चिलचिलाती धूप में करिश्मा: पश्चिम चंपारण के किसानों ने 43 डिग्री तापमान में उगाए सेब

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में तापमान 43 डिग्री पहुंचने के बावजूद किसानों ने सेब की सफल बागवानी की है। वे विशेष रूप से विकसित की गई HRMN 99 किस्म के जरिए इस असंभव काम को संभव बना रहे हैं।

आमतौर पर सेब की खेती का नाम आते ही हमारे दिमाग में कश्मीर, हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड के ठंडे मौसम और बर्फबारी की तस्वीर उभरती है। लेकिन अब बिहार के किसानों ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। बिहार के सबसे बड़े जिले, पश्चिम चंपारण में तापमान जब भीषण गर्मी के दौरान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब भी यहां के बागों में सेब के पेड़ लहलहा रहे हैं। जिले के कई प्रगतिशील किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक सूझबूझ से इस गर्म जलवायु में भी सेब की सफल बागवानी करके सबको हैरान कर दिया है। यहां न सिर्फ पेड़ तेजी से बढ़ रहे हैं, बल्कि उनमें लाल-हरे रंग के बड़े और बेहद मीठे सेब भी लग रहे हैं।

मझौलिया के रविकांत पांडे: छत पर रखे गमले में उगाए सेब

इस अनोखी बागवानी की शुरुआत करने वालों में सबसे पहला नाम मझौलिया प्रखंड के बनकट मुसहरी गांव के रहने वाले किसान रविकांत पांडे का आता है। रविकांत पिछले लगभग तीन वर्षों से सेब की बागवानी कर रहे हैं। वे बिहार के उन चुनिंदा किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने इस गर्म राज्य में सेब उगाने का सबसे पहला प्रयास किया और उसमें बड़ी सफलता हासिल की। रविकांत की लगन और प्रयोगशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने जमीन के अलावा अपने घर की छत पर रखे गमलों में भी सेब के पौधे उगाए हैं और उनमें शानदार फल भी आए हैं।

नौतन के शिशिर दूबे: तीन एकड़ में व्यावसायिक खेती का बड़ा लक्ष्य

इसी तरह जिले के नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के निवासी शिशिर दूबे ने भी सेब की बागवानी में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने इसे एक छोटे प्रयोग तक सीमित रखने के बजाय बड़े पैमाने पर अपनाया है। शिशिर ने लगभग तीन एकड़ के विस्तृत बगीचे में सेब के सैकड़ों पौधे रोपे हैं, जिनमें इस साल बेहतरीन पैदावार हुई है। शिशिर का कहना है कि वे बिहार में सेब की बागवानी को केवल शौक के लिए नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसे पूरी तरह से व्यावसायिक रूप देना चाहते हैं। उनका संकल्प खुद को इस क्षेत्र में सेब के एक बड़े निर्यातक के रूप में स्थापित करने का है।

बेतिया के मेराजुल हक: मीठे और बड़े सेबों की सफल पैदावार

पश्चिम चंपारण के जिला मुख्यालय बेतिया के निवासी मेराजुल हक भी सेब की इस सफल बागवानी से जुड़ चुके हैं। उन्होंने लगभग तीन वर्ष पहले सेब के पौधे लगाकर उनकी देखभाल शुरू की थी। इस वर्ष उनके बगीचे में सेब का फलन शुरू हो चुका है। पेड़ पर लगे बड़े आकार के, सुंदर लाल और हरे रंग के मीठे सेबों को देखकर मेराजुल का उत्साह काफी बढ़ गया है। फल की गुणवत्ता को परखने के बाद उन्होंने भी अब बड़े पैमाने पर इसकी व्यावसायिक खेती करने का मन बना लिया है।

गर्म मौसम के लिए वरदान साबित हो रही है HRMN 99 किस्म

बिहार के भीषण गर्मी वाले इलाकों में सेब की इस अभूतपूर्व सफलता का राज एक विशेष किस्म में छिपा है। जिले के सफल किसानों का कहना है कि गर्म प्रदेशों में सेब उगाने के लिए सेब की HRMN 99 किस्म का चुनाव ही सबसे सटीक और जरूरी कदम है। उद्यान वैज्ञानिकों ने इसे विशेष रूप से गर्म वातावरण में जीवित रहने और फल देने के लिए ही तैयार किया है।

इस किस्म की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • यह किस्म 45 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी को भी आसानी से सहन कर सकती है।
  • पारंपरिक सेब की तुलना में इसके पौधों को जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए अत्यधिक ठंड या बर्फबारी की आवश्यकता नहीं होती।
  • इस किस्म के फल आकार में बड़े, दिखने में आकर्षक और स्वाद में मीठे होते हैं।
  • गर्म राज्यों के मौसम के अनुकूल होने के कारण इसके पौधों में बीमारियों का खतरा भी काफी कम रहता है।

पश्चिम चंपारण के इन प्रगतिशील किसानों ने साबित कर दिया है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और सही फसलों के चुनाव से किसी भी क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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