पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के दुर्गापुर-फरीदपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सरपी जंगल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के एक कर्मचारी का शव पेड़ से लटका हुआ पाया गया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान 57 वर्षीय बिश्वदेव बाउरी के रूप में की गई है, जो झांझरा कोलियरी में कार्यरत थे। शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसा माना जा रहा है कि वह काफी समय से भारी कर्ज और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे, जिसके कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, लौदोहा थाने की पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए गहन जांच शुरू कर दी है।
लापता होने के बाद जंगल में मिला शव
मृतक बिश्वदेव बाउरी के पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वह शनिवार की सुबह से ही अचानक लापता हो गए थे। जब वह पूरे दिन घर वापस नहीं लौटे, तो उनके परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। परिवार के सदस्यों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला। इसके बाद रविवार की सुबह खोजबीन के दौरान सरपी जंगल के एक सुनसान और एकांत इलाके में उनका शव पेड़ से लटकता हुआ मिला। इस बात की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही लौदोहा थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
वसूली एजेंटों पर धमकी देने का आरोप
इस दुखद घटना को लेकर मृतक के भतीजे विक्रम बाउरी ने अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि जब वह अपने काम पर गए हुए थे, तभी उन्हें घर से चाचा के लापता होने की खबर मिली थी। इसके बाद वह तुरंत वापस लौटे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उनकी खोजबीन शुरू की। विक्रम ने बताया कि इस जंगली इलाके में पहले भी आत्महत्या की कुछ घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए वे सभी इसी आशंका के साथ जंगल की तरफ ढूंढने निकले थे। काफी देर तलाश करने के बाद उन्हें अपने चाचा का शव जंगल में फंदे से लटका हुआ मिला।
विक्रम ने आगे बताया कि उनके चाचा ECL में नौकरी करते थे और उनके परिवार में उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। उन्होंने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि पिछले दिन ही बैंक के लोन रिकवरी विभाग के कुछ लोग उनके घर आए थे। उन लोगों ने उनके चाचा को काफी डराया-धमकाया था और मानसिक रूप से परेशान किया था। विक्रम के अनुसार, संभवतः वह इस अत्यधिक मानसिक दबाव को सहन नहीं कर पाए और उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पूरी निश्चितता के साथ कुछ नहीं कह सकते और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मानसिक तनाव और पुलिस की तफ्तीश
बिश्वदेव बाउरी की इस अचानक मौत से उनके पूरे परिवार और आसपास के ग्रामीण इलाके में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि वह लंबे समय से बैंक के कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे। इसके साथ ही परिवार का यह भी दावा है कि लोन रिकवरी एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा लगातार दिए जा रहे मानसिक तनाव और धमकियों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था। इस प्रताड़ना के आरोपों में कितनी सच्चाई है, पुलिस इसकी बारीकी से पड़ताल कर रही है।
लौदोहा थाना पुलिस का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने और मामले की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस इस मामले में आत्महत्या और प्रताड़ना समेत सभी संभावित कोणों से जांच को आगे बढ़ा रही है। इस घटना ने एक बार फिर कर्ज के जाल और रिकवरी एजेंटों के कथित अमानवीय रवैये पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि क्या सच में बिश्वदेव ने कर्ज और प्रताड़ना से तंग आकर जान दी या फिर इस घटना के पीछे कोई अन्य कारण छिपा हुआ है।
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