उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) 2026 का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो गया है। तीन दिनों तक चली इस बड़ी परीक्षा में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद कई स्थानों पर सेंधमारी की कोशिश की गई। परीक्षा के दौरान कुल 44 फर्जी परीक्षार्थियों को दूसरे उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके अलावा, एक परीक्षार्थी को मोबाइल फोन के जरिए नकल सामग्री का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया है। इस परीक्षा के लिए कुल 19,94,661 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिसमें से 17,70,714 परीक्षार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस प्रकार कुल 88.77% अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है।
यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग की पहली बड़ी परीक्षा
यह परीक्षा उत्तर प्रदेश के 60 जिलों में आयोजित की गई थी, जिसके लिए कुल 955 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। उल्लेखनीय है कि यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से पहली बार यूपी टीईटी परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने कड़े प्रबंध किए थे। सभी 60 जिलों में आयोग के सदस्यों के साथ-साथ रिटायर्ड IAS और IPS अधिकारियों को विशेष पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया था ताकि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ प्रशांत कुमार ने इस परीक्षा के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों का आभार प्रकट किया है।
कंट्रोल रूम से AI तकनीक द्वारा लाइव मॉनिटरिंग
परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी और नकलविहीन बनाने के लिए तकनीकी का भरपूर सहयोग लिया गया। प्रयागराज स्थित आयोग के मुख्य कार्यालय में एक अत्याधुनिक AI इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम स्थापित किया गया था। इस कंट्रोल रूम की मदद से सूबे के सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी। AI तकनीक की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी गई, जिससे फर्जी परीक्षार्थियों की पहचान करने में बड़ी मदद मिली।
तीन दिनों का विवरण: किस दिन कितने फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए?
आयोग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परीक्षा के तीनों दिन जालसाज पकड़े गए। इसका दिनवार विवरण इस प्रकार है:
- 2 जुलाई 2026: परीक्षा के पहले दिन विभिन्न केंद्रों से कुल 14 संदिग्ध परीक्षार्थियों को पकड़ा गया।
- 3 जुलाई 2026: दूसरे दिन कुल 11 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए और इसके साथ ही एक अभ्यर्थी को मोबाइल फोन के माध्यम से नकल करते हुए पकड़ा गया।
- 4 जुलाई 2026: परीक्षा के अंतिम दिन सबसे ज्यादा मुन्ना भाई पकड़े गए, जहां कुल 19 फर्जी परीक्षार्थियों को दबोचा गया।
पकड़े गए इन सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया गया है। आयोग के निर्देश पर इन सभी संदिग्धों और फर्जी परीक्षार्थियों को स्थानीय पुलिस प्रशासन के हवाले कर दिया गया है और उनके विरुद्ध नामजद मुकदमा दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
साढ़े चार साल का लंबा इंतजार और नौकरी बचाने का दबाव
उत्तर प्रदेश में लगभग साढ़े चार साल के लंबे अंतराल के बाद यूपी टीईटी परीक्षा का आयोजन किया गया है। यही कारण था कि इस बार परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक थी। इस परीक्षा में शामिल होने वाले 19 लाख से अधिक अभ्यर्थियों में एक बड़ा हिस्सा उन शिक्षकों का भी था जो पहले से ही सेवा में हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 1 लाख 85 हजार सेवारत शिक्षक इस परीक्षा में शामिल हुए।
इन सेवारत शिक्षकों के लिए यह परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण है क्योंकि उन्हें मार्च 2027 तक इस परीक्षा को हर हाल में पास करना अनिवार्य किया गया है। यदि वे इस समय सीमा के भीतर परीक्षा पास करने में असफल रहते हैं, तो उनकी सरकारी नौकरी जा सकती है। परीक्षा में शामिल होने वाले कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो पिछले 20 से 25 साल से लगातार स्कूलों में अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। जिस समय इन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उस समय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का कोई नियम या अनिवार्य प्रावधान नहीं था। शिक्षक संघों का आरोप है कि इस अनिवार्य परीक्षा और नौकरी जाने के अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण कम से कम दो शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर तनाव के बीच परीक्षा का आयोजन संपन्न हुआ है।
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