राम मंदिर में ऐसी व्यवस्था हो ताकि भविष्य में कोई 'चंपत राय' न बन सके, दान पात्र में चोरी पर भड़का संघ और संत समाज

अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्र से चोरी के मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संतों ने दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और ई-रिक्शा बंद करने वाले ऐप्स पर सरकार के फैसलों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

राम मंदिर में चोरी पर संघ की दोटूक: किसी भी दोषी को बख्शा न जाए

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुई हालिया घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। राम मंदिर के दान पात्र से पवित्र धन की चोरी होने के मामले पर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी पहली और बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में चाहे कोई कितना भी रसूखदार या बड़ा क्यों न हो, उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस तरह का जघन्य पाप करने वाले हर व्यक्ति को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने इस पूरे प्रकरण पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सरकार और मंदिर ट्रस्ट दोनों को स्पष्ट हिदायत दी है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तुरंत और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, "पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग एवं बलिदान के कारण संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए रामलला मंदिर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केन्द्र बना। मंदिर में रखे हुए दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से समूचे समाज और राम भक्तों की भावना एवं श्रद्धा को आघात पहुँचा है तथा इस घटना से हम सभी आहत हैं।"

साजिशकर्ताओं से सावधान रहने की जरूरत, बने पारदर्शी व्यवस्था

दत्तात्रेय होसबाले ने जांच एजेंसियों पर भरोसा जताते हुए कहा कि मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसे कठोर दंड मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हिंदू समाज से एक महत्वपूर्ण अपील भी की। उन्होंने कहा कि इस संकट और परीक्षा की घड़ी में सभी को आवश्यक धैर्य और संयम दिखाना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें सनातन धर्म और समाज को बदनाम करने के अपने घिनौने षड़यंत्रों को विफल करें।

इस पूरे मामले पर RSS के साथ-साथ विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बाबा बागेश्वर जैसे देश के प्रमुख साधु-संत भी एक सुर में खड़े दिखाई दे रहे हैं। सभी का मानना है कि भगवान के चरणों में अर्पित दान को चुराने वाले महापापी हैं और उनके रसूख को देखे बिना उन पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, कौन छोटा है और कौन बड़ा, इसकी बिल्कुल भी परवाह न की जाए।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है। संघ, परिषद और संत समाज इस बात को लेकर भी पूरी तरह सहमत हैं कि कुछ राजनीतिक ताकतें इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की फिराक में हैं। ऐसे स्वार्थी तत्वों के मंसूबों से हिंदू समाज को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन को लेकर राजनीति कोई पहली बार नहीं हो रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि इन राजनीतिक बहसों से ऊपर उठकर मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन को मजबूत किया जाए।

इस समस्या का स्थायी समाधान केवल बयानों से नहीं होगा। इसके लिए राम मंदिर ट्रस्ट में दान के पूरे हिसाब-किताब के लिए एक फूलप्रूफ व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए। मंदिर प्रबंधन में आधुनिक पेशेवरों (professionals) की सेवाएं ली जानी चाहिए। दान और लेखा-जोखा की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से वैज्ञानिक और पारदर्शी होनी चाहिए। मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन इतना सुदृढ़ होना चाहिए कि भविष्य में किसी को भी राम मंदिर या इसके ट्रस्ट पर मनमाने ढंग से कब्जा जमाने का अवसर न मिल सके और भविष्य में कोई दोबारा चंपत राय न बन सके।

पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण: क्या वाकई गाड़ियों के लिए है यह सुरक्षित?

इन दिनों देश के वाहन चालकों के बीच एक बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या पेट्रोल में मिलाया जा रहा एथेनॉल उनकी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचा रहा है? क्या इससे गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है? इन आशंकाओं पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का पक्ष रखा है। हरदीप सिंह पुरी का दावा है कि एथेनॉल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में भारी गिरावट आने की बात पूरी तरह सच नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी वाहन का माइलेज कम होने के पीछे इंजन की हालत और रखरखाव जैसे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं। उनके अनुसार, एथेनॉल मिश्रण से इंजन की ताकत (power) और गति बढ़ाने की क्षमता (acceleration) पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में पूरी दुनिया जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से हटकर स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन (clean fuel) की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण (blending) का निर्णय देश के हित में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने बताया कि अब तो रेसिंग कारों में भी एथेनॉल युक्त पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा है, क्योंकि यह उनके acceleration को बेहतर बनाता है।

हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री और भारत पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारियों ने भी यह स्वीकार किया है कि एथेनॉल के मिश्रण से माइलेज में कुछ कमी जरूर आती है। लेकिन यह कमी कितनी होती है, इसे लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई देता है। ईंधन विशेषज्ञों (experts) का मानना है कि सामान्य पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की ऊर्जा सघनता (energy density) लगभग 33 प्रतिशत कम होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि उतनी ही शक्ति उत्पन्न करने के लिए इंजन को अधिक ईंधन की खपत करनी पड़ती है, जिससे गाड़ी का माइलेज स्वाभाविक रूप से घट जाता है।

विशेषज्ञों ने वाहन चालकों की चिंताओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि:

  • वर्ष 2024 से पहले निर्मित पुराने वाहनों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से माइलेज में कमी आ सकती है क्योंकि वे इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं।
  • वर्ष 2024 के बाद निर्मित नए वाहन पूरी तरह से E10 और E20 मानकों के अनुकूल (compliant) हैं।
  • इन नई गाड़ियों के इंजन और ईंधन प्रणालियों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एथेनॉल के इस्तेमाल से इनके इंजन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

निश्चित रूप से, कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना और हमारी मूल्यवान विदेशी मुद्रा को बचाना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी एथेनॉल को एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प माना गया है। लेकिन कोई भी विकल्प तभी सफल होता है जब उपभोक्ता उस पर भरोसा करें। अगर एथेनॉल के कारण पुरानी गाड़ियां खराब होने लगेंगी, ईंधन पंप (fuel pump) और इंजन के पुर्जे खराब होने लगेंगे, तो आम जनता का इस पर से विश्वास उठ जाएगा। इसलिए सरकार को केवल सैद्धांतिक बातें करने के बजाय व्यावहारिक रूप से यह सिद्ध करना होगा कि यह ईंधन पूरी तरह से सुरक्षित है। देश की जनता पर्यावरण सुधार के प्रयासों में सरकार का साथ देने को तैयार है, बशर्ते उनके वाहनों को कोई नुकसान न पहुंचे।

ई-रिक्शा को रिमोट से बंद करने वाले ऐप्स पर सरकार का कड़ा प्रहार

हाल ही में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उन मोबाइल ऐप्स को तुरंत प्रतिबंधित (block) करने के आदेश दिए हैं, जिनके जरिए ई-रिक्शा चालकों को परेशान किया जा रहा था। पिछले कुछ समय से दिल्ली, मुंबई, भोपाल और उज्जैन जैसे देश के कई बड़े शहरों से इस तरह की हजारों शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ संदिग्ध मोबाइल ऐप्स के माध्यम से सड़कों पर चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी को दूर बैठे ही बंद (switch off) कर दिया जाता था। इस गंभीर तकनीकी गड़बड़ी की जांच के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए एंड्रॉयड और IOS ऐप स्टोर से BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion जैसे ऐप्स को तत्काल हटाने का निर्देश जारी कर दिया है।

इन ऐप्स का दुरुपयोग ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को रिमोट कंट्रोल के जरिए अचानक बंद करने के लिए किया जा रहा था, जिससे गरीब ई-रिक्शा चालक सड़क पर असहाय हो जाते थे। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी लिथियम (Lithium) बैटरी का मस्तिष्क उसका बीएमएस यानी बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है। बैटरी की सेहत (health), वोल्टेज और तापमान की निगरानी करने के उद्देश्य से ही इन ऐप्स को विकसित किया गया था। जब लोग नए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं, तो वाहन निर्माता कंपनियां ग्राहकों की सुविधा के लिए इन ऐप्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देती हैं। लेकिन यदि इन बैटरियों के नियंत्रण सिस्टम को मजबूत पासवर्ड से सुरक्षित (protect) न किया जाए, तो कोई भी शरारती तत्व इन ऐप्स के जरिए बैटरी को अपने वश में कर सकता है।

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस तकनीक का दुरुपयोग मुख्य रूप से दो वजहों से किया जा रहा था। पहला, कुछ स्थानीय मैकेनिक ई-रिक्शा चालकों से मरम्मत के नाम पर अवैध पैसा ऐंठने के लिए उनकी बैटरियों को ब्लॉक कर देते थे। दूसरा, कुछ प्रतिद्वंद्वी ई-रिक्शा चालक सवारियां छीनने के चक्कर में दूसरे ई-रिक्शा को ब्लॉक करते थे। सरकार ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए केवल उन्हीं ऐप्स को ब्लॉक किया है जिनका बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा था। यह कदम निश्चित रूप से उन हजारों गरीब ई-रिक्शा चालकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।

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