पश्चिम बंगाल में त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले रेहड़ी-पटरी और फेरी लगाने वाले लाखों दुकानदारों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उनके रोजगार को लेकर चल रही अनिश्चितता पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आगामी दुर्गा पूजा तक पूरे प्रदेश में किसी भी फेरीवाले को उसकी जगह से बेदखल नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस संवेदनशील फैसले के बाद राज्य भर के फेरीवालों ने राहत की सांस ली है।
शनिवार को राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और फेरीवालों की संयुक्त कार्रवाई समिति के पदाधिकारियों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समिति के राज्य अध्यक्ष असित साहा भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री के साथ हुई इस विस्तृत चर्चा के बाद असित साहा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस निर्णय से राज्य भर के हॉकर्स के बीच फैला डर का माहौल अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दिया मानवीय आश्वासन
असित साहा के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बेहद संवेदनशील रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष अक्टूबर में आयोजित होने वाली दुर्गा पूजा के संपन्न होने तक किसी भी फेरीवाले के खिलाफ हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा, बैठक में उन फेरीवालों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई जो विभिन्न रेलवे स्टेशनों और रेलवे की जमीन पर अपनी दुकान लगाते हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि वे इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस विषय को लेकर राज्य सरकार बहुत जल्द भारतीय रेलवे विभाग के उच्च अधिकारियों से संपर्क साधेगी, ताकि रेलवे क्षेत्रों में व्यवसाय करने वाले गरीबों के हितों की भी रक्षा की जा सके।
अगले सप्ताह होगी नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण बैठक
फेरीवालों को सुव्यवस्थित करने और उनके स्थायी पुनर्वास की रूपरेखा तैयार करने के लिए अगले हफ्ते एक और बड़ी बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में फेरीवाला संगठनों के प्रतिनिधि और राज्य नगर निगम विभाग के सचिव मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस आगामी बैठक में निम्नलिखित विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी:
- फेरीवालों को आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया।
- दुकानदारों के कारोबार को नियमित और कानूनी संरक्षण देने की योजना।
- शहरी व्यवस्था को प्रभावित किए बिना हॉकर्स के स्थायी पुनर्वास के उपाय।
बेदखली के डर से जूझ रहे लाखों परिवारों को मिली सुरक्षा
उल्लेखनीय है कि राज्य में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद से ही विभिन्न इलाकों और रेलवे स्टेशनों के पास अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाई जा रही थी। इस प्रशासनिक कार्रवाई के तहत कई बाजारों में फेरीवालों को दुकानें हटाने के नोटिस भी थमाए गए थे।
इस अचानक हुई कार्रवाई से लाखों रेहड़ी-पटरी संचालकों के सामने अचानक रोजी-रोटी का गंभीर संकट आ खड़ा हुआ था और वे लगातार सरकार से पुनर्वास की गुहार लगा रहे थे। ऐसे में दुर्गा पूजा तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करने का राज्य सरकार का यह फैसला इन गरीब परिवारों की खुशियों को बहाल करने वाला साबित होगा, जिससे वे बिना किसी खौफ के त्योहार के सीजन में अपना कारोबार कर सकेंगे।
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