छत पर उगाई गई हरी मिर्च में क्यों कम होता है तीखापन? जानें इसका मुख्य कारण और पैदावार बढ़ाने के आसान उपाय

घर की छत पर गमलों में उगाई जाने वाली मिर्च का तीखापन अक्सर कम हो जाता है। कृषि विशेषज्ञों ने इसके पीछे सीमित पोषक तत्वों को मुख्य वजह बताते हुए सरसों की खली और सही देखरेख जैसे कारगर उपाय साझा किए हैं।

आजकल शहरी क्षेत्रों में घर की छत या बालकनी में बागवानी करने का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। लोग अपने घरों की छतों पर गमलों में हरी मिर्च, टमाटर और धनिया जैसी दैनिक उपयोग की सब्जियां उगाना पसंद करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है कि उनकी छत पर उगाई गई हरी मिर्च में वह तीखापन नहीं होता, जो बाजार से खरीदी गई या खेतों में उगी मिर्च में होता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? आइए जानते हैं कृषि विशेषज्ञों की इस पर क्या राय है और इस समस्या को किस तरह दूर किया जा सकता है।

गमलों में उगाई जाने वाली मिर्च का तीखापन कम होने की मुख्य वजह

भागलपुर के पौधा संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल के अनुसार, घर की छत पर या गमलों में उगाई जाने वाली मिर्च के कम तीखे होने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं। हालांकि मिर्च का तीखापन उसकी किस्म पर भी निर्भर करता है, लेकिन सबसे प्रमुख कारण पौधों को मिलने वाले पोषक तत्वों की कमी है।

खेत की खुली मिट्टी में मिर्च के पौधों को प्राकृतिक रूप से सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मिल जाते हैं, जिससे मिर्च का स्वाद और उसका तीखापन बरकरार रहता है। इसके विपरीत, जब हम छत पर किसी गमले या छोटे कंटेनर में पौधा लगाते हैं, तो वहां मिट्टी सीमित मात्रा में होती है। इस सीमित मिट्टी के कारण पौधों को पर्याप्त और संतुलित पोषण नहीं मिल पाता, जिससे मिर्च का तीखापन अपेक्षाकृत कम हो जाता है।

तीखापन बढ़ाने के लिए अपनाएं यह आसान उपाय

यदि आप चाहते हैं कि आपके घर की छत पर लगी मिर्च भी बाजार जैसी तीखी और स्वादिष्ट हो, तो पौधों को संतुलित मात्रा में पोषण देना बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको किसी महंगे या रासायनिक खाद की आवश्यकता नहीं है। आप नियमित रूप से सरसों की खली का उपयोग कर सकते हैं। सरसों की खली को पानी में भिगोकर उसका तरल घोल पौधों में डालने से पौधों का विकास तेजी से होता है और मिर्च के स्वाद व तीखेपन में भी उल्लेखनीय सुधार आता है।

बेहतर मुनाफे के लिए मिर्च की इन उन्नत किस्मों की करें खेती

बिहार में बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका कृषि पर आधारित है। पारंपरिक फसलों में लागत बढ़ने और मुनाफे में कमी आने के कारण अब किसान हरी मिर्च जैसी सब्जियों की आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान बेमौसम या उस समय हरी मिर्च की खेती करें जब बाजार में इसकी आवक कम हो, तो वे बहुत अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

भागलपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की जलवायु को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने कुछ उन्नत किस्मों की सिफारिश की है, जो इस प्रकार हैं:

  • VNR-332: इस किस्म के पौधे काफी मजबूत होते हैं और इसकी मिर्च का आकार बड़ा और आकर्षक होता है।
  • BSS-453: यह किस्म अधिक पैदावार के लिए जानी जाती है और इसके फल काफी वजनदार होते हैं।
  • Kashi Gaurav-338: स्थानीय जलवायु के अनुकूल यह किस्म बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है।

इन उन्नत किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके फल दिखने में सुंदर, आकार में बड़े और भारी होते हैं। इसके कारण प्रति पौधा उत्पादन बहुत अधिक मिलता है। साथ ही, इनकी भंडारण क्षमता भी काफी अच्छी होती है, जिससे फसलों को मंडी तक ले जाने के दौरान खराब होने का खतरा बहुत कम रहता है और किसानों को फसल की बेहतर कीमत मिलती है।

फंगल संक्रमण और घातक वायरस से फसल को बचाना बड़ी चुनौती

हरी मिर्च की खेती में सबसे बड़ी रुकावट कीटों और विभिन्न रोगों का प्रकोप है, जिसके डर से कई किसान इसकी खेती करने से कतराते हैं। मिर्च की फसल में फंगल इन्फेक्शन और वायरस का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। यदि सही समय पर इन बीमारियों की रोकथाम न की जाए, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पौधा संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल ने बताया कि मिर्च की खेती में येलो मोजेक वायरस सबसे खतरनाक रोगों में से एक माना जाता है। इस वायरस के प्रभाव से पौधों का विकास पूरी तरह से रुक जाता है, पत्तियां पीली पड़कर सिकुड़ जाती हैं और उत्पादन में भारी गिरावट आती है। कई मामलों में तो यह वायरस पूरी की पूरी फसल को नष्ट कर देता है।

फसल सुरक्षा और कीट नियंत्रण के असरदार उपाय

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरी मिर्च की फसल को इन घातक रोगों और कीटों से सुरक्षित रखने के लिए नियमित रूप से पौधों की निगरानी करनी चाहिए। कीटों और वायरस के प्रसार को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं:

  • नीम के तेल का छिड़काव: पौधों पर नियमित अंतराल पर नीम के तेल का छिड़काव करने से हानिकारक कीट दूर रहते हैं।
  • स्टिकी ट्रैप का प्रयोग: खेतों या गमलों के आसपास पीले चिपचिपे कार्ड लगाने से उड़ने वाले कीटों को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
  • अनुशंसित कीटनाशक: यदि संक्रमण अधिक हो, तो विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई कीटनाशकों की नियंत्रित मात्रा का उपयोग करना चाहिए, जिससे वायरस फैलाने वाले कीटों पर काबू पाया जा सके।

संक्षेप में कहें तो, यदि सही किस्म का चयन किया जाए, पौधों को पर्याप्त पोषण दिया जाए और समय पर रोग व कीट नियंत्रण के उपाय अपनाए जाएं, तो कम जगह में भी हरी मिर्च की खेती से बंपर पैदावार और शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है।

https://hindi.news18.com/news/agriculture/why-rooftop-grown-chillies-less-spicy-experts-reveal-the-reason-and-solutions-local18-10630548.html