूरा नियंत्रण और बागडोर पूरी तरह से इसके स्थायी सदस्यों के हाथों में ही केंद्रित रहती है। चाहे नया ट्रस्टी नियुक्त करना हो या फिर प्रशासनिक व्यवस्था में कोई बड़ा फेरबदल करना हो, स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत का समर्थन मिलना सबसे आवश्यक शर्त है।

आज की बैठक के 5 सबसे बड़े एजेंडे

आज दोपहर को होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित पांच बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी और निर्णय लिए जाएंगे:

  1. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लेना।
  2. मंदिर के दान-पात्रों से प्राप्त होने वाली विशाल धनराशि की गिनती और प्रबंधन को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा तैयार की गई अंतरिम रिपोर्ट का अध्ययन और चर्चा।
  3. भविष्य में मंदिर के दैनिक प्रबंधन और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए नई कार्ययोजना बनाना।
  4. ट्रस्ट के भीतर रिक्त पड़े महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए नए चेहरों और नामों पर गंभीरता से विचार करना।
  5. अध्यक्ष की विशेष अनुमति प्राप्त कर अन्य महत्वपूर्ण और तात्कालिक विषयों पर निर्णय लेना।

https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/a-meeting-of-the-shri-ram-janmabhoomi-teerth-kshetra-trust-will-be-held-today-the-resignations-of-champat-rai-and-anil-mishra-will-be-considered-2026-07-06-1229431