कानपुर से इंदौर का सफर तय करेगा दरियाई घोड़ा 'सतीश', 700 किमी की यात्रा में नहाने पर खर्च होगा 20 हजार लीटर पानी, बदले में मिलेगी शेरनी 'वीरा'

कानपुर चिड़ियाघर से दरियाई घोड़ा 'सतीश' जल्द ही इंदौर के नए आशियाने के लिए रवाना होगा। इस 700 किलोमीटर लंबी यात्रा में उसे स्वस्थ रखने के लिए करीब 20,000 लीटर पानी से नहलाया जाएगा, जिसके बदले में कानपुर को तीन साल की बब्बर शेरनी 'वीरा' मिलेगी।

उत्तर प्रदेश का कानपुर प्राणी उद्यान हमेशा से ही विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों और पशु-पक्षियों के लिए एक बेहद सुरक्षित और अनुकूल आशियाना माना जाता रहा है। इस चिड़ियाघर की मुख्य पहचान और दर्शकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र यहाँ का एक दरियाई घोड़ा (हिप्पोपोटेमस) रहा है, जिसे लोग प्यार से सतीश कहते हैं। बीते कई दशकों से सतीश कानपुर आने वाले सैलानियों का मन बहलाता रहा है। लेकिन अब, सतीश के जीवन में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। वह बहुत जल्द एक बेहद यादगार और अनोखे सफर पर अपने नए ठिकाने के लिए रवाना होने जा रहा है। वन्यजीव विनिमय (एनिमल एक्सचेंज) कार्यक्रम के तहत इस स्थानांतरण की तारीखें जैसे ही तय होंगी, सतीश को विदा कर दिया जाएगा।

सतीश की अनूठी और ऐतिहासिक यात्रा

कानपुर से इंदौर तक का सफर कोई आम सफर नहीं होने वाला है, बल्कि सतीश की यह यात्रा बेहद अनूठी और विशेष होगी। इस दरियाई घोड़े को लगभग 700 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी है और खास बात यह है कि वह इस पूरे रास्ते नहाते हुए जाएगा। सफर के दौरान सतीश के शरीर को गीला रखने के लिए लगभग 20,000 लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। दरियाई घोड़ा एक ऐसा जीव है जो पानी और जमीन दोनों पर रह सकता है, लेकिन वह अपने जीवन का करीब 80 फीसदी समय पानी के भीतर ही बिताना पसंद करता है। यही मुख्य वजह है कि दोनों शहरों के चिड़ियाघर प्रशासनों ने इस स्थानांतरण के लिए मानसून यानी बारिश के मौसम को चुना है ताकि वातावरण में स्वाभाविक रूप से नमी बनी रहे। सतीश को जिस ट्रक से ले जाया जाएगा, उस पर पानी छिड़कने की विशेष व्यवस्था की गई है। ट्रक पर 100-100 लीटर की क्षमता वाले कई पानी के टैंक रखे जाएंगे और सफर के दौरान स्प्रे (फुहार) के माध्यम से लगातार उसके ऊपर पानी बरसाया जाएगा।

सुरक्षा के लिए विशेष रूप से तैयार पिंजरा

सतीश को सुरक्षित रूप से इंदौर पहुँचाने के लिए एनिमल एक्सचेंज की प्रक्रिया अब अपने अंतिम दौर में पहुँच चुकी है। इंदौर चिड़ियाघर प्रशासन की देखरेख में सतीश के लिए एक विशेष लोहे का पिंजरा तैयार कराया जा रहा है। इस पिंजरे का आकार दरियाई घोड़े की शारीरिक बनावट को ध्यान में रखकर तय किया गया है, जिसकी माप 8 फीट लंबी, 5 फीट चौड़ी और उचित ऊँचाई की होगी। पिंजरे का आकार इस तरह रखा गया है कि सतीश को इसके अंदर उठने और बैठने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बहुत अधिक बड़ा पिंजरा बनाने से यात्रा के दौरान जानवर के टकराकर घायल होने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए आकार को सीमित और सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा, सफर के दौरान सतीश के आराम का पूरा ध्यान रखने के लिए बीच-बीच में बाल्टी से भी उस पर पानी डाला जाएगा। सुरक्षा के कड़े मानकों को देखते हुए सेंट्रल जू अथॉरिटी (केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण) ने इस वाहन के लिए एक अधिकतम गति सीमा भी तय की है। दरियाई घोड़े को ले जाने वाला ट्रक किसी भी परिस्थिति में 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज नहीं चलाया जाएगा।

कानपुर चिड़ियाघर में शेरों का कुनबा बढ़ाने की तैयारी

इस बड़े एनिमल एक्सचेंज के बदले में कानपुर प्राणी उद्यान को भी एक बहुत ही खास सौगात मिलने वाली है। सतीश को इंदौर भेजने के एवज में इंदौर चिड़ियाघर प्रशासन कानपुर को वीरा नाम की एक शेरनी सौंपेगा। वीरा की उम्र इस समय महज तीन वर्ष है और वह एशियाई प्रजाति की एक बेहद फुर्तीली शेरनी है, जिसका जन्म इंदौर के चिड़ियाघर में ही हुआ था। दरअसल, कानपुर चिड़ियाघर में पिछले आठ वर्षों से शेरों के कुनबे में किसी नए शावक का जन्म नहीं हुआ है। इस कुनबे को आगे बढ़ाने और शेरों की संख्या में इजाफा करने के लिए जू प्रशासन लंबे समय से प्रयासरत था। अब तीन साल की युवा शेरनी वीरा के आने से कानपुर के बब्बर शेर शंकर के साथ उसकी जोड़ी बनाई जाएगी। वर्तमान में कानपुर प्राणी उद्यान में बब्बर शेर शंकर अकेला नर शेर है, जबकि उसके परिवार में उसकी बहन नंदनी और माँ उमा ही बची हैं। कुछ समय पहले इस कुनबे के मुखिया बब्बर शेर अजय की मृत्यु हो चुकी है, जिसके बाद से यहाँ एक नए नर-मादा जोड़े की जरूरत महसूस की जा रही थी।

त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए हर 100 किलोमीटर पर पड़ाव

इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया और यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी देते हुए रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर फिरोज खान ने बताया कि दरियाई घोड़ा अपना अधिकांश समय पानी के अंदर बिताता है। यदि वह लंबे समय तक पानी से बाहर रहता है या उसका शरीर सूखा रहता है, तो उसकी त्वचा (स्किन) फटने लगती है और उसे गंभीर संक्रमण या दर्द का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से इंदौर जाते वक्त सतीश की त्वचा को लगातार नम बनाए रखने के लिए पानी की बौछार करने की पुख्ता व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि सफर काफी लंबा और थकाऊ होने वाला है, इसलिए सतीश की सेहत को ध्यान में रखते हुए हर 100 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ट्रक को रोका जाएगा और वहाँ विशेष पड़ाव (स्टॉपेज) दिया जाएगा। इंदौर चिड़ियाघर प्रशासन ने भी इस यात्रा को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। वर्तमान समय में कानपुर चिड़ियाघर में कुल पांच दरियाई घोड़े मौजूद हैं, लेकिन सतीश के इंदौर चले जाने के बाद यहाँ इनकी संख्या घटकर चार रह जाएगी।

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