फरीदाबाद के किसानों के सामने पानी का गंभीर संकट, जानिए क्यों यहां नाकाम साबित हो रहा है पंजाब का 'तालाब मॉडल'

फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में गिरते भूजल और बिजली-पानी की किल्लत से खेती संकट में है, जहां जमीन की कमी के कारण छोटे किसानों के लिए पंजाब की तर्ज पर तालाब बनाना मुमकिन नहीं है।

सुनपेड़ गांव में गहराता जल संकट

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित सुनपेड़ गांव के किसानों के लिए इन दिनों खेती करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इलाके में पानी की भारी किल्लत के कारण फसलों को बचाना बेहद मुश्किल हो रहा है। खेतों की प्यास बुझाने के लिए किसानों को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आजीविका और आमदनी दोनों पर सीधा संकट मंडराने लगा है।

सिंचाई के सामने खड़ी हुईं तीन बड़ी चुनौतियां

गांव में सिंचाई की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। किसानों को खेती के लिए जरूरी पानी न मिलने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं:

  • लगातार गिरता भूजल स्तर: जमीन के नीचे का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे पानी निकालना बेहद मुश्किल हो गया है।
  • नहर में पानी की अनियमितता: सरकारी नहरों से खेतों तक पानी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाता है, जिससे फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाता।
  • बिजली की भारी किल्लत: बिजली कटौती के कारण किसान सिंचाई के उपकरणों और पंपों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

पंजाब का तालाब मॉडल और फरीदाबाद के किसानों की बेबसी

स्थानीय किसान महेंद्र सैनी के अनुसार, छोटे किसानों के लिए बारिश के पानी को सहेज कर रखना कोई आसान काम नहीं है। उन्होंने पंजाब के खेतों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां के कई इलाकों में किसान अपने खेतों में छोटे-छोटे तालाब बना लेते हैं। इन तालाबों में बारिश के पानी को जमा कर लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में इस मॉडल को अपनाना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है। महेंद्र सैनी का कहना है कि यहां के अधिकांश किसान बेहद छोटे स्तर पर खेती करते हैं। उनके पास इतनी जमीन नहीं है कि वे खेती की जमीन को छोड़कर वहां तालाब का निर्माण कर सकें। जमीन का क्षेत्रफल कम होने के कारण अपनी उपजाऊ भूमि पर तालाब बनाना इन छोटे किसानों के लिए संभव नहीं है, जिसके कारण वे इस बेहतरीन जल संरक्षण तकनीक का लाभ उठाने से वंचित हैं।

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