मिथिलांचल की थाली की शान: 'बीरा' साग
बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में साग केवल एक साधारण सब्जी नहीं है, बल्कि यह वहां की समृद्ध पारंपरिक खानपान संस्कृति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। चने, बथुआ, पालक और सरसों जैसे मौसमी सागों का अनोखा स्वाद साल के बारह महीने लेने के लिए यहां के घरों में वर्षों से 'बीरा' बनाने की अनूठी परंपरा चली आ रही है। यह हरी पत्तेदार सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन और पूरी तरह से पारंपरिक देसी तरीका है।
बीरा साग तैयार करने की विधि
इस बेहद खास पारंपरिक व्यंजन को तैयार करने की प्रक्रिया बहुत ही आसान और दिलचस्प है। इसके लिए मुख्य रूप से इन चरणों का पालन किया जाता है:
- साग को सुरक्षित करना: सबसे पहले मौसमी साग को अच्छी तरह साफ करके उसे हल्का भूनकर या फिर सुखाकर सुरक्षित रख लिया जाता है। इसी सूखे या भुने हुए साग को बीरा कहा जाता है।
- मसालेदार ग्रेवी तैयार करना: जब इस साग को पकाना हो, तो सबसे पहले सरसों, लहसुन, काली मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और टमाटर के मेल से एक स्वादिष्ट मसालेदार ग्रेवी तैयार की जाती है।
- पकाने की प्रक्रिया: इस तैयार ग्रेवी में पहले से सुरक्षित रखा गया बीरा डाला जाता है और इसे कुछ मिनटों तक अच्छी तरह पकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
इन व्यंजनों के साथ लाजवाब लगता है स्वाद
पारंपरिक तरीके से बनकर तैयार हुआ यह बीरा साग खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। इस लाजवाब साग का आनंद आप गरमा-गरम चावल, रोटी, पराठे और लिट्टी के साथ ले सकते हैं। इस देसी विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस तरह तैयार किया गया साग लंबे समय तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है और इसका स्वाद भी फीका नहीं पड़ता।
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