राजस्थान की भैरव गली: कोटा डोरिया का ऐतिहासिक गढ़
राजस्थान का कोटा शहर केवल अपनी शैक्षणिक साख के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत के लिए भी जाना जाता है। कोटा शहर की ऐतिहासिक भैरव गली को कोटा डोरिया साड़ियों का सबसे प्रमुख और पारंपरिक केंद्र माना जाता है। दशकों से इस पारंपरिक गली के स्थानीय कारीगर हाथकरघों पर बेहद बारीक बुनाई के जरिए ऐसी लाजवाब साड़ियां तैयार कर रहे हैं, जिनकी मांग देश के कोने-कोने में तो है ही, साथ ही विदेशों में भी इनकी भारी धूम है।
कोटा डोरिया साड़ियों की अनूठी खूबियां
कोटा डोरिया साड़ियों की कुछ बेहद खास विशेषताएं होती हैं जो इन्हें दुनिया के अन्य सभी वस्त्रों से बिल्कुल अलग और अनूठा बनाती हैं। इन साड़ियों की मुख्य पहचान इस प्रकार है:
- हल्की बनावट: यह साड़ियां वजन में बेहद हल्की और आरामदायक होती हैं।
- पारदर्शी कपड़ा: सूती और रेशमी धागों के अनूठे मेल से तैयार होने के कारण यह कपड़ा काफी पारदर्शी दिखाई देता है।
- चौकोर 'खाट' डिजाइन: साड़ी के कपड़े पर चौकोर चेक का डिजाइन बना होता है, जिसे स्थानीय भाषा में 'खाट' डिजाइन कहा जाता है।
- उत्कृष्ट हस्तकला: हर एक धागे को हाथ से पिरोकर उत्कृष्ट हस्तशिल्प के जरिये साड़ी का रूप दिया जाता है।
लाखों रुपये तक होती है कीमत
इसकी विशेष रूपरेखा, अत्यधिक महीन बुनाई और हाथ से तैयार किए जाने के कारण कुछ प्रीमियम कोटा डोरिया साड़ियों की कीमत लाखों रुपये तक चली जाती है। भैरव गली आज भी राजस्थान की इस समृद्ध हस्तकरघा कला की साख को जीवित रखे हुए है। यहां आने वाले पर्यटक बुनाई की इस पूरी जटिल और कलात्मक प्रक्रिया को बेहद करीब से देखते हैं और इस ऐतिहासिक कला की विरासत से सीधे रूबरू होते हैं।
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