राजस्थान का अनोखा शिव मंदिर: यहां की एक रहस्यमयी गली करती है इंसान के पाप-पुण्य का फैसला, जानें इसकी पौराणिक कथा

राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित लीलाधारी महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जहां एक रहस्यमयी गली से होकर गुजरने पर इंसान के पाप और पुण्य का पता चलता है।

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने चमत्कारों और अनूठी परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत मंदिर राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित है। सिरोही के मंदार में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को लीलाधारी महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की महिमा इतनी अनोखी है कि यहां आने वाले भक्तों के पाप और पुण्य का फैसला एक छोटी सी गली करती है।

विशाल स्वयंभू शिवलिंग और रोगों को दूर करने वाला गमानिया कुंड

लीलाधारी महादेव मंदिर परिसर में आस्था के कई ऐसे केंद्र हैं जो श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर देते हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित 84 फीट का विशाल स्वयंभू शिवलिंग है। पहाड़ी पर स्थित इस भव्य शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

इसके अलावा, मंदिर परिसर में जहाज की सुंदर आकृति वाला एक जल स्रोत है, जिसे गमानिया कुंड कहा जाता है। मान्यता है कि इस कुंड के पवित्र पानी में स्नान करने या इसका उपयोग करने से लोगों की शारीरिक तकलीफें और बीमारियां दूर हो जाती हैं। हाल ही में इस कुंड की महत्ता को देखते हुए भक्तों ने खुद आगे आकर श्रमदान किया और इसकी पूरी तरह से साफ-सफाई की है।

रहस्यमयी 'पाप-पुण्य गली' का अनोखा सच

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण और रहस्य यहां बनी एक बेहद संकरी गली है, जिसे स्थानीय लोग पाप-पुण्य गली कहते हैं। इस गली को लेकर एक बहुत ही पुरानी और अटूट लोक मान्यता चली आ रही है।

कहा जाता है कि इस तंग गली से होकर केवल वही व्यक्ति सुरक्षित बाहर निकल सकता है जो निष्पाप हो और जिसने अपने जीवन में पुण्य कर्म किए हों। ऐसा माना जाता है कि पापी व्यक्ति इस गली को पार नहीं कर पाता है। इस अनोखी कसौटी को देखने और खुद को परखने के लिए यहां आने वाले श्रद्धालु इस गली से गुजरने का प्रयास जरूर करते हैं।

गंगा कुंड और रावण से जुड़ा पौराणिक इतिहास

लीलाधारी महादेव मंदिर का इतिहास और महत्व बेहद प्राचीन है। मंदिर परिसर में एक और चमत्कारी जल स्रोत है जिसे गंगा कुंड कहा जाता है। इस कुंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका पानी कभी भी नहीं सूखता, चाहे कितनी भी भीषण गर्मी क्यों न पड़ रही हो।

इस स्थान से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में लंकापति रावण ने इस मंदा शिखर को यहां स्थापित किया था। तभी से यह स्थान शिव आराधना का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में एक विशेष परंपरा भी निभाई जाती है जिसके तहत:

  • श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान शिव के समक्ष प्रार्थना करते हैं।
  • जब भक्तों की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वे आभार व्यक्त करने के लिए मंदिर में घंटी चढ़ाने की रस्म निभाते हैं।

यही कारण है कि मंदिर परिसर में अनगिनत घंटियां बंधी हुई दिखाई देती हैं, जो यहां आने वाले लोगों की अटूट आस्था की गवाही देती हैं।

https://hindi.news18.com/videos/rajasthan/sirohi-sirohi-liladhari-mahadev-temple-mandar-pap-punya-gali-gamaniya-kund-local18-10628978.html