मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक स्वाद
जब भी मिथिला का नाम आता है, तो लोगों के जेहन में सबसे पहले मखाना और पाग की तस्वीर उभरती है। लेकिन मिथिला की पहचान सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। यहाँ के घरों में पारंपरिक रूप से तैयार होने वाले आलू के चिप्स भी सालों से लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद चिप्स के आने से बहुत पहले से ही यहाँ इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने का चलन रहा है।
नई फसल के समय घरों में तैयारी
मिथिला के घरों में जब आलू की नई फसल आती है, तो महिलाएं बहुत बड़े पैमाने पर इन चिप्स को बनाने की तैयारी में जुट जाती हैं। इसे बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक होती है, जिसमें किसी भी तरह के प्रिजर्वेटिव या हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
चिप्स बनाने की सदियों पुरानी अनूठी विधि
इस पारंपरिक चिपष को बनाने की विधि बेहद सरल और व्यावहारिक है। इसके लिए सबसे पहले बड़े आकार के आलू चुने जाते हैं। फिर इन आलुओं को बेहद पतले स्लाइस में काट लिया जाता है। इसके बाद, कटे हुए आलुओं को कुछ समय के लिए नमक वाले पानी में भिगोकर रखा जाता है।
इसके बाद अगला चरण इन्हें सुखाने का होता है। इन आलुओं को बाँस की टोकरियों में फैलाकर लगभग 3 से 4 दिन तक तेज धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है। जब ये पूरी तरह से सूख जाते हैं, तो इन्हें एक डिब्बे में बंद करके बेहद लंबे समय के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है।
सिर्फ 10 सेकंड में तैयार हो जाता है कुरकुरा स्वाद
इन चिप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें खाने के लिए आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। जब भी खाने का मन हो, इन्हें गर्म तेल में डालिए और मात्र 10 सेकंड के भीतर ही ये कुरकुरे और स्वादिष्ट चिप्स खाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं।
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