अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी करने वाले आरोपियों के चेहरे से अब हवाइयां उड़ रही हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जेल की सलाखों के पीछे पहुंचते ही इन आरोपियों को अपनी इस शर्मनाक करतूत पर गहरा पछतावा हो रहा है और वे बुरी तरह डरे हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक की जांच में गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। उन्हें इस तरह की बड़ी चोरी की साजिश रचने का कोई पुराना अनुभव भी नहीं था। ऐसे में अब जांच एजेंसियों के सामने यह सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा हो गया है कि आखिर इस पूरी साजिश की शुरुआत किसने की और किसके कहने पर सभी आरोपियों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
चोरी की साजिश के पीछे कौन? मास्टरमाइंड की तलाश
अयोध्या पुलिस के सूत्रों का कहना है कि अब तक की गहन तफ्तीश के बावजूद इस चोरी कांड के मुख्य सूत्रधार का पर्दाफाश नहीं हो सका है। पुलिस इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने की हरसंभव कोशिश कर रही है कि आखिर इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है। मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी अविनाश से पुलिस पहले ही लंबी पूछताछ कर चुकी है। पुलिस अविनाश को हिरासत में लेकर उससे जुड़े कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच की प्रगति और जरूरत को देखते हुए इस मामले के अन्य आरोपियों को भी रिमांड पर लेने की तैयारी में है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा सके।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज
इस हाई प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, अयोध्या पुलिस ने फिलहाल ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव और अनिल मिश्रा के बयान दर्ज नहीं किए हैं। हालांकि, शनिवार को लखनऊ की विशेष जांच टीम यानी SIT ने अनिल मिश्रा और गोपाल राव के आधिकारिक बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी लंबी पूछताछ की। इस पूछताछ के बाद SIT की टीम लखनऊ लौट गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि स्थानीय अयोध्या पुलिस भी बहुत जल्द अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बयान औपचारिक रूप से दर्ज कर लेगी।
इस मामले में चंपत राय और कृष्ण मोहन यादव के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। मंदिर से जुड़े इस बड़े मामले में अभी भी करीब 70 से 80 लोगों के बयान दर्ज होना बाकी है। पुलिस मंदिर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों, काउंटिंग सेंटर के कर्मचारियों और बैंक के स्टाफ से लगातार पूछताछ कर रही है। अगले सप्ताह के अंत तक इन सभी लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि राम मंदिर के चढ़ावा काउंटिंग सेंटर में सुरक्षा और CCTV कैमरों की निगरानी की पूरी जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट के पास ही थी।
विशेष अदालत से मिली जेल में पूछताछ की मंजूरी
दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी के आरोपियों से सलाखों के पीछे पूछताछ करने के लिए अयोध्या पुलिस को अदालत से हरी झंडी मिल गई है। पुलिस की एक विशेष टीम रविवार को जेल में बंद पांच आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करेगी। जिन आरोपियों से पूछताछ की जानी है, उनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, करुणेश पांडे और मनीष यादव शामिल हैं।
इस मामले की कमान संभाल रहे पुलिस उपाधीक्षक यानी CO आशुतोष तिवारी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत में एक प्रार्थना पत्र दाखिल कर आरोपियों से जेल में पूछताछ करने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले पुलिस ने आरोपी अविनाश से जेल में पूछताछ की थी और बाद में उसे पुलिस कस्टडी में भी लिया था। अब इन पांचों आरोपियों से पूछताछ के बाद मिलने वाले सुरागों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी और जरूरत पड़ने पर इन्हें एक-एक करके पुलिस रिमांड पर भी लिया जा सकता है।
करोड़ों की बेनामी संपत्ति की जांच शुरू
पुलिस केवल चोरी की घटना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आरोपियों की आर्थिक स्थिति और उनकी संपत्तियों की भी गहन जांच कर रही है। जांच अधिकारियों को पता चला है कि इस मामले के मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके साले लवकुश मिश्रा के पास अकूत संपत्ति है। अब तक की जांच में इन दोनों आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़ी कम से कम 12 अचल संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है।
शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इन संपत्तियों की बाजार में कीमत कई करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस विभाग अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रहा है कि इनमें से कौन सी संपत्तियां पुश्तैनी यानी खानदानी हैं और कौन सी संपत्तियां हाल ही में खरीदी गई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सिर्फ अयोध्या शहर में ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों जैसे बसावा, मिल्कीपुर और रुदौली में भी बड़ी संपत्तियां खरीदी हैं। इनमें से कई संपत्तियां खुद आरोपियों के नाम पर पंजीकृत हैं, जबकि कुछ को उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर ट्रांसफर या खरीदा गया था। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि क्या इन संपत्तियों को खरीदने में मंदिर के चढ़ावे की रकम का इस्तेमाल किया गया था।
https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/ayodhya-ram-mandir-donation-theft-accused-feeling-remorse-and-they-scared-in-jail-2026-07-04-1229188